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सिविल अस्पताल भरमौर में विशेषज्ञों के पद खाली, मरीज परेशान
Updated Thu, 14 Dec 2017 10:15 PM IST
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- फोटो : demo pic
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अमर उजाला ब्यूूूरो
भरमौर (चंबा)। स्वास्थ्य मुख्य सचिव प्रबोध सक्सेना ने वीरवार को सिविल अस्पताल भरमौर का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने अस्पताल में उपचाराधीन मरीजों की समस्याएं जानी। साथ ही अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टरों के खाली पदों की जानकारी भी हासिल की। बीएमओ भरमौर डॉ. अश्वनी कुमार ने स्वास्थ्य मुख्य सचिव को सिविल अस्पताल भरमौर में चल रहे डॉक्टरों के खाली पदों से अवगत करवाया। उन्होंने बताया कि सिविल अस्पताल में चार विशेषज्ञों के पद स्वीकृत हैं। इसमें हड्डी, गायनी, शिशु और एमडी विशेषज्ञ के नाम शामिल हैं। मगर इनमें से एक भी विशेषज्ञ अस्पताल में नहीं है। इस वजह से सबसे ज्यादा परेशानी गर्भवती महिलाओं के उपचार में आती है। अस्पताल में स्त्री रोग विशेषज्ञ नहीं होने के चलते गर्भवती महिलाओं को चंबा रैफर करना पड़ता है। ऐसे में भरमौर अस्पताल में स्त्री रोग विशेषज्ञ की तैनाती होना जरूरी है। उन्होंने कहा कि भरमौर में गर्भवती महिलाओं सहित अन्य मरीजों के अल्ट्रासाउंड नहीं हो रहे हैं। अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट नहीं है। इसके अलावा बर्फबारी होने पर पुुराने बस स्टैंड से लेकर अस्पताल तक मरीजों को एंबुलेंस सुविधा नहीं मिल पाती। सड़क पर बर्फ से फिसलन हो जाती है। इन समस्याओं को सुनने के बाद स्वास्थ्य मुख्य सचिव प्रबोध सक्सेना ने बीएमओ को आश्वासन दिया कि आचार संहिता हटने के बाद भरमौर में डॉक्टरों की कमी को पूरा किया जाएगा। इस मौके पर मेडिकल कॉलेज प्राचार्य डॉ. अनिल ओहरी, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ वाईडी शर्मा सहित अन्य स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी मौजूद रहे।
भरमौर (चंबा)। स्वास्थ्य मुख्य सचिव प्रबोध सक्सेना ने वीरवार को सिविल अस्पताल भरमौर का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने अस्पताल में उपचाराधीन मरीजों की समस्याएं जानी। साथ ही अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टरों के खाली पदों की जानकारी भी हासिल की। बीएमओ भरमौर डॉ. अश्वनी कुमार ने स्वास्थ्य मुख्य सचिव को सिविल अस्पताल भरमौर में चल रहे डॉक्टरों के खाली पदों से अवगत करवाया। उन्होंने बताया कि सिविल अस्पताल में चार विशेषज्ञों के पद स्वीकृत हैं। इसमें हड्डी, गायनी, शिशु और एमडी विशेषज्ञ के नाम शामिल हैं। मगर इनमें से एक भी विशेषज्ञ अस्पताल में नहीं है। इस वजह से सबसे ज्यादा परेशानी गर्भवती महिलाओं के उपचार में आती है। अस्पताल में स्त्री रोग विशेषज्ञ नहीं होने के चलते गर्भवती महिलाओं को चंबा रैफर करना पड़ता है। ऐसे में भरमौर अस्पताल में स्त्री रोग विशेषज्ञ की तैनाती होना जरूरी है। उन्होंने कहा कि भरमौर में गर्भवती महिलाओं सहित अन्य मरीजों के अल्ट्रासाउंड नहीं हो रहे हैं। अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट नहीं है। इसके अलावा बर्फबारी होने पर पुुराने बस स्टैंड से लेकर अस्पताल तक मरीजों को एंबुलेंस सुविधा नहीं मिल पाती। सड़क पर बर्फ से फिसलन हो जाती है। इन समस्याओं को सुनने के बाद स्वास्थ्य मुख्य सचिव प्रबोध सक्सेना ने बीएमओ को आश्वासन दिया कि आचार संहिता हटने के बाद भरमौर में डॉक्टरों की कमी को पूरा किया जाएगा। इस मौके पर मेडिकल कॉलेज प्राचार्य डॉ. अनिल ओहरी, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ वाईडी शर्मा सहित अन्य स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी मौजूद रहे।