फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Chamba News ›   ITBP

चंबा-जेएंडके बॉर्डर की कमान संभाल सकती है आईटीबीपी

Thu, 26 Oct 2017 12:38 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंबा
ब्यूरो/अमर उजाला, चंबा Updated Thu, 26 Oct 2017 12:38 PM IST
विज्ञापन

जम्मू-कश्मीर से जुड़ी चंबा की सीमा पर जल्द ही दोबारा आईटीबीपी मोर्चा संभाल सकती है। पठानकोट एयरबेस पर हुए आतंकवादी हमले और जम्मू-कश्मीर में चल रहे एनकाउंटर के बाद आईटीबीपी की जरूरत दोबारा महसूस होने लगी है। प्रशासन भी इस संवेदनशील मुद्दे पर रिपोर्ट तैयार कर जल्द ही राज्य सरकार को भेजेगा। इस रिपोर्ट में सीमावर्ती इलाके को सुरक्षित करने के सभी कारणों और जरूरतों को शामिल किया गया है।

विज्ञापन


डलहौजी क्षेत्र की विधायक आशा कुमारी ने भी चंबा-जम्मू व कश्मीर सीमा को आईटीबीपी के हवाले करने की बात कही है। इस रिपोर्ट में पड़ोसी राज्य पंजाब व जम्मू-कश्मीर में हो रही हिंसक घटनाओं का जिक्र भी शामिल है। गौरतलब है कि चंबा के कालाबन और सतरूंडी इलाकों में वर्ष 1998 में आतंकवादी घटना हुई थी। उसमें 35 लोगों को मौत के घाट उतार दिया गया था और कुछ लोगों को उग्रवादी बंधक बनाकर ले गए थे।
विज्ञापन


उसके बाद चंबा-जम्मू व कश्मीर सीमा को अति संवेदनशील घोषित कर यहां आईटीबीपी तैनात कर दी गई, लेकिन केंद्र पर लगातार बढ़ रहे आर्थिक बोझ और लंबे समय तक कोई आतंकवादी घटना न होने के बाद वर्ष 2012 में आईटीबीपी को यहां से हटा लिया गया। उसके बाद सीमावर्ती इलाके को हिमाचल पुलिस को सौंप दिया गया। तब से हिमाचल पुलिस ही सीमावर्ती इलाके की सुरक्षा कर रही है।
विज्ञापन
विज्ञापन


सरकार को भेज रहे हैं रिपोर्ट : उपायुक्त
उपायुक्त सुदेश मोकटा का कहना है कि सुरक्षा की दृष्टि से जरूरी है कि चंबा-जम्मू और कश्मीर सीमावर्ती इलाके को महफूज किया जाए। यहां आतंकवादी घटनाओं की आशंका खत्म नहीं हुई है। जम्मू-कश्मीर या पंजाब में होने वाली सभी घटनाओं का सीधा असर चंबा पर पड़ता है। इस संबंध में प्रशासन रिपोर्ट बनाकर सरकार को भेज रहा है।

चंबा-जम्मू और कश्मीर करीब 220 किलोमीटर लंबी सीमा है। चंबा में यह इलाका खैरी से शुरू होता है और पांगी तक जुड़ा हुआ है। यहां सुरक्षा की दृष्टि से चेकपोस्ट बनाई गई है और सीमावर्ती क्षेत्रों की हलचल पर नजर रखने के लिए चौबीस घंटे जवानों की तैनाती की गई है।


पठानकोट में हुए आतंकवादी हमले और पिछले कुछ समय से जम्मू-कश्मीर में सक्रिय हुए आतंकवादी संगठनों को देखते हुए सीमावर्ती इलाके में आईटीबीपी को तैनात करने की मांग बढ़ रही है। दरअसल, जम्मू-कश्मीर में कोई सर्च ऑपरेशन या एनकाउंटर होने पर आतंकवादियों के हिमाचल की ओर भागने और छिपने की संभावना ज्याद रहती है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed