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Chamba News: बिल गायब, दवा के लिफाफे पर हिसाब
Mon, 14 Sep 2026 10:48 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
Updated Mon, 14 Sep 2026 10:48 PM IST
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चंबा शहर में दवा स्टोर में ग्राहकों को दवाई खरीद पर कागज लिफाफे पर बनाकर दिया जा रहा बिल। संवाद
मरीज के हाथ में रसीद नहीं, सिर्फ दवाओं का जोड़ थमा रहे कुछ केमिस्ट
लिफाफे पर न दवा का नाम, न दुकान का ब्योरा, खरीद का प्रमाण भी नहीं मिल रहा
नियमों की अनदेखी से मरीजों के सामने शिकायत और जवाबदेही का संकट
प्रवीण कुमार
चंबा। शहर में दवा खरीदने वाले मरीजों को कुछ दवा स्टोरों पर बिल देने के बजाय दवाओं के लिफाफे पर ही रकम लिखकर थमाई जा रही है। दवा नियंत्रक विभाग के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद बिल की व्यवस्था का पालन नहीं होने से दवाओं की खरीद पर पारदर्शिता को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
स्थिति यह है कि लिफाफे पर न दवा का नाम दर्ज किया जा रहा है और न संबंधित दवा स्टोर का विवरण। कई मामलों में दवाओं के अलग-अलग दाम जोड़कर मरीज को केवल कुल रकम बता दी जाती है।
ऐसे में ग्राहक के पास यह जांचने का कोई स्पष्ट आधार नहीं रहता कि उसे कौन सी दवा कितने मूल्य में दी गई। सबसे बड़ा सवाल तब खड़ा होता है, जब खरीदी गई दवा में कोई खराबी सामने आए या उससे संबंधित शिकायत करनी पड़े। बिल नहीं होने की स्थिति में मरीज के लिए संबंधित केमिस्ट तक शिकायत पहुंचाना और खरीद का प्रमाण देना मुश्किल हो सकता है।
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दवा सीधे मरीज की सेहत और जीवन से जुड़ी होती है। ऐसे में उसकी खरीद-फरोख्त में नियमों की अनदेखी न केवल व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है, बल्कि मरीजों के अधिकारों को भी प्रभावित करती है।
उधर, राज्य दवा नियंत्रक डॉ. मनीष कपूर ने बताया कि उनके ध्यान में यह मामला लाया गया है। जल्द ही बिल नहीं देने वाले केमिस्टों के खिलाफ कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
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यदि ग्राहक दवाई के पूरे पैसे दे रहा है तो उसे बिल भी दिया जाना चाहिए, ताकि दवाई से संबंधित कोई शिकायत आए तो वह संबंधित केमिस्ट से पूछताछ कर सके। - - मनु कुमार
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स्वास्थ्य विभाग ने सभी केमिस्टों को बिल देने के आदेश दिए थे तो शहर के केमिस्ट उन आदेशों की पालना किस वजह से नहीं कर रहे हैं, इसके पीछे भी कोई कारण हो सकता है। - मनु ठाकुर
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दवाई मरीज की जिंदगी के साथ जुड़ी वस्तु है। ऐसे में इसकी खरीद-फरोख्त में किसी प्रकार की लापरवाही नहीं होनी चाहिए। विभाग को इस मामले में कार्रवाई करनी चाहिए। - सोनू ठाकुर
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लिफाफे पर न दवा का नाम, न दुकान का ब्योरा, खरीद का प्रमाण भी नहीं मिल रहा
नियमों की अनदेखी से मरीजों के सामने शिकायत और जवाबदेही का संकट
प्रवीण कुमार
चंबा। शहर में दवा खरीदने वाले मरीजों को कुछ दवा स्टोरों पर बिल देने के बजाय दवाओं के लिफाफे पर ही रकम लिखकर थमाई जा रही है। दवा नियंत्रक विभाग के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद बिल की व्यवस्था का पालन नहीं होने से दवाओं की खरीद पर पारदर्शिता को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
स्थिति यह है कि लिफाफे पर न दवा का नाम दर्ज किया जा रहा है और न संबंधित दवा स्टोर का विवरण। कई मामलों में दवाओं के अलग-अलग दाम जोड़कर मरीज को केवल कुल रकम बता दी जाती है।
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ऐसे में ग्राहक के पास यह जांचने का कोई स्पष्ट आधार नहीं रहता कि उसे कौन सी दवा कितने मूल्य में दी गई। सबसे बड़ा सवाल तब खड़ा होता है, जब खरीदी गई दवा में कोई खराबी सामने आए या उससे संबंधित शिकायत करनी पड़े। बिल नहीं होने की स्थिति में मरीज के लिए संबंधित केमिस्ट तक शिकायत पहुंचाना और खरीद का प्रमाण देना मुश्किल हो सकता है।
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दवा सीधे मरीज की सेहत और जीवन से जुड़ी होती है। ऐसे में उसकी खरीद-फरोख्त में नियमों की अनदेखी न केवल व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है, बल्कि मरीजों के अधिकारों को भी प्रभावित करती है।
उधर, राज्य दवा नियंत्रक डॉ. मनीष कपूर ने बताया कि उनके ध्यान में यह मामला लाया गया है। जल्द ही बिल नहीं देने वाले केमिस्टों के खिलाफ कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
यदि ग्राहक दवाई के पूरे पैसे दे रहा है तो उसे बिल भी दिया जाना चाहिए, ताकि दवाई से संबंधित कोई शिकायत आए तो वह संबंधित केमिस्ट से पूछताछ कर सके। - - मनु कुमार
स्वास्थ्य विभाग ने सभी केमिस्टों को बिल देने के आदेश दिए थे तो शहर के केमिस्ट उन आदेशों की पालना किस वजह से नहीं कर रहे हैं, इसके पीछे भी कोई कारण हो सकता है। - मनु ठाकुर
दवाई मरीज की जिंदगी के साथ जुड़ी वस्तु है। ऐसे में इसकी खरीद-फरोख्त में किसी प्रकार की लापरवाही नहीं होनी चाहिए। विभाग को इस मामले में कार्रवाई करनी चाहिए। - सोनू ठाकुर