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दो किमी पालकी पर उठा मुख्य सड़क तक पहुंचाई बीमार युवती
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मरीज को पालकी में अठाकर सड़क तक पहुंचाते मियाड़ी गांव के ग्रामीण व परिजन।
- फोटो : Chamba
खज्जियार (चंबा)। मियाड़ी गांव में चार सालों से बिस्तर पर पड़ी युवती को सड़क सुविधा के अभाव में अभिभावकों को दो किमी पालकी पर उठाकर मुख्य सड़क तक पहुंचाना पड़ा। उसके बाद निजी वाहन के जरिये उसे उपचार के लिए टांडा मेडिकल कॉलेज ले जाया गया। यह सिलसिला पिछले चार सालों से जारी है। युवती की चार साल पहले चंडीगढ़ में दुर्घटना हुई थी, तबसे वह बिस्तर पर है। उसे हर 15 दिनों के बाद उपचार के लिए टांडा लेकर जाना पड़ता है।
शुरुआत में रिश्तेदार और ग्रामीण पालकी उठाने के लिए उनके घर पहुंच जाते थे लेकिन, अब उन्हें पालकी उठाने के लिए दिहाड़ी पर मजदूरों को बुलाना पड़ता है। दो किमी तक पैदल पालकी को उठाकर मुख्य सड़क तक पहुंचाना अकेले परिवार के लिए मुश्किल होता है। ऐसा नहीं है कि गांव के लिए सड़क स्वीकृत नहीं है बल्कि दो वर्ष पहले इस गांव के लिए सड़क बनाने के लिए सदर विधायक ने शिलान्यास किया था। लेकिन, शिलान्यास के बाद सड़क का कार्य आगे नहीं बढ़ पाया। आजादी के 74 सालों के बाद मियाड़ी गांव के लोगों को सड़क की जो उम्मीद जगी थी, वह शिलान्यास से आगे नहीं बढ़ पाई है। इसको लेकर लोगों में रोष है।
स्थानीय निवासी विपिन कुमार, दीप कुमार, सुरेश, प्रकाश सिंह, रिंकू, तिलक राज, सुरेंद्र, योगराज, चमन सिंह, रिशु, युगल किशोर और नरेश कुमार ने बताया कि विस चुनाव से पहले सड़क का कार्य शुरू नहीं हुुआ तो ग्रामीण चुनाव का बहिष्कार कर देंगे। कहा कि सरकार ग्रामीण क्षेत्रों को सड़क से जोड़ने की बात कर रही है वहीं, गांव को अभी तक सड़क से नहीं जोड़ा जा सका है। खज्जियार मुख्य सड़क से मियाड़ी गांव तक सड़क बनने से एक दर्जन गांवों की तीन हजार आबादी को लाभ मिलेगा, जो मौजूदा समय में पैदल आवाजाही करने के लिए मजबूर हैं।
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लोनिवि के सहायक अभियंता मीत कुमार ने बताया कि सड़क के शिलान्यास के बाद जब विभाग ने कार्य शुरू करवाना चाहा तो स्थानीय दो लोगों ने कोर्ट में केस कर दिया। इसके चलते सड़क का कार्य लटका हुआ है। हालांकि, निशानदेही के दौरान सड़क के बीच में आने वाली सारी भूमि सरकारी पाई गई थी। अब कोर्ट में केस खत्म होने के बाद कार्य शुरू हो पाएगा।
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शुरुआत में रिश्तेदार और ग्रामीण पालकी उठाने के लिए उनके घर पहुंच जाते थे लेकिन, अब उन्हें पालकी उठाने के लिए दिहाड़ी पर मजदूरों को बुलाना पड़ता है। दो किमी तक पैदल पालकी को उठाकर मुख्य सड़क तक पहुंचाना अकेले परिवार के लिए मुश्किल होता है। ऐसा नहीं है कि गांव के लिए सड़क स्वीकृत नहीं है बल्कि दो वर्ष पहले इस गांव के लिए सड़क बनाने के लिए सदर विधायक ने शिलान्यास किया था। लेकिन, शिलान्यास के बाद सड़क का कार्य आगे नहीं बढ़ पाया। आजादी के 74 सालों के बाद मियाड़ी गांव के लोगों को सड़क की जो उम्मीद जगी थी, वह शिलान्यास से आगे नहीं बढ़ पाई है। इसको लेकर लोगों में रोष है।
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स्थानीय निवासी विपिन कुमार, दीप कुमार, सुरेश, प्रकाश सिंह, रिंकू, तिलक राज, सुरेंद्र, योगराज, चमन सिंह, रिशु, युगल किशोर और नरेश कुमार ने बताया कि विस चुनाव से पहले सड़क का कार्य शुरू नहीं हुुआ तो ग्रामीण चुनाव का बहिष्कार कर देंगे। कहा कि सरकार ग्रामीण क्षेत्रों को सड़क से जोड़ने की बात कर रही है वहीं, गांव को अभी तक सड़क से नहीं जोड़ा जा सका है। खज्जियार मुख्य सड़क से मियाड़ी गांव तक सड़क बनने से एक दर्जन गांवों की तीन हजार आबादी को लाभ मिलेगा, जो मौजूदा समय में पैदल आवाजाही करने के लिए मजबूर हैं।
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लोनिवि के सहायक अभियंता मीत कुमार ने बताया कि सड़क के शिलान्यास के बाद जब विभाग ने कार्य शुरू करवाना चाहा तो स्थानीय दो लोगों ने कोर्ट में केस कर दिया। इसके चलते सड़क का कार्य लटका हुआ है। हालांकि, निशानदेही के दौरान सड़क के बीच में आने वाली सारी भूमि सरकारी पाई गई थी। अब कोर्ट में केस खत्म होने के बाद कार्य शुरू हो पाएगा।