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Chamba News: बारिश देरी से होने पर कम पैदावार होने की आशंका
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बारिश देरी से होने पर कम पैदावार होने की आशंका
होली में राजमा, मक्की और कुलथी की खेती को नुकसान
किसान बोले, जून में होती बारिश तो अच्छी हो जाती पैदावार
संवाद न्यूज एजेंसी
होली (चंबा)। जनजातीय क्षेत्र होली में इस बार राजमा, मक्की समेत माश की दाल और कुलथी की खेती करने वाले किसानों को फसलों को लेकर चिंता सता रही है। किसानों का कहना है कि इस बार खेतों में बीजे बीज का खर्च ही निकल आए तो गनीमत होगी। बारिश देरी से होने के कारण किसानों को नुकसान उठाना पड़ सकता है। अब यही उम्मीद की जा रही है कि किसी तरह बीज की लागत पूरी हो जाए।
जानकारी के अनुसार होली क्षेत्र की 14 पंचायतों में किसान राजमा, माश की दाल, मक्की और कुलथी की खेती करते हैं। हर साल उन्हें यह खेती कर मुनाफा होता है लेकिन इस बार उन्हें नुकसान का डर सता रहा है। किसानों रजिंद्र कुमार, अमित कुमार, राजेश कुमार, प्रवीण कुमार, सोहन लाल, रंजीत सिंह, उत्तम चंद, कृपा राम आदि का कहना है कि क्षेत्र में होने वाली राजमा और माश की दाल सहित कुलथी की दाल की मांग प्रदेशभर में रहती है। मणिमहेश यात्रा के दौरान काफी संख्या में श्रद्धालु इसकी खरीद करते हैं लेकिन इस बार जिले की मांग भी पूरी नहीं होगी। हर साल औसतन चार से पांच क्विंटल राजमा और माश की दाल की पैदावार रहती है। कुल मिलाकर जनजातीय क्षेत्र होली में इस बार किसानों को खेती से लाभ नहीं होगा।
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होली में राजमा, मक्की और कुलथी की खेती को नुकसान
किसान बोले, जून में होती बारिश तो अच्छी हो जाती पैदावार
संवाद न्यूज एजेंसी
होली (चंबा)। जनजातीय क्षेत्र होली में इस बार राजमा, मक्की समेत माश की दाल और कुलथी की खेती करने वाले किसानों को फसलों को लेकर चिंता सता रही है। किसानों का कहना है कि इस बार खेतों में बीजे बीज का खर्च ही निकल आए तो गनीमत होगी। बारिश देरी से होने के कारण किसानों को नुकसान उठाना पड़ सकता है। अब यही उम्मीद की जा रही है कि किसी तरह बीज की लागत पूरी हो जाए।
जानकारी के अनुसार होली क्षेत्र की 14 पंचायतों में किसान राजमा, माश की दाल, मक्की और कुलथी की खेती करते हैं। हर साल उन्हें यह खेती कर मुनाफा होता है लेकिन इस बार उन्हें नुकसान का डर सता रहा है। किसानों रजिंद्र कुमार, अमित कुमार, राजेश कुमार, प्रवीण कुमार, सोहन लाल, रंजीत सिंह, उत्तम चंद, कृपा राम आदि का कहना है कि क्षेत्र में होने वाली राजमा और माश की दाल सहित कुलथी की दाल की मांग प्रदेशभर में रहती है। मणिमहेश यात्रा के दौरान काफी संख्या में श्रद्धालु इसकी खरीद करते हैं लेकिन इस बार जिले की मांग भी पूरी नहीं होगी। हर साल औसतन चार से पांच क्विंटल राजमा और माश की दाल की पैदावार रहती है। कुल मिलाकर जनजातीय क्षेत्र होली में इस बार किसानों को खेती से लाभ नहीं होगा।
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