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बारिश में छाता लेकर पढ़ाई करने के लिए मजबूर
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रावमापा डियूर के परिसर में बारिश के दौरान छाता लेकर बैठे विद्यार्थी।
- फोटो : Chamba
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चंबा। उपमंडल सलूणी के सीनियर सेकेंडरी स्कूल डियूर के बच्चों को बारिश में छाते का सहारा लेकर पढ़ाई करनी पड़ती है। हालात यह हैं कि स्कूल भवन न होने के कारण बच्चे खुले आसमान के नीचे पढ़ाई करने के लिए मजबूर हैं। वीरवार को बारिश के बीच विद्यार्थियों को छाता खोलकर पढ़ाई करनी पड़ी। दरअसल, स्कूल भवन को दिसंबर 2020 में गिरा दिया गया था, जिसके बाद स्कूल को नया भवन नहीं मिल पाया है। ऐसे में यहां भारी बारिश होने पर बच्चों को छुट्टी तक करनी पड़ती है।
जानकारी के मुताबिक स्कूल में बच्चों की संख्या करीब चार सौ है। भवन गिराने के बाद अब दो कमरे और एक हाल बचा है, लेकिन कोरोना के चलते इन कमरों में भी करीब पचास बच्चे ही एक समय में बैठ सकते हैं। जबकि, शेष बच्चों को खुले आसमान तले इंतजार करना पड़ता है। स्कूल भवन की कमी के चलते रोटेशन में कक्षाएं लगाई जा रही हैं। अलग-अलग कक्षाओं के बच्चों के लिए समयसारणी तैयार की गई है। हैरानी की बात तो यह है कि भवन निर्माण को लेकर स्कूल प्रशासन और स्कूल प्रबंधन समिति ने कई बार प्रशासन और सरकार से पत्राचार किया लेकिन, आज दिन तक कोई पहल नहीं की गई है। बहरहाल, बेहतर शिक्षा के दावे करने वाली प्रदेश सरकार की यहां पोल खुल रही है।
स्कूल प्रबंधन समिति अध्यक्ष संजय कुमार का कहना है कि भवन निर्माण के लिए कई बार प्रशासन और सरकार को अवगत करवाया गया लेकिन, आज दिन तक कोई पहल नहीं हुई। कहा कि जल्द सरकार और प्रशासन ने व्यवस्था नहीं की तो उन्हें मजबूरन कड़े कदम उठाने पड़ेंगे।
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स्कूल प्रधानाचार्य फारूख का कहना है कि स्कूल भवन से संबंधित विभाग से नियमित तौर पर पत्राचार किया गया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि जल्द स्कूल भवन का निर्माण होगा।
उच्च शिक्षा उपनिदेशक चंबा प्यार सिंह चाढ़क का कहना है कि यह मामला उनके ध्यान में है। कहा कि प्रस्ताव उच्चाधिकारियों को भेज दिया गया है। जैसे ही स्वीकृति मिलेगी, आगामी प्रयास शुरू कर दिए जाएंगे।
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जानकारी के मुताबिक स्कूल में बच्चों की संख्या करीब चार सौ है। भवन गिराने के बाद अब दो कमरे और एक हाल बचा है, लेकिन कोरोना के चलते इन कमरों में भी करीब पचास बच्चे ही एक समय में बैठ सकते हैं। जबकि, शेष बच्चों को खुले आसमान तले इंतजार करना पड़ता है। स्कूल भवन की कमी के चलते रोटेशन में कक्षाएं लगाई जा रही हैं। अलग-अलग कक्षाओं के बच्चों के लिए समयसारणी तैयार की गई है। हैरानी की बात तो यह है कि भवन निर्माण को लेकर स्कूल प्रशासन और स्कूल प्रबंधन समिति ने कई बार प्रशासन और सरकार से पत्राचार किया लेकिन, आज दिन तक कोई पहल नहीं की गई है। बहरहाल, बेहतर शिक्षा के दावे करने वाली प्रदेश सरकार की यहां पोल खुल रही है।
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स्कूल प्रबंधन समिति अध्यक्ष संजय कुमार का कहना है कि भवन निर्माण के लिए कई बार प्रशासन और सरकार को अवगत करवाया गया लेकिन, आज दिन तक कोई पहल नहीं हुई। कहा कि जल्द सरकार और प्रशासन ने व्यवस्था नहीं की तो उन्हें मजबूरन कड़े कदम उठाने पड़ेंगे।
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स्कूल प्रधानाचार्य फारूख का कहना है कि स्कूल भवन से संबंधित विभाग से नियमित तौर पर पत्राचार किया गया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि जल्द स्कूल भवन का निर्माण होगा।
उच्च शिक्षा उपनिदेशक चंबा प्यार सिंह चाढ़क का कहना है कि यह मामला उनके ध्यान में है। कहा कि प्रस्ताव उच्चाधिकारियों को भेज दिया गया है। जैसे ही स्वीकृति मिलेगी, आगामी प्रयास शुरू कर दिए जाएंगे।