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चंडीगढ़, ऊना, गाजियाबाद की मंडियों में सेब के बागवानों को मिल रहे उम्दा दाम
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चंबा। कम फसल के बावजूद इस बार चंबा के सेब को बाहरी राज्यों की मंडियों में उम्दा दाम मिल रहे हैं। अच्छे दाम मिलने से बागवानों की खूब चांदी हो रही है। हालांकि कम पैदावार होने से बागवान इस बार जरूर चिंतित थे। मगर सेब के अच्छे दाम मिलने से उनकी सभी परेशानियां खत्म हो गई है।
साहो और सिल्लाघ्राट क्षेत्रों के बागवानों को चंडीगढ़, ऊना और गाजियाबाद की मंडियों में मुंह मांगें दाम मिल रहे हैं। यहां 25 से 30 किलोग्राम सेब की पैकिंग वाली पेटी के 1600 रुपये और 10 किलोग्राम की पेटी 600 से 700 रुपये में बिक रही है।
कुल मिलाकर जिले के भरमौर, तीसा और सलूणी क्षेत्रों को छोड़कर साहो और सिल्लाघ्राट क्षेत्रों के बागवानों को बाहरी मंडियों में सेब के अच्छे दाम मिलने से उनकी आर्थिकी सुदृढ़ हुई है।
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बता दें कि विकास खंड चंबा के तहत साहो, लग्गा, गुवाड़, सराहण, सिल्लाघ्राट और जड़ेरा क्षेत्रों में सेब की इस बार ज्यादा पैदावार नहीं हुई है। लेकिन, बाहरी राज्यों में सेब के अच्छे दाम मिलने से बागवानों के चेहरों की खोई रौनक लौट आई है।
हालांकि जिले में बागवान बागीचों में अभी भी सेब की स्टेंडर्ड रॉयल, गोल्डन, सिलवर स्पर, आरगर्न स्पर और शेलो रूट्स जैसी किस्में ही लगाते हैं। बागवान बागीचों से सेब तुड़ान के बाद अपने खर्चे पर बाहरी राज्यों की मंडियों में फसल पहुंचाते हैं।
बागवान धारो राम, बलिराम, मान सिंह, हरि सिंह, राम सिंह, खेमराज ने बताया कि इस बार सेब की फसल कम होने के बावजूद भी कोल्ड स्टोर चंडीगढ़, ऊना, गाजियाबाद की मंडियों में सेब की उम्दा दाम मिल रहे हैं।
उन्होंने कहा कि बागवानों को अपने स्तर पर बागीचों से सेब तुड़ान कर, निजी गाड़ियों के माध्यम से सेब मंडियों में पहुंचाना पड़ रहा है। बागवानों को तुन्नूहट्टी में मार्केटिंग कमेटी के बैरियर पर टैक्स कटवाना पड़ता है।
इनसेट
बागवानी विभाग के उपनिदेशक राजीव चंद्रा ने बताया कि साहो और सिल्लाघ्राट के तहत क्षेत्रों के बागवानों को बाहरी मंडियों में सेब के अच्छे दाम मिल रहे हैं। इससे बागवानों की आर्थिकी को भी बल मिला है।
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साहो और सिल्लाघ्राट क्षेत्रों के बागवानों को चंडीगढ़, ऊना और गाजियाबाद की मंडियों में मुंह मांगें दाम मिल रहे हैं। यहां 25 से 30 किलोग्राम सेब की पैकिंग वाली पेटी के 1600 रुपये और 10 किलोग्राम की पेटी 600 से 700 रुपये में बिक रही है।
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कुल मिलाकर जिले के भरमौर, तीसा और सलूणी क्षेत्रों को छोड़कर साहो और सिल्लाघ्राट क्षेत्रों के बागवानों को बाहरी मंडियों में सेब के अच्छे दाम मिलने से उनकी आर्थिकी सुदृढ़ हुई है।
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बता दें कि विकास खंड चंबा के तहत साहो, लग्गा, गुवाड़, सराहण, सिल्लाघ्राट और जड़ेरा क्षेत्रों में सेब की इस बार ज्यादा पैदावार नहीं हुई है। लेकिन, बाहरी राज्यों में सेब के अच्छे दाम मिलने से बागवानों के चेहरों की खोई रौनक लौट आई है।
हालांकि जिले में बागवान बागीचों में अभी भी सेब की स्टेंडर्ड रॉयल, गोल्डन, सिलवर स्पर, आरगर्न स्पर और शेलो रूट्स जैसी किस्में ही लगाते हैं। बागवान बागीचों से सेब तुड़ान के बाद अपने खर्चे पर बाहरी राज्यों की मंडियों में फसल पहुंचाते हैं।
बागवान धारो राम, बलिराम, मान सिंह, हरि सिंह, राम सिंह, खेमराज ने बताया कि इस बार सेब की फसल कम होने के बावजूद भी कोल्ड स्टोर चंडीगढ़, ऊना, गाजियाबाद की मंडियों में सेब की उम्दा दाम मिल रहे हैं।
उन्होंने कहा कि बागवानों को अपने स्तर पर बागीचों से सेब तुड़ान कर, निजी गाड़ियों के माध्यम से सेब मंडियों में पहुंचाना पड़ रहा है। बागवानों को तुन्नूहट्टी में मार्केटिंग कमेटी के बैरियर पर टैक्स कटवाना पड़ता है।
इनसेट
बागवानी विभाग के उपनिदेशक राजीव चंद्रा ने बताया कि साहो और सिल्लाघ्राट के तहत क्षेत्रों के बागवानों को बाहरी मंडियों में सेब के अच्छे दाम मिल रहे हैं। इससे बागवानों की आर्थिकी को भी बल मिला है।