{"_id":"61a1134e9a13da19897811a1","slug":"efforts-to-connect-dalhousie-with-rail-line-chamba-news-sml3915125151","type":"story","status":"publish","title_hn":"रेल लाइन से जल्द जुड़ सकती है पर्यटन नगरी डलहौजी,","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
रेल लाइन से जल्द जुड़ सकती है पर्यटन नगरी डलहौजी,
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
चंबा। पर्यटन नगरी डलहौजी रेल लाइन से जुड़ने की उम्मी जगी है। इसके लिए कांगड़ा-चंबा के सांसद किशन कपूर ने रेलमंत्री को पत्र भेजा है। उन्होंने कहा है कि पठानकोट से डलहौजी की दूरी 81 किलोमीटर है। रेलमार्ग बनने से आकांक्षी जिला चंबा भी रेल सुविधा से जुड़ जाएगा। कहा कि आगामी संसद सत्र में भी यह मामला उठाएंगे।
चंडीगढ़ में रेलवे के फिरोजपुर मंडल की ओर से आयोजित बैठक को संबोधित करते हुए सांसद ने कहा कि पठानकोट-जोगिंद्रनगर रेल लाइन के रखरखाव और संचालन का दायित्व फिरोजपुर मंडल का है, लेकिन उपरोक्त रेल मार्ग सदैव ही उपेक्षित रहा है। कहा कि अंग्रेजों की ओर से 1927 में निर्मित यह रेललाइन लगभग 100 वर्षों में एक इंच भी इधर से उधर नहीं हुई है।
पठानकोट-जोगिंद्रनगर रेललाइन पर पहले सात ट्रेनें चलती थी। इसमें से केवल चार ट्रेनें ही पुन: चलाई गई हैं, जबकि शेष तीन ट्रेनों को पुन: प्रारंभ नहीं किया गया है। इस रेल लाइन पर कुछ रेलवे फाटक बंद होने के कारण सदैव यातायात बाधित रहता है। चक्की बैंक और इंदौरा के समीप मोटली रैंप रेलवे फाटक इसके जीवंत उदाहरण हैं। उन्होंने मोटली रैंप रेलवे फाटक पर अंडर ग्राउंड पुल बनाने का भी फिरोजपुर मंडल से अनुरोध किया। कहा कि लोगों को इन फाटकों के अक्सर बंद रहने से भारी असुविधा होती है। जब रेल मंत्रालय से इस विषय में बात की जाती है तो विभिन्न प्रशासनिक अड़चनों का हवाला देकर मामला बरसों तक लटका रहता है। कहा कि दलाई लामा के धर्मशाला में वास के कारण बौद्ध पर्यटकों में भी कांगड़ा घाटी के प्रति आकर्षण बढ़ा है। इन परिवारों के सदस्य सेना में कार्यरत अपने सगे-संबंधियों से मिलने के लिए रेल-सेवाओं का उपयोग करते हैं। इन परिवारों की सुविधा के लिए चंबा और ज्वालामुखी में रेल टिकट आरक्षण काउंटर खोलने की भी फिरोजपुर मंडल की ओर से मंत्रालय को संस्तुति की जानी चाहिए। कहा कि फिरोजपुर रेलवे मंडल के अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि शीघ्र ही पठानकोट-जोगिंद्र नगर रेललाइन पर शेष ट्रेनें भी शीघ्र चालू कर दी जाएंगी।
विज्ञापन
विज्ञापन
चंडीगढ़ में रेलवे के फिरोजपुर मंडल की ओर से आयोजित बैठक को संबोधित करते हुए सांसद ने कहा कि पठानकोट-जोगिंद्रनगर रेल लाइन के रखरखाव और संचालन का दायित्व फिरोजपुर मंडल का है, लेकिन उपरोक्त रेल मार्ग सदैव ही उपेक्षित रहा है। कहा कि अंग्रेजों की ओर से 1927 में निर्मित यह रेललाइन लगभग 100 वर्षों में एक इंच भी इधर से उधर नहीं हुई है।
विज्ञापन
पठानकोट-जोगिंद्रनगर रेललाइन पर पहले सात ट्रेनें चलती थी। इसमें से केवल चार ट्रेनें ही पुन: चलाई गई हैं, जबकि शेष तीन ट्रेनों को पुन: प्रारंभ नहीं किया गया है। इस रेल लाइन पर कुछ रेलवे फाटक बंद होने के कारण सदैव यातायात बाधित रहता है। चक्की बैंक और इंदौरा के समीप मोटली रैंप रेलवे फाटक इसके जीवंत उदाहरण हैं। उन्होंने मोटली रैंप रेलवे फाटक पर अंडर ग्राउंड पुल बनाने का भी फिरोजपुर मंडल से अनुरोध किया। कहा कि लोगों को इन फाटकों के अक्सर बंद रहने से भारी असुविधा होती है। जब रेल मंत्रालय से इस विषय में बात की जाती है तो विभिन्न प्रशासनिक अड़चनों का हवाला देकर मामला बरसों तक लटका रहता है। कहा कि दलाई लामा के धर्मशाला में वास के कारण बौद्ध पर्यटकों में भी कांगड़ा घाटी के प्रति आकर्षण बढ़ा है। इन परिवारों के सदस्य सेना में कार्यरत अपने सगे-संबंधियों से मिलने के लिए रेल-सेवाओं का उपयोग करते हैं। इन परिवारों की सुविधा के लिए चंबा और ज्वालामुखी में रेल टिकट आरक्षण काउंटर खोलने की भी फिरोजपुर मंडल की ओर से मंत्रालय को संस्तुति की जानी चाहिए। कहा कि फिरोजपुर रेलवे मंडल के अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि शीघ्र ही पठानकोट-जोगिंद्र नगर रेललाइन पर शेष ट्रेनें भी शीघ्र चालू कर दी जाएंगी।
विज्ञापन