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चंबा की एक और गर्भवती ने तोड़ा दम
Chamba
Updated Wed, 31 Oct 2012 12:00 PM IST
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पुखरी (चंबा)। बिना विशेषज्ञ चिकित्सकों के जिला अस्पताल सफेद हाथी बन गया है। विशेषज्ञ की कमी से जूझ रहे इस अस्पताल में मरीजों को अपनी जान से हाथ गंवाना पड़ रहा है। इसका ताजा उदाहरण झुलाड़ा निवासी पूजा देवी की मौत रहा है। सुरक्षित प्रसव के लिए जिला अस्पताल में दाखिल पूजा देवी ने रविवार को टांडा मेडिकल जाते हुए रास्ते में ही दम तोड़ दिया।
प्राप्त जानकारी के अनुसार उक्त महिला को सुरक्षित प्रसव के लिए जिला अस्पताल में एक सप्ताह पहले भर्ती करवाया गया था। अस्पताल में स्त्री रोग विशेषज्ञ न होने के कारण पूजा को समय रहते उचित इलाज नहीं मिल पाया। प्रसव के दौरान हुई परेशानी के चलते अस्पताल ने पूजा को टांडा मेडिकल कालेज रेफर कर दिया। इसके चलते उसकी रास्ते में ही मौत हो गई। अपने पहले बच्चे की खुशी ग्राम पंचायत झुुलाड़ा की पूजा पत्नी जतो राम को अपनी जिंदगी चुकानी पड़ गई। इस तरह गर्भवती महिलाओं की कबरगाह बनती जा रही लचर स्वास्थ्य सुविधाएं एक बार फिर निशाने पर आ गई हैं।
पूजा को सुरक्षित प्रसव के लिए जिला अस्पताल में दाखिल करवाया गया था। प्रसव के बाद उसकी हालत बिगड़ गई। पूजा के फुफेर भाई अजय ने बताया कि पहले तो जिला अस्पताल में उसे दाखिल रखा गया। जब पूजा की तबीयत ज्यादा खराब हो गई तो उसे टांडा रेफर किया गया। अजय ने कहा कि अगर पूजा को पहले ही रेफर कर दिया गया होता तो उसकी जान बच सकती थी। अजय ने बताया कि पूजा पिछले सप्ताह से जिला अस्पताल में उपचाराधीन थी। पूजा की साधारण डिलीवरी न होने के कारण उसे रविवार को टांडा मेडिकल कालेज रेफर किया गया।
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इस दौरान 21 वर्षीय पूजा ने रास्ते में ही दम तोड़ दिया। पूजा की शादी जनवरी माह में हुई थी और अभी उसकी शादी को एक साल भी पूरा नहीं हुआ था। पूजा की मौत के बाद जतो राम व उसके परिवार वाले काफी दुखी हैं। वहीं उसके बच्चे के पैदा होने के बाद से उसकी मां का साया भी सिर से उठ गया है। जातो राम व उसके परिजनों के लिए मासूम को पालना भी चुनौती से कम नहीं होगा। वहीं, जिला अस्पताल के एमएस डा. विनोद शर्मा ने बताया कि पूजा की डिलवरी नार्मल नहीं हो पाई और दिक्कत के कारण उसे टांडा रेफर किया गया था। विशेषज्ञ डाक्टर न होने के कारण जिला अस्पताल में गर्भवती महिलाओं को दाखिल कर उनकी जान से खिलवाड़ किया जा रहा है। हालांकि आंकड़ों के हिसाब से अस्पताल प्रशासन सही हो, मगर इस तरह की मौतें चंबावासियों का दुर्भाग्य बन कर रह गई हैं।
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प्राप्त जानकारी के अनुसार उक्त महिला को सुरक्षित प्रसव के लिए जिला अस्पताल में एक सप्ताह पहले भर्ती करवाया गया था। अस्पताल में स्त्री रोग विशेषज्ञ न होने के कारण पूजा को समय रहते उचित इलाज नहीं मिल पाया। प्रसव के दौरान हुई परेशानी के चलते अस्पताल ने पूजा को टांडा मेडिकल कालेज रेफर कर दिया। इसके चलते उसकी रास्ते में ही मौत हो गई। अपने पहले बच्चे की खुशी ग्राम पंचायत झुुलाड़ा की पूजा पत्नी जतो राम को अपनी जिंदगी चुकानी पड़ गई। इस तरह गर्भवती महिलाओं की कबरगाह बनती जा रही लचर स्वास्थ्य सुविधाएं एक बार फिर निशाने पर आ गई हैं।
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पूजा को सुरक्षित प्रसव के लिए जिला अस्पताल में दाखिल करवाया गया था। प्रसव के बाद उसकी हालत बिगड़ गई। पूजा के फुफेर भाई अजय ने बताया कि पहले तो जिला अस्पताल में उसे दाखिल रखा गया। जब पूजा की तबीयत ज्यादा खराब हो गई तो उसे टांडा रेफर किया गया। अजय ने कहा कि अगर पूजा को पहले ही रेफर कर दिया गया होता तो उसकी जान बच सकती थी। अजय ने बताया कि पूजा पिछले सप्ताह से जिला अस्पताल में उपचाराधीन थी। पूजा की साधारण डिलीवरी न होने के कारण उसे रविवार को टांडा मेडिकल कालेज रेफर किया गया।
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इस दौरान 21 वर्षीय पूजा ने रास्ते में ही दम तोड़ दिया। पूजा की शादी जनवरी माह में हुई थी और अभी उसकी शादी को एक साल भी पूरा नहीं हुआ था। पूजा की मौत के बाद जतो राम व उसके परिवार वाले काफी दुखी हैं। वहीं उसके बच्चे के पैदा होने के बाद से उसकी मां का साया भी सिर से उठ गया है। जातो राम व उसके परिजनों के लिए मासूम को पालना भी चुनौती से कम नहीं होगा। वहीं, जिला अस्पताल के एमएस डा. विनोद शर्मा ने बताया कि पूजा की डिलवरी नार्मल नहीं हो पाई और दिक्कत के कारण उसे टांडा रेफर किया गया था। विशेषज्ञ डाक्टर न होने के कारण जिला अस्पताल में गर्भवती महिलाओं को दाखिल कर उनकी जान से खिलवाड़ किया जा रहा है। हालांकि आंकड़ों के हिसाब से अस्पताल प्रशासन सही हो, मगर इस तरह की मौतें चंबावासियों का दुर्भाग्य बन कर रह गई हैं।