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व्यापारिक मेले का कारोबारियों ने किया विरोध
Updated Wed, 20 Dec 2017 10:49 PM IST
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protest
- फोटो : DEMO PHOTO
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अमर उजाला ब्यूरो
चंबा। सुल्तानपुर में लगे रहे व्यापारिक मेले का चंबा व्यापार मंडल ने कड़ा विरोध किया है। इसको लेकर व्यापार मंडल ने बुधवार को उपायुक्त सुदेश मोख्टा को ज्ञापन सौंपा। व्यापार मंडल के प्रधान वीरेंद्र महाजन ने बताया कि चंबा में हाल ही में एक व्यापारिक मेला खत्म हुआ है। 15 दिनों तक चले इस मेले के दौरान स्थानीय व्यापारियों को काफी नुकसान उठाना पड़ा है। ऐसे में दोबारा व्यापारिक मेला होने से स्थानीय व्यापारियों के भूखा मरने की नौबत आ जाएगी, क्योंकि लोग बाजार में सामान खरीदने की बजाए मेले में सामान खरीदने जाएंगे। उन्होंने कहा कि मेले में बाजार से महंगा सामान बेचा जाता है। हालांकि सस्ता सामान बेचने को लेकर मेला आयोजन काफी प्रसार करते हैं। प्रसार के बहकावे में आकर जाने अनजाने में सस्ते की बजाए महंगा सामान खरीद लेते हैं। उन्होंने कहा कि चंबा में मिंजर और दशहरे के दौरान मेला लगता है। इन मेलों में बाहरी राज्यों के व्यापारी भी आते हैं। ये मेले पारंपरिक है। इसलिए इन मेलों में होने वाली व्यापारिक गतिविधियों को व्यापार मंडल ने कभी विरोध नहीं किया। मगर अब कुछ लोग मुनाफा कमाने के लिए व्यापारिक मेलों का दौर शुरू कर रहे हैं। हर माह व्यापारिक मेला लगाने की साजिश की जा रही है। ऐसा होने पर स्थानीय व्यापारियों का रोजगार खत्म हो जाएगा। उन्होंने उपायुक्त से मांग करते हुए कहा कि चंबा में मिंजर को छोड़ अन्य व्यापारिक मेलों के आयोजन पर रोक लगाई जाए। ताकि स्थानीय व्यापारियों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना नहीं करना पड़े।
व्यापारिक मेला नहीं लगाने का दिया आश्वासन
उपायुक्त सुदेश मोख्टा ने बताया कि व्यापार मंडल का एक प्रतिनिधिमंडल उनसे मिला है। उन्होंने व्यापार मंडल को आश्वासन दिया है कि चंबा में व्यापारिक मेलों को प्रशासन की ओर से एनओसी नहीं दी जाएगी।
चंबा। सुल्तानपुर में लगे रहे व्यापारिक मेले का चंबा व्यापार मंडल ने कड़ा विरोध किया है। इसको लेकर व्यापार मंडल ने बुधवार को उपायुक्त सुदेश मोख्टा को ज्ञापन सौंपा। व्यापार मंडल के प्रधान वीरेंद्र महाजन ने बताया कि चंबा में हाल ही में एक व्यापारिक मेला खत्म हुआ है। 15 दिनों तक चले इस मेले के दौरान स्थानीय व्यापारियों को काफी नुकसान उठाना पड़ा है। ऐसे में दोबारा व्यापारिक मेला होने से स्थानीय व्यापारियों के भूखा मरने की नौबत आ जाएगी, क्योंकि लोग बाजार में सामान खरीदने की बजाए मेले में सामान खरीदने जाएंगे। उन्होंने कहा कि मेले में बाजार से महंगा सामान बेचा जाता है। हालांकि सस्ता सामान बेचने को लेकर मेला आयोजन काफी प्रसार करते हैं। प्रसार के बहकावे में आकर जाने अनजाने में सस्ते की बजाए महंगा सामान खरीद लेते हैं। उन्होंने कहा कि चंबा में मिंजर और दशहरे के दौरान मेला लगता है। इन मेलों में बाहरी राज्यों के व्यापारी भी आते हैं। ये मेले पारंपरिक है। इसलिए इन मेलों में होने वाली व्यापारिक गतिविधियों को व्यापार मंडल ने कभी विरोध नहीं किया। मगर अब कुछ लोग मुनाफा कमाने के लिए व्यापारिक मेलों का दौर शुरू कर रहे हैं। हर माह व्यापारिक मेला लगाने की साजिश की जा रही है। ऐसा होने पर स्थानीय व्यापारियों का रोजगार खत्म हो जाएगा। उन्होंने उपायुक्त से मांग करते हुए कहा कि चंबा में मिंजर को छोड़ अन्य व्यापारिक मेलों के आयोजन पर रोक लगाई जाए। ताकि स्थानीय व्यापारियों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना नहीं करना पड़े।
व्यापारिक मेला नहीं लगाने का दिया आश्वासन
उपायुक्त सुदेश मोख्टा ने बताया कि व्यापार मंडल का एक प्रतिनिधिमंडल उनसे मिला है। उन्होंने व्यापार मंडल को आश्वासन दिया है कि चंबा में व्यापारिक मेलों को प्रशासन की ओर से एनओसी नहीं दी जाएगी।
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