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पुरूर्षो के साथ कंधे से कंधा मिला खड़ी महिलाएं भी हो अपने अधिकारों बारे जागरूक

Sun, 09 Dec 2018 10:07 PM IST
Updated Sun, 09 Dec 2018 10:07 PM IST
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पुरूर्षो के साथ कंधे से कंधा मिला खड़ी महिलाएं भी हो अपने अधिकारों बारे जागरूक
अमर उजाला ब्यूरो
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चंबा। औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (गर्र्ल्स) चंबा में रविवार को अमर उजाला का अपराजिता 100 मिलियन स्माइल कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बतौर मुख्यातिथि मौजूद औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान के प्रधानाचार्य विपिन शर्मा ने कहा कि आज के समय में जहां महिलाएं हर क्षेत्र में पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिला कर खड़ी हैं। ऐसे में महिलाओं की भी जिम्मेवारी बनती है कि वे अपने अधिकारों के बारे में भली-भांति परिचित हों। साथ ही अपने पांव पर खड़ी होकर वे अपना और अपने परिवारों का पालन-पोषण करने के लिए आगे बढ़ें। महिलाओं के उत्थान के लिए ही औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान चंबा में जिला बाल विकास परियोजना द्वारा सिलाई-कढ़ाई का प्रशिक्षण प्रदान करवाया जा रहा है। सिलाई-कढ़ाई प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य महिलाओं को स्वावलंबी बनाना है। सिलाई-कढ़ाई के प्रशिक्षण में अनुदेशक द्वारा महिलाओं को सीएंडटी बारे बारीकी से प्रशिक्षण प्रदान करवाया जा रहा है।
जिला बाल सरंक्षण अधिकारी पीके गुप्ता ने कहा कि जिसे कोई भी पराजित नहीं कर सकता उसका तात्पर्य अपराजिता होता है, लेकिन महिलाएं अपने आप को असहाय, निर्बल समझ लेती हैं। यहीं से उनका पतन होना आरंभ हो जाता है। कहा कि महिलाओं को अपने आप को भी किसी से कम नहीं आंकना चाहिए। गुप्ता ने कहा कि हमारी संस्कृति मातृ देवों भव: की रही है। सबसे पहले माता का स्थान आता है, उसके बाद पिता और उसके भी बाद फिर गुरू का स्थान आता है। कहा कि आज के समय में महिलाओं के बिना समाज की कल्पना भी नहीं की जा सकती है। गुप्ता ने कहा कि माताएं नौ माह बच्चे को अपनी कोख में रखती है। माता का ऋण कभी चुकता नहीं किया जा सकता है। माताएं अनेकों कष्ट सह कर बच्चे को अपनी कोख में रखने के बाद जन्म देती हैं। ऐसे में माताएं ही बच्चे की पहली शिक्षक होती हैं। माताएं अपने बच्चों को अच्छे संस्कार देती हैं। इसके विपरीत पिता का अधिकांश समय घर से बाहर ही व्यतीत होता है। माता घर में रहते हुए बच्चे की देख-रेख करती है उसका पालन-पोषण करती हैं। माताएं ही अपने बच्चे में संस्कारों का विकास करती हैं। गुप्ता ने कहा कि बच्चा जब 17-18 वर्ष का होता है तो माताओं का विशेष अधिकार बनता है कि वे उस पर नजर रखे।
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‘खुद को कर बुलंद इतना कि खुदा बंदे से आकर पूछे बता तेरी रज्जा क्या है’ आईटीआई चंबा के प्रधानाचार्य राहुल राठौर ने इन पंक्तियों के साथ अपने संबोधन की शुरुआत करते हुए कहा कि सरकार और विभागों की ओर से अपने स्तर पर कई योजनाएं चलाई गई हैं, लेकिन, इन योजनाओं का लाभ लोगों को भरपूर मिल रहा है या नहीं ये लोगों पर भी निर्भर करता है। विभागीय योजनाओं के तहत प्रशिक्षण लेने वाले या ट्रेनिंग देने वालों का कार्य प्रशिक्षण देने के बाद खत्म हो जाता है। लेकिन, प्रशिक्षणार्थी का यह कर्त्तव्य बनता है कि भविष्य में वे उस प्रशिक्षण का आगे बढ़ने के किस प्रकार से प्रयोग करता है। उपस्थित महिलाओं को आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहन देते हुए राहुल राठौर ‘तेरे सपनों की उड़ान अभी बाकि है, तेरी उम्मीदों का इम्हान अभी बाकी है,अभी तो नापी है मुट्ठी भर जमीन, अभी तो पूरा आसमान बाकी है’ की पंक्तियां सुनाई।
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जिला बाल संरक्षण इकाई के अध्यक्ष एंव अधिवक्ता अरुण शर्मा ने उपस्थित महिलाओं को जेजे एक्ट और बाल विवाह बारे विस्तार से जानकारी देते हुए कहा कि आज भी माता-पिता नाबालिग उम्र में ही बच्चों की शादियां कर देते हैं। जिसका परिणाम उनके पूरे जीवन पर पड़ता है। कहा कि यदि किसी के भी आस-पास नाबालिगों की शादी-समारोह की तैयारी चल रही है। तो इस संदर्भ में वे 1098 पर सूचना दे सकते हैं। सूचना देने वाले का नाम गुप्त रखा जाएगा।
एएसआई चंद्र हंस ने कार्यक्रम में उपस्थित महिलाओं को यातायात नियमों बारे विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि डबल हेल्मेट जरूरी करने का मुख्य लक्ष्य लोगों की अनमोल जिंदगियों को बचाना है।
लक्षित हस्तक्षेप कार्यक्रम चंबा ओशन एनजीओ के संस्थापक प्रदीप आजाद ने बताया कि ओशन संस्था ने प्रदेश राज्य एड्स नियंत्रण सोसाइटी के तत्वाधान में कार्य कर रही है। कहा कि आज के समय में महिलाओं को भी अपने अधिकारों और कर्त्तव्यों बारे जागरूक रहना चाहिए।
सिलाई-कढ़ाई अनुदेशक उषमा देवी ने महिलाओं को प्रदान किए जा रहे सिलाई-कढ़ाई प्रशिक्षण बारे विस्तार से जानकारी दी। साथ ही प्रशिक्षण हासिल करने के बाद आगामी भविष्य में इसे अपने रोजगार के तौर पर प्रयोग करने की भी बात कही।
ड्राफ्समेन अनुदेशक दिनेश जम्वाल ने कहा कि महिलाओं का दर्जा देव पुराणों में भी सर्वोपरि दिया गया है। ऐसे में महिलाएं जब तक अपने आप में परिपक नहीं होती तब तक अपराजिता शब्द भी सही मायनों में कामयाब नहीं हो सकता है। महिलाओं को सरकार द्वारा चलाई जाने वाली योजनाओं का भरपूर लाभ उठा कर अपने पांव पर खडे होना चाहिए।

कार्यक्रम के पश्चात लक्षित हस्तक्षेप कार्यक्रम चंबा ओशन एनजीओ और प्रदेश राज्य एड्स नियंत्रण सोसाइटी के तत्वाधान में महिला स्वास्थ्य जांच शिविर का आयोजन किया गया। इस दौरान चिकित्सक संदीप महाजन द्वारा 46 महिलाओं के स्वास्थ्य जांच कर उन्हें निशुल्क दवाइंयां प्रदान की गई।
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