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Chamba News: बोर्ड पर अंकित 600, जनऔषधि केंद्र में मिल रहीं 120 दवाइयां

Wed, 20 Dec 2023 11:17 PM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा Updated Wed, 20 Dec 2023 11:17 PM IST
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600 medicines marked on the board, 120 medicines available in Jan Aushadhi Center
चंबा। चंबा में स्वास्थ्य विभाग लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया नहीं करवा पा रहा है।
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जिले के सबसे बड़े स्वास्थ्य संस्थान मेडिकल कॉलेज में भारतीय जनऔषधि परियोजना के तहत खाेली गई सस्ती दवाई की दुकान के बाहर दिखाने के लिए भले ही 600 से अधिक दवाइयां उपलब्ध करवाने का बोर्ड लगाया गया है, लेकिन मरीजों को मात्र 120 दवाइयां ही मिल रही हैं। इन दवाइयों को भी चिकित्सक मरीजों को देने से इंकार कर रहे हैं। इसके चलते दिन भर जन औषधि केंद्र मरीजों के लिए तरसता रहता है। निजी दवा की दुकानों में दिन भर मरीजों की लंबी लाइनें लगी रहती हैं। मेडिकल कॉलेज में जनऔषधि केंद्र और सिविल सप्लाई की दुकानें मरीजों को दवाइयां उपलब्ध करवा रही हैं, लेकिन मरीजों की भीड़ सिविल सप्लाई की दुकानों में ही देखने को मिलती है। वहां मरीजों को महंगे दामों पर दवाइयां दी जाती हैं। मात्र सर्जरी की आइटम पर ही 50 प्रतिशत छूट दी जाती है। प्रदेश के अन्य बड़े स्वास्थ्य संस्थानों में जहां जन औषधि केंद्र में मरीजों की लाइनें लग रही हैं तो चंबा के सबसे बड़े स्वास्थ्य संस्थान में जन औषधि केंद्र मरीजों के लिए तरस रहा है।

जन औषधि केंद्र में यदि कोई मरीज दवाई लेकर चिकित्सक को दिखाने के लिए जाता है तो चिकित्सक उस दवाई को खाने के लिए मना कर देता है। इसके चलते मरीज को निजी केमिस्ट शॉप में जाकर महंगी दर पर दवाई खरीदनी पड़ती है। मेडिकल कॉलेज प्रबंधन सहित स्वास्थ्य विभाग के अन्य अधिकारी भी चिकित्सकों को जन औषधि केंद्र की दवाई लिखने के लिए बाध्य नहीं कर पा रहे हैं। इसका असर गरीब मरीजों की जेब पर पड़ रहा है।
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जन औषधि केंद्र में प्रतिदिन 2500 से 3000 रुपये की दवाई बिकती है। निजी केमिस्ट शॉप में रोजाना 10000 से 15000 रुपये की दवाई बेची जाती है। यही दवाई यदि मरीजों को जन औषधि में मिलेगी तो उनका इलाज सस्ता हो सकता है।
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मेडिकल कॉलेज चंबा में रोजाना 1000 मरीजों की ओपीडी रहती है। ओपीडी में जाने वाले हर मरीज को चिकित्सक चार से पांच दवाइयां इलाज के संबंध में लिखता है। कई बार इवाइयों की संख्या अधिक भी होती है। इस पर्ची में लिखे जाने वाली दवाई जन औषधि केंद्र से संबंधित नहीं होती। इस कारण मरीजों को इलाज करवाने के लिए महंगी दवाई खरीदनी पड़ रही है।

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चिकित्सा अधीक्षक डॉक्टर देवेंद्र कुमार ने बताया कि चिकित्सकों को निर्देश दिए जाएंगे कि वे जन औषधि केंद्र में मिलने वाली दवाइयां मरीजों को लिखें। मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा मुहैया करवाने के लिए प्रबंधन की तरफ से हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं।

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