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आयुर्वेदिक डिसपेंसरियों को दवाओं की सप्लाई बंद
Updated Wed, 24 Feb 2016 10:30 PM IST
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आयुर्वेदिक विभाग ने चपरासी के सहारे चल रही डिसपेंसरियों को दवाइयों की सप्लाई देना बंद कर दिया है। जिससे सरकार द्वारा खोली गई आयुर्वेदिक डिसपेंसरियां सफेद हाथी बन कर रह गई हैं। वहीं इसका खामियाजा आयुर्वेद की इलाज पद्धति पर विश्वास रखने वालों लोगों को भी भुगतना पड़ रहा है।
जिला चंबा की बात करें तो यहां पर दर्जन भर ऐसी आयुर्वेदिक डिसपेंसरियां है जो कि पिछले काफी समय से महज चपरासी के सहारे चल रही हैं। जहां पर चपरासी रोजाना डिसपेंसरी के दरवाजे तो खोलता है लेकिन साफ-सफाई करने के लिए। उधर, नियम के हिसाब से भी जिला आयुर्वेदिक स्वास्थ्य विभाग इन डिसपेंसरियों को दवाइयां देने से कन्नी काट रहा है। क्योंकि दवाइयों की खेप पहुंचने के बाद हो सकता है कि डिसपेंसरी में कार्यरत चपरासी चिकित्सक बनकर लोगों को दवाइयों देना शुरू हो जाए। जिससे पैदा हुई समस्या बाद में विभाग के गले में पड़ जाए।
ऐसे में जिले में किस कदर आयुर्वेदिक स्वास्थ्य व्यवस्था का दम उखड़ा हुआ है इससे प्रदेश सरकार भी भली-भांति परिचित है। ऐसे में बिना चिकित्सकों वाली आयुर्वेदिक डिसपेंसरियों में जब तक चिकित्सकों की नियुक्ति नहीं हो जाती है तब तक यहां पर दवाइयों की खेप पहुंचना मुश्किल ही लग रहा है।
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जिला आयुर्वेदिक अधिकारी इंद्र सिंह ने बताया कि बिना चिकित्सकीय परामर्श के दवाइयां मरीजों को नहीं दी जा सकती है। जिन डिसपेंसरियों में केवल चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी नियुक्त है उन डिसपेंसरियों में दवाइयों की सप्लाई रोक दी गई है।
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जिला चंबा की बात करें तो यहां पर दर्जन भर ऐसी आयुर्वेदिक डिसपेंसरियां है जो कि पिछले काफी समय से महज चपरासी के सहारे चल रही हैं। जहां पर चपरासी रोजाना डिसपेंसरी के दरवाजे तो खोलता है लेकिन साफ-सफाई करने के लिए। उधर, नियम के हिसाब से भी जिला आयुर्वेदिक स्वास्थ्य विभाग इन डिसपेंसरियों को दवाइयां देने से कन्नी काट रहा है। क्योंकि दवाइयों की खेप पहुंचने के बाद हो सकता है कि डिसपेंसरी में कार्यरत चपरासी चिकित्सक बनकर लोगों को दवाइयों देना शुरू हो जाए। जिससे पैदा हुई समस्या बाद में विभाग के गले में पड़ जाए।
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ऐसे में जिले में किस कदर आयुर्वेदिक स्वास्थ्य व्यवस्था का दम उखड़ा हुआ है इससे प्रदेश सरकार भी भली-भांति परिचित है। ऐसे में बिना चिकित्सकों वाली आयुर्वेदिक डिसपेंसरियों में जब तक चिकित्सकों की नियुक्ति नहीं हो जाती है तब तक यहां पर दवाइयों की खेप पहुंचना मुश्किल ही लग रहा है।
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जिला आयुर्वेदिक अधिकारी इंद्र सिंह ने बताया कि बिना चिकित्सकीय परामर्श के दवाइयां मरीजों को नहीं दी जा सकती है। जिन डिसपेंसरियों में केवल चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी नियुक्त है उन डिसपेंसरियों में दवाइयों की सप्लाई रोक दी गई है।