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कूंर पंचायत में सड़कें बंद, राशन का कोटा खत्म
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अमर उजाला ब्यूरो
चंबा। ग्राम पंचायत कूंर के उपप्रधान ने जिला प्रशासन को विधानसभा शिमला के बाहर भूख हड़ताल करने की चेतावनी दी है। उपप्रधान ने इसको लेकर जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपा है। उनका कहना है कि हाल ही में हुई भारी बारिश और बर्फबारी से कूंर पंचायत में भारी नुकसान हुआ है। मगर नुकसान का जायजा लेने के लिए कोई भी सरकारी कर्मचारी नहीं पहुंचा है। उपप्रधान सुदेश कुमार ने बताया कि कूंर में एक माह से जीपेबल सड़क, बिजली और पानी आपूर्ति बंद पड़ी है। इस कारण इलाके के लोगों को परेशानी उठानी पड़ रही है। तीन महीने से गर्भवती महिलाओं और बच्चों का टीकाकरण नहीं हुआ है। स्वास्थ्य केंद्र पर ताला लटका है। बर्फबारी के कारण स्वास्थ्य केंद्र के साथ वाली दीवार गिर चुकी है। इससे स्वास्थ्य केंद्र भवन को खतरा पैदा हो गया है। मगर स्वास्थ्य विभाग इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहा है। ऐसा लगता है कि स्वास्थ्य विभाग को भवन गिरने से कोई फर्क नहीं पड़ता। जबकि क्षेत्र के हजारों लोग अपनी बीमारी का उपचार करवाने के लिए इसी स्वास्थ्य केंद्र पर निर्भर हैं। उन्होंने कहा कि पंचायत में जगह-जगह भूस्खलन हुआ है। इस कारण करीब 17 परिवारों के मकान क्षतिग्रस्त हुए हैं। इसके अलावा पंचायत में दो दर्जन से अधिक परिवार ऐसे हैं। जिनके घरों में राशन का कोटा खत्म हो चुका है। मगर अभी तक उनकी पंचायत के हालातों का जायजा लेने के लिए कोई भी सरकारी कर्मचारी नहीं पहुंचा है। उन्होंने जिला प्रशासन व सरकार से प्रभावित लोगों को आर्थिक सहायता प्रदान करने की मांग की है।
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चंबा। ग्राम पंचायत कूंर के उपप्रधान ने जिला प्रशासन को विधानसभा शिमला के बाहर भूख हड़ताल करने की चेतावनी दी है। उपप्रधान ने इसको लेकर जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपा है। उनका कहना है कि हाल ही में हुई भारी बारिश और बर्फबारी से कूंर पंचायत में भारी नुकसान हुआ है। मगर नुकसान का जायजा लेने के लिए कोई भी सरकारी कर्मचारी नहीं पहुंचा है। उपप्रधान सुदेश कुमार ने बताया कि कूंर में एक माह से जीपेबल सड़क, बिजली और पानी आपूर्ति बंद पड़ी है। इस कारण इलाके के लोगों को परेशानी उठानी पड़ रही है। तीन महीने से गर्भवती महिलाओं और बच्चों का टीकाकरण नहीं हुआ है। स्वास्थ्य केंद्र पर ताला लटका है। बर्फबारी के कारण स्वास्थ्य केंद्र के साथ वाली दीवार गिर चुकी है। इससे स्वास्थ्य केंद्र भवन को खतरा पैदा हो गया है। मगर स्वास्थ्य विभाग इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहा है। ऐसा लगता है कि स्वास्थ्य विभाग को भवन गिरने से कोई फर्क नहीं पड़ता। जबकि क्षेत्र के हजारों लोग अपनी बीमारी का उपचार करवाने के लिए इसी स्वास्थ्य केंद्र पर निर्भर हैं। उन्होंने कहा कि पंचायत में जगह-जगह भूस्खलन हुआ है। इस कारण करीब 17 परिवारों के मकान क्षतिग्रस्त हुए हैं। इसके अलावा पंचायत में दो दर्जन से अधिक परिवार ऐसे हैं। जिनके घरों में राशन का कोटा खत्म हो चुका है। मगर अभी तक उनकी पंचायत के हालातों का जायजा लेने के लिए कोई भी सरकारी कर्मचारी नहीं पहुंचा है। उन्होंने जिला प्रशासन व सरकार से प्रभावित लोगों को आर्थिक सहायता प्रदान करने की मांग की है।