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मिड-डे मील वर्करों का हो रहा शोषण : नरेंद्र

Wed, 16 Feb 2022 07:22 PM IST
Shimla	 Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Wed, 16 Feb 2022 07:22 PM IST
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Exploitation of mid-day meal workers: Narendra
तीसा (चंबा)। मिड-डे मील वर्करों को महंगाई के दौर में 2600 रुपये मासिक वेतन पर परिवार पालना मुश्किल हो रहा है। सरकार 86 रुपये दिहाड़ी देकर इन कर्मचारियों का शोषण कर रही है। इसके विरोध में बुधवार को मिड-डे मील वर्कर यूनियन ने नकरोड़ में बैठक का आयोजन किया। इसमें सीटू जिला अध्यक्ष नरेंद्र कुमार भी शामिल रहे।
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उन्होंने कहा कि सरकार मिड-डे मील वर्कर की अनदेखी कर रही है। सरकार उन्हें जो वेतन दे रही है, वह न्यूनतम वेतन से भी कम है। 86 रुपये दिहाड़ी देकर सरकार मिड-डे मील वर्करों को सरकार शर्मिंदा कर रही है। इतने रुपये में परिवार चलाना मुश्किल है। मनरेगा में भी लोग 200 रुपये दिहाड़ी लेते हैं। इतना ही नहीं, इन वर्करों को सिर्फ 10 महीने का वेतन मिलता है। जबकि, यह सुप्रीम और हाई कोर्ट के निर्णय की अवमानना है। इससे साफ झलकता है कि सरकार इन वर्करों के खिलाफ काम कर रही है। सरकार न्यूनतम वेतन लागू करने के लिए तैयार नहीं है।
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कहा कि स्कूलों में मल्टी टास्क वर्कर की भर्ती की जा रही है। इसमें मिड-डे मील को प्राथमिकता मिलनी चाहिए। यूनियन 20 और 29 फरवरी को होने जा रही देशव्यापी हड़ताल में भाग लेगी और प्रदर्शन करेगी। बैठक में शिक्षा ब्लॉक तीसा, कल्हेल और सलूणी के सैकड़ों वर्कर शामिल रहे।
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