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Chamba News: चंबा ने हॉकी को दिए सितारे, मुकाम न मिलने का मलाल
Mon, 01 Dec 2025 11:02 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
Updated Mon, 01 Dec 2025 11:02 PM IST
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चंबा। शिक्षक से राष्ट्रीय स्तर के हॉकी खिलाड़ी तक का सफर तय करने वाले हरबंस पूरी किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। सोमवार को उन्होंने अपना 95वां जन्मदिन मनाया। उनका कहना है कि उन्हें एक मलाल जिंदगी भर रहेगा कि चंबा जिला ने हॉकी के क्षेत्र में कई दिग्गज खिलाड़ी दिए हैं। इसे बाद भी इन दिग्गजों को वो मुकाम नहीं मिल पाया, जिसके बाद हकदार रहे। उन्होंने युवाओं को संदेश दिया कि यदि युवा योग को दिनचर्या का हिस्सा बनाए तो अपने आप को फिट रख सकते हैं। वह 95 साल में भी पूरी तरह से फिट हैं, क्याेंकि उनकी नियमित दिनचर्या योग से शुरू होती है। रोजाना दिन में वह दो बार ब्लड प्रेशर की जांच करवाते हैं।
स्पोर्ट्स मीट से बदली जिंदगी, हॉकी ही नहीं, अन्य खेलों में भी आजमाया हाथ
हरबंस पूरी ने बताया कि उनका जन्म एक दिसंबर को 1931 को हुआ। उनकी जिंदगी चंबा में 1556 में एक स्पोर्ट्स मीट के दौरान बदली। उस दौरान वह शिक्षक के रूप में कार्य कर रहे थे और उन्होंने हॉकी का मैच पुलिस की तरफ से खेला। इस दौरान तत्कालीन जिला पुलिस अधीक्षक ने उनको पुलिस में भर्ती होने की सलाह दी। 1956 में पुलिस में भर्ती होने के बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा और चंबा पुलिस की टीम को लगातार जीत दिलाते रहे। इस दौरान वह हॉकी ही नहीं फुटबाल, एथलेटिक, वॉलीबाल और क्रिकेट में पुलिस विभाग को मेडल दिलाते रहे। उन्होंने अधिकांश नौकरी सीआईडी में ही की। उनकी सेवानिवृत्ति 30 सितंबर 1989 को धर्मशाला से इंस्पेक्टर के रूप में हुई।
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स्पोर्ट्स मीट से बदली जिंदगी, हॉकी ही नहीं, अन्य खेलों में भी आजमाया हाथ
हरबंस पूरी ने बताया कि उनका जन्म एक दिसंबर को 1931 को हुआ। उनकी जिंदगी चंबा में 1556 में एक स्पोर्ट्स मीट के दौरान बदली। उस दौरान वह शिक्षक के रूप में कार्य कर रहे थे और उन्होंने हॉकी का मैच पुलिस की तरफ से खेला। इस दौरान तत्कालीन जिला पुलिस अधीक्षक ने उनको पुलिस में भर्ती होने की सलाह दी। 1956 में पुलिस में भर्ती होने के बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा और चंबा पुलिस की टीम को लगातार जीत दिलाते रहे। इस दौरान वह हॉकी ही नहीं फुटबाल, एथलेटिक, वॉलीबाल और क्रिकेट में पुलिस विभाग को मेडल दिलाते रहे। उन्होंने अधिकांश नौकरी सीआईडी में ही की। उनकी सेवानिवृत्ति 30 सितंबर 1989 को धर्मशाला से इंस्पेक्टर के रूप में हुई।
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