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Chamba News: पहले ही बीमारी दे रही दर्द, अब कॉकरोच बढ़ा रहे मर्ज
Fri, 21 Nov 2025 10:46 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
Updated Fri, 21 Nov 2025 10:46 PM IST
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चंबा मेडिकल कॉलेज की दूसरी मंजिल में फर्श पर चलते कॉकरोच।संवाद
चंबा। मेडिकल कॉलेज चंबा स्वयं बीमार है। आलम यह है कि सर्दी, खांसी, बुखार और पेट दर्द से पीड़ित बच्चों और अन्य मरीजों को रात के समय कॉकरोच परेशान कर रहे हैं। इससे मरीजों का मर्ज बढ़ने के साथ संक्रमण फैलने की आशंका है।
जानकारी के अनुसार पंडित जवाहर लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज की द्वितीय, तृतीय और चतुर्थ मंजिल के वार्डों में रात के समय कॉकरोचों का आतंक इतना बढ़ चुका है कि बीमार बच्चे और मरीज नींद में चौंककर जाग जाते हैं। उनके साथ आए तीमारदार पूरी रात उन्हें बचाने में लगे रहते हैं।
रात को डॉक्टरों के राउंड के बाद जब वार्डों में लाइटें मंद होती हैं, उसी समय कॉकरोच दीवारों और बेड के पास सक्रिय हो जाते हैं। तीमारदारों के अनुसार जैसे ही बच्चों की आंख लगती है, कॉकरोच उनके हाथ-पैर और शरीर पर रेंगने लगते हैं, जिससे बच्चे डरकर रो पड़ते हैं।
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संक्रमण से जूझ रहे मरीजों के लिए यह स्थिति और जोखिमपूर्ण हो जाती है। कॉकरोचों की मौजूदगी यह संकेत देती है कि अस्पताल में सफाई के मानकों पर गंभीर कमी है। वार्डों के कोनों, गीली सतहों और रात में कम स्टाफ मौजूद रहने से उनका फैलाव तेजी से हो रहा है।
अस्पताल की सफाई व्यवस्था बेहद कमजोर है। नमी के कारण रात को कॉकरोच हर जगह रेंगते दिखते हैं। इससे संक्रमण का खतरा बढ़ गया है। रिशु, तीमारदार
मेडिकल कॉलेज खुद बीमार है। अंधेरा होते ही कॉकरोच खुलकर घूमने लगते हैं। लोग मजबूरन समय काट रहे हैं। राजा, तीमारदार
दूसरी, तीसरी और चौथी मंजिल पर हालत सबसे खराब है। वार्ड में रात बिताना कठिन हो गया है। तनु, तीमारदार
कॉकरोच मरीजों के खाने तक पहुंच रहे हैं। प्रबंधन को तुरंत कड़ा कदम उठाना चाहिए। अरशद, तीमारदार
मामले को संज्ञान में लिया गया है। सफाई ठेकेदार को निरंतर सफाई और कॉकरोच नियंत्रण के लिए स्प्रे करने के निर्देश दिए जाएंगे। डॉ. जालम भारद्वाज, चिकित्सा अधीक्षक, चंबा
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जानकारी के अनुसार पंडित जवाहर लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज की द्वितीय, तृतीय और चतुर्थ मंजिल के वार्डों में रात के समय कॉकरोचों का आतंक इतना बढ़ चुका है कि बीमार बच्चे और मरीज नींद में चौंककर जाग जाते हैं। उनके साथ आए तीमारदार पूरी रात उन्हें बचाने में लगे रहते हैं।
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रात को डॉक्टरों के राउंड के बाद जब वार्डों में लाइटें मंद होती हैं, उसी समय कॉकरोच दीवारों और बेड के पास सक्रिय हो जाते हैं। तीमारदारों के अनुसार जैसे ही बच्चों की आंख लगती है, कॉकरोच उनके हाथ-पैर और शरीर पर रेंगने लगते हैं, जिससे बच्चे डरकर रो पड़ते हैं।
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संक्रमण से जूझ रहे मरीजों के लिए यह स्थिति और जोखिमपूर्ण हो जाती है। कॉकरोचों की मौजूदगी यह संकेत देती है कि अस्पताल में सफाई के मानकों पर गंभीर कमी है। वार्डों के कोनों, गीली सतहों और रात में कम स्टाफ मौजूद रहने से उनका फैलाव तेजी से हो रहा है।
अस्पताल की सफाई व्यवस्था बेहद कमजोर है। नमी के कारण रात को कॉकरोच हर जगह रेंगते दिखते हैं। इससे संक्रमण का खतरा बढ़ गया है। रिशु, तीमारदार
मेडिकल कॉलेज खुद बीमार है। अंधेरा होते ही कॉकरोच खुलकर घूमने लगते हैं। लोग मजबूरन समय काट रहे हैं। राजा, तीमारदार
दूसरी, तीसरी और चौथी मंजिल पर हालत सबसे खराब है। वार्ड में रात बिताना कठिन हो गया है। तनु, तीमारदार
कॉकरोच मरीजों के खाने तक पहुंच रहे हैं। प्रबंधन को तुरंत कड़ा कदम उठाना चाहिए। अरशद, तीमारदार
मामले को संज्ञान में लिया गया है। सफाई ठेकेदार को निरंतर सफाई और कॉकरोच नियंत्रण के लिए स्प्रे करने के निर्देश दिए जाएंगे। डॉ. जालम भारद्वाज, चिकित्सा अधीक्षक, चंबा