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सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में प्रसव हो सकते हैं प्रभावित
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चंबा। जिले के सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में गर्भवती महिलाओं के प्रसव और मरीजों के टेस्ट 30 जून के बाद प्रभावित हो सकते हैं। क्योंकि इन स्वास्थ्य संस्थानों में प्रसव करवाने वाली स्टाफ नर्सें और मरीजों के टेस्ट करने वाले लैब तकनीशियनों की सेवाएं 30 जून को समाप्त हो जाएंगी।
इन कर्मचारियों को पिछले वर्ष जून में नीति आयोग के तहत नियुक्त किया गया था। वहीं से इन कर्मचारियों को वेतन दिया जा रहा था लेकिन अब उनकी सेवाएं इसी माह समाप्त हो जाएंगी। इसके बाद उन्हें स्वास्थ्य संस्थानों से जाना पड़ेगा। इससे मरीजों और विभाग की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
चंबा में नीति आयोग के तहत सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में 28 स्टाफ नर्सें और आठ लैब तकनीशियन नियुक्त किए गए थे। इससे स्वास्थ्य संस्थानों में मरीजों को बेहतर सेवाएं मिल रही थीं लेकिन अब इन कर्मचारियों का कार्यकाल पूर्ण होने जा रहा है। अभी तक स्वास्थ्य विभाग ने उनके सेवा विस्तार को लेकर निर्देश जारी नहीं किए हैं। इससे जहां इन कर्मचारियों को अपनी नौकरी जाने की चिंता सता रही है तो वहीं संबंधित स्वास्थ्य संस्थानों में मरीजों को मिल रही सेवाएं प्रभावित होने वाली हैं।
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जिले के सिविल अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में इन कर्मचारियों को नियुक्त किया गया है। गर्भवती महिलाओं के प्रसव में जहां स्टाफ नर्सें अपनी अहम भूमिका निभा रही हैं वहीं, विभिन्न बीमारियों से पीड़ित मरीजों के टेस्ट करने में लैब तकनीशियन भी अपनी सेवाएं दे रहे हैं। हैरानी इस बात की है कि इसको लेकर सरकार और विभाग ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। विपक्ष भी इस मुद्दे को लेकर चुप बैठा है।
नीति आयोग के तहत नियुक्त किए गए लैब तकनीशियनों और स्टाफ नर्सों की खत्म हो रही सेवाओं के बारे में सरकार और स्वास्थ्य निदेशक को अवगत करवा दिया गया है। इन कर्मचारियों का सेवा कार्यकाल बढ़ाने के लिए सरकार से मांग की गई है।
डॉ. जालम सिंह भारद्वाज, जिला स्वास्थ्य अधिकारी।
प्रवीण कुमार
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इन कर्मचारियों को पिछले वर्ष जून में नीति आयोग के तहत नियुक्त किया गया था। वहीं से इन कर्मचारियों को वेतन दिया जा रहा था लेकिन अब उनकी सेवाएं इसी माह समाप्त हो जाएंगी। इसके बाद उन्हें स्वास्थ्य संस्थानों से जाना पड़ेगा। इससे मरीजों और विभाग की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
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चंबा में नीति आयोग के तहत सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में 28 स्टाफ नर्सें और आठ लैब तकनीशियन नियुक्त किए गए थे। इससे स्वास्थ्य संस्थानों में मरीजों को बेहतर सेवाएं मिल रही थीं लेकिन अब इन कर्मचारियों का कार्यकाल पूर्ण होने जा रहा है। अभी तक स्वास्थ्य विभाग ने उनके सेवा विस्तार को लेकर निर्देश जारी नहीं किए हैं। इससे जहां इन कर्मचारियों को अपनी नौकरी जाने की चिंता सता रही है तो वहीं संबंधित स्वास्थ्य संस्थानों में मरीजों को मिल रही सेवाएं प्रभावित होने वाली हैं।
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जिले के सिविल अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में इन कर्मचारियों को नियुक्त किया गया है। गर्भवती महिलाओं के प्रसव में जहां स्टाफ नर्सें अपनी अहम भूमिका निभा रही हैं वहीं, विभिन्न बीमारियों से पीड़ित मरीजों के टेस्ट करने में लैब तकनीशियन भी अपनी सेवाएं दे रहे हैं। हैरानी इस बात की है कि इसको लेकर सरकार और विभाग ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। विपक्ष भी इस मुद्दे को लेकर चुप बैठा है।
नीति आयोग के तहत नियुक्त किए गए लैब तकनीशियनों और स्टाफ नर्सों की खत्म हो रही सेवाओं के बारे में सरकार और स्वास्थ्य निदेशक को अवगत करवा दिया गया है। इन कर्मचारियों का सेवा कार्यकाल बढ़ाने के लिए सरकार से मांग की गई है।
डॉ. जालम सिंह भारद्वाज, जिला स्वास्थ्य अधिकारी।
प्रवीण कुमार