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Chamba News: कसमल की जड़ों के बाद अब जड़ी-बूटियों पर तस्करों की नजर
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खास खबर
कसमल की जड़ों के बाद अब जड़ी-बूटियों पर तस्करों की नजर
अवैध तरीके से जंगलों से निकालकर अंधेरे में की जा रही तस्करी
कई ठेकेदारों को वन विभाग ने जंगल से जड़ी-बूटी निकालने का दिया है परमिट
संवाद न्यूज एजेंसी
चंबा। जिले में कसमल की जड़ों की अवैध तस्करी के बाद अब कीमती जड़ी-बूटी की तस्करी की जा रही है। पांगी घाटी में वन विभाग चार से पांच लोगों को जड़ी-बूटियों की अवैध तस्करी करते हुए दबोच चुका है। हालांकि, विभाग ने कुछ लोगों को जड़ी-बूटी निकालने के लिए परमिट जारी किए हैं लेकिन, अधिकतर लोग बिना परमिट के जड़ी-बूटी निकालकर तस्करी को अंजाम दे रहे हैं। परमिट धारक लोग भी इन तस्करों से जड़ी-बूटी खरीदकर आगे बेच रहे हैं। रात के अंधेरे में जड़ी-बूटी को ट्रांसपोर्ट नहीं किया जा सकता लेकिन, कुछ लोग मनमाने तरीके से इस कार्य को अंजाम दे रहे हैं। इनमें कुछ परमिट धारक भी शामिल हैं।
पर्यावरणविद सुरेंद्र कुमार, अशोक ठाकुर, कुलभूषण, प्यार सिंह, योगराज, नानक चंद और देसराज ने बताया कि जंगलों में जड़ी-बूटी का अवैध दोहन रोकने के लिए विभाग को कड़े कदम उठाने चाहिए। निजी ठेकेदारों को यह कार्य नहीं देना चाहिए। इससे अवैध तस्करी होने की संभावना बढ़ जाती है। या ताे विभाग स्वयं औषधीय जड़ी-बूटियों को नियमानुसार जंगल से निकाले या फिर किसी दवा निर्माता कंपनी को यह कार्य सौंपा जाए। इससे जंगल में सीमित मात्रा में जड़ी-बूटियों का दोहन होगा। इससे जंगलों में इन जड़ी-बूटियों का अस्तित्व भी बना रहेगा। मुख्य वन अरण्यपाल अभिलाष दामोदरन ने बताया कि जड़ी-बूटी को अवैध तरीके से जंगल से निकालने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए विभाग की टीमें दिन-रात नाकेबंदी कर रही हैं।
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कसमल की जड़ों के बाद अब जड़ी-बूटियों पर तस्करों की नजर
अवैध तरीके से जंगलों से निकालकर अंधेरे में की जा रही तस्करी
कई ठेकेदारों को वन विभाग ने जंगल से जड़ी-बूटी निकालने का दिया है परमिट
संवाद न्यूज एजेंसी
चंबा। जिले में कसमल की जड़ों की अवैध तस्करी के बाद अब कीमती जड़ी-बूटी की तस्करी की जा रही है। पांगी घाटी में वन विभाग चार से पांच लोगों को जड़ी-बूटियों की अवैध तस्करी करते हुए दबोच चुका है। हालांकि, विभाग ने कुछ लोगों को जड़ी-बूटी निकालने के लिए परमिट जारी किए हैं लेकिन, अधिकतर लोग बिना परमिट के जड़ी-बूटी निकालकर तस्करी को अंजाम दे रहे हैं। परमिट धारक लोग भी इन तस्करों से जड़ी-बूटी खरीदकर आगे बेच रहे हैं। रात के अंधेरे में जड़ी-बूटी को ट्रांसपोर्ट नहीं किया जा सकता लेकिन, कुछ लोग मनमाने तरीके से इस कार्य को अंजाम दे रहे हैं। इनमें कुछ परमिट धारक भी शामिल हैं।
पर्यावरणविद सुरेंद्र कुमार, अशोक ठाकुर, कुलभूषण, प्यार सिंह, योगराज, नानक चंद और देसराज ने बताया कि जंगलों में जड़ी-बूटी का अवैध दोहन रोकने के लिए विभाग को कड़े कदम उठाने चाहिए। निजी ठेकेदारों को यह कार्य नहीं देना चाहिए। इससे अवैध तस्करी होने की संभावना बढ़ जाती है। या ताे विभाग स्वयं औषधीय जड़ी-बूटियों को नियमानुसार जंगल से निकाले या फिर किसी दवा निर्माता कंपनी को यह कार्य सौंपा जाए। इससे जंगल में सीमित मात्रा में जड़ी-बूटियों का दोहन होगा। इससे जंगलों में इन जड़ी-बूटियों का अस्तित्व भी बना रहेगा। मुख्य वन अरण्यपाल अभिलाष दामोदरन ने बताया कि जड़ी-बूटी को अवैध तरीके से जंगल से निकालने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए विभाग की टीमें दिन-रात नाकेबंदी कर रही हैं।
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