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Chamba News: सड़क पर गोवंश, ढाई करोड़ से बने गोसदनों में लटके ताले

Thu, 30 Jan 2025 11:56 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Thu, 30 Jan 2025 11:56 PM IST
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Cows on the road, locks hanging in cow sheds made of Rs 2.5 crores
चंबा में हरदासपुरा डीएवी स्कूल के पास सड़क पर खड़ा लावारिस पशु और गुजरते बच्चे।
चंबा। कड़ाके की ठंड में लावारिस मवेशी सड़क पर घूम रहे हैं, जबकि ढाई करोड़ से बने गोसदनों में ताले लटके हुए हैं। इससे साफ प्रतीत होता है कि जिले में लावारिस मवेशियों को ठिकाने देने की योजनाएं धरातल में नहीं उतर पाई हैं। हद तो ये है कि बिना घास और स्टाफ के चलते सिहुंता और मंजीर में बने गोसदन शुरू ही नहीं हो पाए हैं। जबकि, जिले के पांच गोसदनों में लगभग 540 पशुओं को रखने की व्यवस्था है। लेकिन, आधे से ज्यादा मवेशी सड़कों पर घूम रहे हैं। उपमंडल सलूणी में लावारिस मवेशियों को आश्रय दिलाने के लिए लगभग एक करोड़ 66 लाख खर्च कर गोसदन बनाया गया है। यहां एक भी लावारिस पशु नहीं है, जबकि, वहां 200 लावारिस पशुओं को रखनी की क्षमता है। सिहुंता क्षेत्र में भी 65 लाख की लागत से गोसदन का निर्माण किया गया है। कर्मचारी न होने से यहां भी ताला लटका हुआ है। इस वजह से लावारिस मवेशियों को आज तक ठिकाना नसीब नहीं हो पाया है। नैनीखड्ड में बने गोसदन में 120, शनिदेव मंदिर के गोदसन में 40 और भगोत गोदसन में 80 मवेशियों को रखने की क्षमता है। पशुपालन विभाग के उपनिदेशक डॉ. मुंशी कपूर का कहना है कि वर्तमान में तीन गोसदनों में लगभग 340 मवेशी रखे गए हैं। इन पशुओं के चारे के लिए विभाग की ओर से हर माह दो लाख 35 हजार की राशि दी जाती है। एक पशु के लिए 700 रुपये प्रतिमाह देने का प्रावधान है। वर्तमान में जिले में स्थित तीन गोसदन लावारिस मवेशियों की शरणस्थली बने हुए हैं।
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