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पंचायत शिक्षा प्रेरकों को एक वर्ष से नहीं मिला वेतन, परेशानी
Updated Thu, 07 Dec 2017 11:26 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
चंबा। पंचायत शिक्षा प्रेरकों को एक वर्ष से मानदेय नहीं मिला है। इसके चलते प्रेरक संघ ने वीरवार को उपायुुक्त चंबा सुदेश मोख्टा को एक ज्ञापन सौंपा। संघ ने प्रधान आयुब खान ने बताया कि प्रेरक एक वर्ष से अपने मानदेय का इंतजार कर रहे हैं। मानदेय नहीं मिलने से उन्हें परिवार का पालन पोषण करने में परेशानी हो रही है। प्रेरकों को बच्चों के भविष्य की चिंता सता रही है। उन्होंने कहा कि प्रेरक पूरी ईमानदारी के साथ पंचायतों में खुले लोक मित्र केंद्रों पर सेवाएं दे रहे हैं। मगर कार्य करने के बावजूद उन्हें एक वर्ष से मानदेय नहीं मिला है। प्रेरकों को मजदूरों से भी कम दिहाड़ी (66) रुपये दी जा रही है। प्रेरकों के जैसे ही पढ़े-लिखे शिक्षकों को 50 हजार रुपये तक वेतन मिल रहा है। उनका कहना है कि अध्यापक बच्चों को पढ़ाते हैं, जबकि प्रेरक बुजुर्गों को पढ़ाने का काम कर रही हैं। यही नहीं प्रेरक सरकार की सभी योजनाएं भी लोगों तक घर-घर जाकर पहुंचाते हैं। ऐसे में उनके साथ इस प्रकार का भेदभाव किया जा रहा है। प्रेरकों ने गुहार लगाई है कि उनके लिए राज्य स्तर पर ठोस नीति बनाई जाए और लोक शिक्षा केंद्र कार्यालय खर्च भी हर माह दिया जाए। प्रेरकों ने कहा कि उन्हें मानदेय भी नहीं दिया है, ऐसे में उन्हें परिवार का भरण-पोषण करने में काफी दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है। सरकार व प्रशासन को यह सोचना चाहिए कि बिना पैसे के वे अपने परिवार का खर्चा कैसे चलाएंगे। प्रेरकों ने जिला प्रशासन व प्रदेश में बनने वाली नई सरकार से मांग की है कि उन्हें जल्द से जल्द मानदेय दिया जाए। साथ ही प्रेरकों के लिए ठोस नीति भी बनाई जाए।
चंबा। पंचायत शिक्षा प्रेरकों को एक वर्ष से मानदेय नहीं मिला है। इसके चलते प्रेरक संघ ने वीरवार को उपायुुक्त चंबा सुदेश मोख्टा को एक ज्ञापन सौंपा। संघ ने प्रधान आयुब खान ने बताया कि प्रेरक एक वर्ष से अपने मानदेय का इंतजार कर रहे हैं। मानदेय नहीं मिलने से उन्हें परिवार का पालन पोषण करने में परेशानी हो रही है। प्रेरकों को बच्चों के भविष्य की चिंता सता रही है। उन्होंने कहा कि प्रेरक पूरी ईमानदारी के साथ पंचायतों में खुले लोक मित्र केंद्रों पर सेवाएं दे रहे हैं। मगर कार्य करने के बावजूद उन्हें एक वर्ष से मानदेय नहीं मिला है। प्रेरकों को मजदूरों से भी कम दिहाड़ी (66) रुपये दी जा रही है। प्रेरकों के जैसे ही पढ़े-लिखे शिक्षकों को 50 हजार रुपये तक वेतन मिल रहा है। उनका कहना है कि अध्यापक बच्चों को पढ़ाते हैं, जबकि प्रेरक बुजुर्गों को पढ़ाने का काम कर रही हैं। यही नहीं प्रेरक सरकार की सभी योजनाएं भी लोगों तक घर-घर जाकर पहुंचाते हैं। ऐसे में उनके साथ इस प्रकार का भेदभाव किया जा रहा है। प्रेरकों ने गुहार लगाई है कि उनके लिए राज्य स्तर पर ठोस नीति बनाई जाए और लोक शिक्षा केंद्र कार्यालय खर्च भी हर माह दिया जाए। प्रेरकों ने कहा कि उन्हें मानदेय भी नहीं दिया है, ऐसे में उन्हें परिवार का भरण-पोषण करने में काफी दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है। सरकार व प्रशासन को यह सोचना चाहिए कि बिना पैसे के वे अपने परिवार का खर्चा कैसे चलाएंगे। प्रेरकों ने जिला प्रशासन व प्रदेश में बनने वाली नई सरकार से मांग की है कि उन्हें जल्द से जल्द मानदेय दिया जाए। साथ ही प्रेरकों के लिए ठोस नीति भी बनाई जाए।