{"_id":"6a4e89068a6d6d926807e242","slug":"fall-armyworm-infestation-on-maize-has-increased-in-bhatiyat-salooni-and-mehla-chamba-news-c-88-1-cmb1002-189236-2026-07-08","type":"story","status":"publish","title_hn":"Chamba News: भटियात, सलूणी और मैहला मक्की पर फॉल आर्मी वर्म का प्रकोप बढ़ा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Chamba News: भटियात, सलूणी और मैहला मक्की पर फॉल आर्मी वर्म का प्रकोप बढ़ा
Wed, 08 Jul 2026 11:03 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
Updated Wed, 08 Jul 2026 11:03 PM IST
विज्ञापन
मक्की के खेतो में कीड़े की जाँच करते क़ृषि विभाग के अधिकारी कर्मचारी, जागरूक पाठक
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
खेतों में पहुंचीं कृषि विभाग की टीमें, किसानों को दिए रोग से बचाव के टिप्स
संवाद न्यूज एजेंसी
चंबा। जिले में मक्की की फसल पर फॉल आर्मी वर्म ने दस्तक दे दी है। भटियात, सलूणी और मैहला क्षेत्रों में इस खतरनाक कीट के मामले सामने आने के बाद कृषि विभाग सतर्क हो गया है। विभागीय टीमों ने प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण कर स्थिति का जायजा लिया। तीनों जगह कीट का प्रकोप पाया गया है। फॉल आर्मी वर्म के हमले से मक्की की फसल को नुकसान पहुंचने लगा है जिससे किसानों की चिंता बढ़ गई है। कीट पौधों की पत्तियों और अंदरूनी हिस्सों को नुकसान पहुंचाता है। इससे पौधों की बढ़वार प्रभावित होती है और उत्पादन में कमी आने की आशंका रहती है।
किसानों की फसल को बचाने के लिए कृषि विभाग ने निगरानी अभियान तेज कर दिया है। विभाग की टीमें गांव-गांव पहुंचकर खेतों का निरीक्षण कर रही हैं और किसानों को समय रहते नियंत्रण उपाय अपनाने की सलाह दे रही हैं।
कृषि विभाग के उपनिदेशक डॉ. भूपेंद्र सिंह ने किसानों से आह्वान किया है कि वे प्रभावित पौधों में छिपी सूंडियों को निकालकर नष्ट करें और खेतों को खरपतवार मुक्त रखें। उन्होंने प्रति हेक्टेयर 8 से 10 फेरोमोन ट्रैप लगाने के साथ-साथ संतुलित उर्वरक प्रबंधन अपनाने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि नाइट्रोजन उर्वरकों का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल फसल के लिए नुकसानदायक हो सकता है। शुरुआती स्तर पर नियंत्रण के लिए किसान मेटाराइजियम एनीसोप्लाए और ब्यूवेरिया बैसियाना जैसे जैविक विकल्पों का उपयोग कर सकते हैं। वहीं, यदि कीटों की संख्या आर्थिक क्षति स्तर से अधिक हो जाए तो कृषि विशेषज्ञों की सलाह के बाद ही अनुशंसित कीटनाशकों का प्रयोग करें। दवा का छिड़काव इस तरह किया जाए कि वह पौधे के व्हॉर्ल तक पहुंचे क्योंकि फॉल आर्मी वर्म अक्सर इसी हिस्से में छिपा रहता है। विभाग की टीमें लगातार खेतों की निगरानी कर रही हैं ताकि समय रहते कीट पर नियंत्रण पाया जा सके और किसानों को नुकसान से बचाया जा सके।
विज्ञापन
--
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
चंबा। जिले में मक्की की फसल पर फॉल आर्मी वर्म ने दस्तक दे दी है। भटियात, सलूणी और मैहला क्षेत्रों में इस खतरनाक कीट के मामले सामने आने के बाद कृषि विभाग सतर्क हो गया है। विभागीय टीमों ने प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण कर स्थिति का जायजा लिया। तीनों जगह कीट का प्रकोप पाया गया है। फॉल आर्मी वर्म के हमले से मक्की की फसल को नुकसान पहुंचने लगा है जिससे किसानों की चिंता बढ़ गई है। कीट पौधों की पत्तियों और अंदरूनी हिस्सों को नुकसान पहुंचाता है। इससे पौधों की बढ़वार प्रभावित होती है और उत्पादन में कमी आने की आशंका रहती है।
किसानों की फसल को बचाने के लिए कृषि विभाग ने निगरानी अभियान तेज कर दिया है। विभाग की टीमें गांव-गांव पहुंचकर खेतों का निरीक्षण कर रही हैं और किसानों को समय रहते नियंत्रण उपाय अपनाने की सलाह दे रही हैं।
विज्ञापन
कृषि विभाग के उपनिदेशक डॉ. भूपेंद्र सिंह ने किसानों से आह्वान किया है कि वे प्रभावित पौधों में छिपी सूंडियों को निकालकर नष्ट करें और खेतों को खरपतवार मुक्त रखें। उन्होंने प्रति हेक्टेयर 8 से 10 फेरोमोन ट्रैप लगाने के साथ-साथ संतुलित उर्वरक प्रबंधन अपनाने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि नाइट्रोजन उर्वरकों का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल फसल के लिए नुकसानदायक हो सकता है। शुरुआती स्तर पर नियंत्रण के लिए किसान मेटाराइजियम एनीसोप्लाए और ब्यूवेरिया बैसियाना जैसे जैविक विकल्पों का उपयोग कर सकते हैं। वहीं, यदि कीटों की संख्या आर्थिक क्षति स्तर से अधिक हो जाए तो कृषि विशेषज्ञों की सलाह के बाद ही अनुशंसित कीटनाशकों का प्रयोग करें। दवा का छिड़काव इस तरह किया जाए कि वह पौधे के व्हॉर्ल तक पहुंचे क्योंकि फॉल आर्मी वर्म अक्सर इसी हिस्से में छिपा रहता है। विभाग की टीमें लगातार खेतों की निगरानी कर रही हैं ताकि समय रहते कीट पर नियंत्रण पाया जा सके और किसानों को नुकसान से बचाया जा सके।
विज्ञापन