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पंचायतीराज के चुनाव से जलेगा गृहरक्षकों का चूल्हा
ब्यूरो/ अमर उजाला, चंबा
Updated Sat, 12 Dec 2015 11:12 PM IST
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पंचायतीराज चुुनाव का मंच सज चुका है और अगले पांच साल की चिंता में उम्मीदवार पगडंडियां माप रहे हैं। लोगों के घरों तक पहुंचना, उनके काम में हाथ बंटाना और उन्हें अच्छा नेता चुनने के लिए प्रेरित करना यह सब आम नजारा है। इन सब से थोड़ा हटकर एक मसला पंचायत चुनाव में दो वक्त की रोटी कमाने का भी है।
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गृहरक्षकों की एक बड़ी फौज सभी जिलों में मौजूद है। आमतौर पर सिर्फ 50 प्रतिशत गृहरक्षक ही ड्यूटी पर होते हैं। जबकि 50 प्रतिशत हर समय ब्रेक पर रहते हैं। साल में तीन महीने के लिए एक गृह रक्षक को ब्रेक पर भेजा जाता है, मगर आपदा और चुनाव जैसी घड़ी में इनसे मदद लेने का पुराना चलन है। इस बार भी चंबा जिला में सभी गृहरक्षकों को ड्यूटी पर बुलाने की तैयारी है। इसमें इन सबको कम से कम एक हफ्ते का रोजगार साल के पहले हफ्ते में मिल जाएगा। चंबा जिला में इस समय 720 गृहरक्षक हैं। इनमें से 440 गृहरक्षक सेवारत हैं। जबकि 320 गृहरक्षक घरों में हैं।
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चुनाव आयोग ने पंचायतीराज चुनाव के लिए जिला में 705 मतदान केंद्र स्थापित किए हैं। इन केंद्रों के लिए पुलिस की तरफ से जारी की गई सूची में 705 गृहरक्षकों को तैनात किया जाना है। जबकि अन्य 15 गृहरक्षक भी इस दौरान ड्यूटी पर ही रहेंगे। जिन 320 गृहरक्षकों को घरों से बुलाया जाएगा उन्हें दिहाड़ी के हिसाब से भुगतान होगा यानी चुनाव से मतगणना तक गृहरक्षक ड्यूटी पर रहते हैं तो उन्हें एक हफ्ते का रोजगार साल के शुरूआत में मिल जाएगा।
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इनसेट...
नियमित रोजगार हो तो होगा परिवार का पालन पोषण
गृहरक्षक एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष जोगेंद्र सिंह चौहड़िया का कहना है कि चुनाव में सभी गृहरक्षकों को रोजगार मिलने की उम्मीद है लेकिन यह रोजगार स्थायी होना चाहिए। गृहरक्षकों को दिहाड़ी की जगह नियमित किया जाना चाहिए ताकि वे भी अपने परिवार का सही ढंग से पालन पोषण कर सकें।
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54 वर्ष पहले हुई थी गृहरक्षक विंग की स्थापना
हिमाचल में 1962 में गृहरक्षक विंग की स्थापना की गई थी। उस समय यह एक स्वयंसेवी संस्था के रूप में कार्य करते थे, लेकिन धीरे-धीरे पूरे भारत में इन्हें जगह मिली और अब आपदा और चुनाव दोनों में इनकी तैनाती होगी है लेकिन गृहरक्षक नियमित नहीं हैं और उन्हें 280 रुपये दिहाड़ी मिलती है। जबकि गृहरक्षक नियमित करने की मांग कर रहे हैं।