{"_id":"5a36a1af4f1c1b3c3d8be3c7","slug":"61513529775-chamba-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"बर्फ के बीच 18 किमी पालकी पर उठाकर अस्पताल पहुंचाए प्रसूता और नवजात","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बर्फ के बीच 18 किमी पालकी पर उठाकर अस्पताल पहुंचाए प्रसूता और नवजात
Updated Sun, 17 Dec 2017 10:34 PM IST
विज्ञापन
भरमौर के बड़गांम में बीमार महिला और नवजा को पालकी मे बिठाकर अस्पताल ले जाते ग्रामीण।
- फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन
रणजीत शर्मा
भरमौर (चंबा)। जिले के ग्रामीण क्षेत्रों के लोग स्वास्थ्य सेवाओं से कोसों दूर हैं। इसका प्रत्यक्ष प्रमाण रविवार को देखने को मिला। भरमौर के बडगांम की एक प्रसूता को बीमार नवजात के साथ मेडिकल कॉलेज चंबा तक पहुंचाने के लिए चुनौतियों का सामना करना पड़ा। ग्रामीणों को 50 किलोमीटर के इस सफर में पहले 18 किमी तक पालकी में उठाकर प्रसूता और उसके नवजात को छह इंच बर्फ पर चलना पडा। इसके बाद कनूले नामक स्थान पर पहुंचकर निजी वाहन से दोनों को चंबा मेडिकल कॉलेज पहुंचाया गया। नवजात के इलाज के लिए सामने आई इन चुनौतियों ने जिला में स्वास्थ्य सेवाओं को पोल खोल कर रख दी है। तो वहीं, सरकार के बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के दावों की भी हवा भी निकल गई है। गौरतलब हो कि तीन दिन पूर्व बडगांम में एक महिला ने अपने घर में बच्चे को जन्म दिया। बर्फबारी से गांव के सभी रास्ते बंद थे। इसकी वजह से परिजन महिला को अस्पताल नहीं ला पाए। मगर तीन दिन के बाद रविवार सुबह बच्चे की तबीयत अचानक खराब हो गई। इसके चलते बच्चे को अस्पताल ले जाना जरूरी हो गया। ऐसे में परिवार को क्षेत्र में हुई करीब छह इंच बर्फबारी में प्रसूता और उसके नवजात को स्वास्थ्य केंद्र तक पहुंचाना सबसे बड़ी चुनौती लग रहा था। नवजात की जिंदगी को देखते हुए परिवार के सदस्यों ने ग्रामीणों को मदद के लिए बुलाया। परिवार के सदस्यों और ग्रामीणों ने महिला और नवजात को पालकी में बिठाकर रविवार सुबह गांव से चंबा के लिए चलना शुरू किया। बडगाम से चंबा की दूरी 50 किमी है। इस वजह से आधे से ज्यादा दूरी ग्रामीणों को छह इंच तक बर्फ के बीच पैदल चलकर ही तय करनी पड़ी। करीब 18 किमी बर्फ में पैदल पालकी को उठाकर ग्रामीण कनेलू गांव पहुंचे। यहां पर उन्होंने एंबुलेंस को फोन किया। मगर उन्हें एंबुलेंस सुविधा तक नहीं मिल पाई। इस वजह से परिजन निजी वाहन से महिला औ नवजात को चंबा मेडिकल कॉलेज ले आए। महिला व नवजात को पालकी में कनेलू तक पहुंचाने में ग्रामीणों को दोपहर हो गई। इससे महिला और नवजात को शाम तक अस्पताल पहुंचाया जा सका।
इनसेट
महिला व नवजात अस्पताल में हैं सुरक्षित: डॉ. विनोद शर्मा
चिकित्सा अधीक्षक डॉ. विनोद शर्मा ने बताया कि महिला व नवजात बच्चा दोनों सुरक्षित हैं। इलाज पूरा होने के बाद उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी जाएगी।
भरमौर (चंबा)। जिले के ग्रामीण क्षेत्रों के लोग स्वास्थ्य सेवाओं से कोसों दूर हैं। इसका प्रत्यक्ष प्रमाण रविवार को देखने को मिला। भरमौर के बडगांम की एक प्रसूता को बीमार नवजात के साथ मेडिकल कॉलेज चंबा तक पहुंचाने के लिए चुनौतियों का सामना करना पड़ा। ग्रामीणों को 50 किलोमीटर के इस सफर में पहले 18 किमी तक पालकी में उठाकर प्रसूता और उसके नवजात को छह इंच बर्फ पर चलना पडा। इसके बाद कनूले नामक स्थान पर पहुंचकर निजी वाहन से दोनों को चंबा मेडिकल कॉलेज पहुंचाया गया। नवजात के इलाज के लिए सामने आई इन चुनौतियों ने जिला में स्वास्थ्य सेवाओं को पोल खोल कर रख दी है। तो वहीं, सरकार के बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के दावों की भी हवा भी निकल गई है। गौरतलब हो कि तीन दिन पूर्व बडगांम में एक महिला ने अपने घर में बच्चे को जन्म दिया। बर्फबारी से गांव के सभी रास्ते बंद थे। इसकी वजह से परिजन महिला को अस्पताल नहीं ला पाए। मगर तीन दिन के बाद रविवार सुबह बच्चे की तबीयत अचानक खराब हो गई। इसके चलते बच्चे को अस्पताल ले जाना जरूरी हो गया। ऐसे में परिवार को क्षेत्र में हुई करीब छह इंच बर्फबारी में प्रसूता और उसके नवजात को स्वास्थ्य केंद्र तक पहुंचाना सबसे बड़ी चुनौती लग रहा था। नवजात की जिंदगी को देखते हुए परिवार के सदस्यों ने ग्रामीणों को मदद के लिए बुलाया। परिवार के सदस्यों और ग्रामीणों ने महिला और नवजात को पालकी में बिठाकर रविवार सुबह गांव से चंबा के लिए चलना शुरू किया। बडगाम से चंबा की दूरी 50 किमी है। इस वजह से आधे से ज्यादा दूरी ग्रामीणों को छह इंच तक बर्फ के बीच पैदल चलकर ही तय करनी पड़ी। करीब 18 किमी बर्फ में पैदल पालकी को उठाकर ग्रामीण कनेलू गांव पहुंचे। यहां पर उन्होंने एंबुलेंस को फोन किया। मगर उन्हें एंबुलेंस सुविधा तक नहीं मिल पाई। इस वजह से परिजन निजी वाहन से महिला औ नवजात को चंबा मेडिकल कॉलेज ले आए। महिला व नवजात को पालकी में कनेलू तक पहुंचाने में ग्रामीणों को दोपहर हो गई। इससे महिला और नवजात को शाम तक अस्पताल पहुंचाया जा सका।
इनसेट
महिला व नवजात अस्पताल में हैं सुरक्षित: डॉ. विनोद शर्मा
चिकित्सा अधीक्षक डॉ. विनोद शर्मा ने बताया कि महिला व नवजात बच्चा दोनों सुरक्षित हैं। इलाज पूरा होने के बाद उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी जाएगी।