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Chamba News: थैलेसीमिया की दवाई के लिए चंडीगढ़ की दौड़
Wed, 22 Mar 2023 10:34 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
Updated Wed, 22 Mar 2023 10:34 PM IST
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चंबा। थैलेसीमिया बीमारी से जूझ रहे बीमार बच्चों के इलाज के लिए परिजनों को चंडीगढ़ से दवाई मंगवानी पड़ रही है। यहां पर उन्हें दस गोलियों के दवाई के पत्ते के 2,000 रुपये चुकाने पड़े रहे हैं। सरकारी मेडिकल कॉलेज में दवाई लेने के लिए उन्हें स्वयं मेडिकल कॉलेज टांडा जाना पड़ रहा है। प्रदेश के सभी मेडिकल कॉलेजों में थैलेसीमिया की दवाई उपलब्ध है लेकिन पंडित जवाहर लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज चंबा में बीमार बच्चों को यह दवाई उपलब्ध नहीं हो पा रही है। दवाई को उपलब्ध करवाने के लिए के लिए बीमार बच्चों के अभिभावक कई बार प्रबंधन से मांग कर चुके हैं। मेडिकल कॉलेज के अलावा जिले के किसी भी निजी केमिस्ट की दुकान में भी यह दवाई उपलब्ध नहीं है।
राजेश कुमार ने बताया कि उनकी बेटी थैलेसीमिया से पीड़ित है। पिछले सात सालों से वह उसका इलाज करवा रहे हैं लेकिन दवाई लेने के लिए उन्हें कभी टांडा तो कभी चंडीगढ़ जाना पड़ता है। चंबा मेडिकल कॉलेज में उन्हें दवाई नहीं मिल रही है। टांडा दवाई लेने के लिए जाने पर उनका पूरा दिन बर्बाद हो जाता है। आने-जाने का भाड़ा उन्हें अलग से खर्च करना पड़ता है। इसकी वजह से उन्हें अपनी बीमार बेटी का इलाज करवाने में काफी परेशानी हो रही है। जिले में 24 बच्चे गंभीर थैलेसीमिया से पीड़ित हैं। इन बच्चों को हर माह खून भी चढ़ाना पड़ता है। इसके साथ ही उन्हें डिफेयरसिरोक्स टेबलेट देनी पड़ती है। इसके चलते बीमार बच्चों के अभिभावक जिला प्रशासन और मेडिकल कॉलेज प्रबंधन से मांग कर रहे हैं कि उनके बच्चों की सुविधा के लिए सरकारी दर पर उन्हें यह दवाई चंबा में ही उपलब्ध करवाई जाए।
थैलेसीमिया से पीड़ित बच्चों के इलाज की दवाई यदि चंबा में नहीं मिल रही है तो इसे जिले में उपलब्ध करवाने के लिए उचित कदम उठाए जाएंगे। -डॉ. पंकज गुप्ता, प्राचार्य मेडिकल कॉलेज चंबा।
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राजेश कुमार ने बताया कि उनकी बेटी थैलेसीमिया से पीड़ित है। पिछले सात सालों से वह उसका इलाज करवा रहे हैं लेकिन दवाई लेने के लिए उन्हें कभी टांडा तो कभी चंडीगढ़ जाना पड़ता है। चंबा मेडिकल कॉलेज में उन्हें दवाई नहीं मिल रही है। टांडा दवाई लेने के लिए जाने पर उनका पूरा दिन बर्बाद हो जाता है। आने-जाने का भाड़ा उन्हें अलग से खर्च करना पड़ता है। इसकी वजह से उन्हें अपनी बीमार बेटी का इलाज करवाने में काफी परेशानी हो रही है। जिले में 24 बच्चे गंभीर थैलेसीमिया से पीड़ित हैं। इन बच्चों को हर माह खून भी चढ़ाना पड़ता है। इसके साथ ही उन्हें डिफेयरसिरोक्स टेबलेट देनी पड़ती है। इसके चलते बीमार बच्चों के अभिभावक जिला प्रशासन और मेडिकल कॉलेज प्रबंधन से मांग कर रहे हैं कि उनके बच्चों की सुविधा के लिए सरकारी दर पर उन्हें यह दवाई चंबा में ही उपलब्ध करवाई जाए।
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थैलेसीमिया से पीड़ित बच्चों के इलाज की दवाई यदि चंबा में नहीं मिल रही है तो इसे जिले में उपलब्ध करवाने के लिए उचित कदम उठाए जाएंगे। -डॉ. पंकज गुप्ता, प्राचार्य मेडिकल कॉलेज चंबा।
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