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सुना है टूट जाते हैं कि वादे सफर में अक्सर
Updated Sat, 08 Dec 2018 09:27 PM IST
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‘बिना वादे सफर में साथ चलना अच्छा लगता है’ ने किया मंत्रमुग्ध
कला सृजन पाठशाला ने करवाया स्वच्छता विषय पर रचना पाठ
गजलों और कविताओं से भीगता रहा मन का कोना-कोना
अमर उजाला ब्यूरो
चंबा। कला सृजन पाठशाला की ओर से स्वच्छता-विषयक रचना-पाठ एवं लेख-पाठ सत्र-1 का आयोजन किया गया। हिमाचल पर्यटन विकास निगम के होटल इरावती में इस कार्यक्रम का आयोजन सुंदर शकुंतला प्रकाशन के सौजन्य से बालकृष्ण पराशर के संरक्षण में किया गया। इस अवसर पर उपस्थित युवा रचनाकारों एवं वरिष्ठ साहित्यकारों ने कविताएं पढ़ी। उनकी कविताओं परआलोचकों ने त्वरित टिप्पणी कर प्रेरणा दी।
सृजन-कला पाठशाला के तत्वावधान में आयोजित इस समारोह में रचना पाठ का मूल विषय स्वच्छता पर केंद्रित था। रचनाकारों ने आत्मा की शुद्धता, मूल्यों की शुद्धता से लेकर बाहरी शुद्धता की आवश्यकता और इसके महत्व पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम का संचालन डाक्टर संतोष और युवा प्रोफेसर प्रशांत रमण रवि ने किया। इस अवसर पर भूपेंद्र जसरोटिया, उज्ज्वल कटोच, मोनिका राणा, मीनाक्षी, काजल, मनोज कुमार, हेमराज, सोमी प्रकाश, टीसी सावन, बोधराज, हेमराज आदि रचनकार उपस्थित रहे। मोनिका ने अपने महत्वपूर्ण लेख में स्वच्छता को जीवन मूल्यों का केंद्र बताया, जबकि जसरोटिया ने अपनी चंबियाली कविता मोबाइल गुम गई से सबका दिल जीत लिया। प्रोफेसर प्रशांत रमण रवि की ग़जल ‘बिना वादे सफर में साथ चलना अच्छा लगता है ने सबको मंत्रमुग्ध कर दिया। टीसी सावन के ताजा काव्य संग्रह ‘कसक अभी बाकी है’ का विमोचन भी किया गया। टी.सी सावन ने अपनी दो महत्वपूर्ण कविताओं का भी पाठ किया। डॉक्टर कटोच ने ‘सफलता मंत्र’ गीत से माहौल में रौनक पैदा की, वहीं सोमी प्रकाश और मनोज की कविताओं का मिजाज मूल्यों की सफाई पर केंद्रित था। डॉक्टर संतोष ने अपने महत्वपूर्ण व्याख्यान में सभी समस्याओं की जड़ में मानसिक अस्वच्छता को जिम्मेदार ठहराया। संरक्षक बालकृष्ण पराशर ने अपने वक्तव्य में कहा कि कला-सृजन पाठशाला की सक्रियता को और बढ़ाने की आवश्यकता है। अध्यक्ष शरत शर्मा ने कहा ‘कला-सृजन पाठशाला ’ के प्रत्येक सत्र में पढ़े जाने वाली सामग्री को एकत्रित करके भविष्य में निकाले जाने वाली साहित्यिक पत्रिका के लिए सामग्री जुटाई जाएगी।
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कला सृजन पाठशाला ने करवाया स्वच्छता विषय पर रचना पाठ
गजलों और कविताओं से भीगता रहा मन का कोना-कोना
अमर उजाला ब्यूरो
चंबा। कला सृजन पाठशाला की ओर से स्वच्छता-विषयक रचना-पाठ एवं लेख-पाठ सत्र-1 का आयोजन किया गया। हिमाचल पर्यटन विकास निगम के होटल इरावती में इस कार्यक्रम का आयोजन सुंदर शकुंतला प्रकाशन के सौजन्य से बालकृष्ण पराशर के संरक्षण में किया गया। इस अवसर पर उपस्थित युवा रचनाकारों एवं वरिष्ठ साहित्यकारों ने कविताएं पढ़ी। उनकी कविताओं परआलोचकों ने त्वरित टिप्पणी कर प्रेरणा दी।
सृजन-कला पाठशाला के तत्वावधान में आयोजित इस समारोह में रचना पाठ का मूल विषय स्वच्छता पर केंद्रित था। रचनाकारों ने आत्मा की शुद्धता, मूल्यों की शुद्धता से लेकर बाहरी शुद्धता की आवश्यकता और इसके महत्व पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम का संचालन डाक्टर संतोष और युवा प्रोफेसर प्रशांत रमण रवि ने किया। इस अवसर पर भूपेंद्र जसरोटिया, उज्ज्वल कटोच, मोनिका राणा, मीनाक्षी, काजल, मनोज कुमार, हेमराज, सोमी प्रकाश, टीसी सावन, बोधराज, हेमराज आदि रचनकार उपस्थित रहे। मोनिका ने अपने महत्वपूर्ण लेख में स्वच्छता को जीवन मूल्यों का केंद्र बताया, जबकि जसरोटिया ने अपनी चंबियाली कविता मोबाइल गुम गई से सबका दिल जीत लिया। प्रोफेसर प्रशांत रमण रवि की ग़जल ‘बिना वादे सफर में साथ चलना अच्छा लगता है ने सबको मंत्रमुग्ध कर दिया। टीसी सावन के ताजा काव्य संग्रह ‘कसक अभी बाकी है’ का विमोचन भी किया गया। टी.सी सावन ने अपनी दो महत्वपूर्ण कविताओं का भी पाठ किया। डॉक्टर कटोच ने ‘सफलता मंत्र’ गीत से माहौल में रौनक पैदा की, वहीं सोमी प्रकाश और मनोज की कविताओं का मिजाज मूल्यों की सफाई पर केंद्रित था। डॉक्टर संतोष ने अपने महत्वपूर्ण व्याख्यान में सभी समस्याओं की जड़ में मानसिक अस्वच्छता को जिम्मेदार ठहराया। संरक्षक बालकृष्ण पराशर ने अपने वक्तव्य में कहा कि कला-सृजन पाठशाला की सक्रियता को और बढ़ाने की आवश्यकता है। अध्यक्ष शरत शर्मा ने कहा ‘कला-सृजन पाठशाला ’ के प्रत्येक सत्र में पढ़े जाने वाली सामग्री को एकत्रित करके भविष्य में निकाले जाने वाली साहित्यिक पत्रिका के लिए सामग्री जुटाई जाएगी।
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