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लोकसभा चुनाव में चंबा तक रेल लाईन बनाने का गर्माएगा मुद्दा
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लोकसभा चुनाव में चंबा तक रेल लाइन बनाने का गर्माएगा मुद्दा
रेल लाइन बिछने से एक घंटे में तय होगा पठानकोट का सफर
जिला में पंजाब से ही आती हैं रोजमर्रा की जरूरी वस्तुएं
सुरक्षा और औद्योगिक दृष्टि से चंबा के लिए आवश्यक है रेल लाइन
सामाजिक संगठन रेल लाइन बनाने को लेकर केंद्र सरकार को भेज चुके हैं पत्र
अमर उजाला ब्यूरो
चंबा। लोकसभा चुनाव में चंबा को रेल लाइन से जोड़ने का मुद्दा भी गर्माएगा। क्योंकि चंबा वासी लंबे समय से जिला को रेल लाइन से जोड़ने की मांग कर रहे हैं। इसको लेकर चंबा जनहित संगठन कई बार केंद्र व प्रदेश सरकार को पत्र भी लिख चुका है। लेकिन अभी तक इस दिशा में सरकार की ओर से कोई प्रयास नहीं किए गए हैं। केंद्र सरकार ने हाल ही में पठानकोट से लेह तक रेल लाइन को स्वीकृति दी है। यह रेल लाइन अगर वाया चंबा होकर बनाई जाती है तो सरकार को रेल लाइन पर कम पैसे खर्च करने पड़ेंगे, क्योंकि चंबा से लेह की दूरी कम पड़ेगी। इस रेल लाइन को जिला के साथ सेना को भी फायदा मिलेगा।
चंबा जिला के डलहौजी व बकलोह को रेल लाइन से जोड़ने की मांग रियासत काल से हो रही है। इसको लेकर कई बार योजनाएं भी बनी लेकिन इन योजनाओं को कभी सिरे नहीं चढ़ाया गया। अंग्रेजों के समय में बकलोह व डलहौजी में छावनी बनी है। जो आज भी रेल लाइन से अछूती है। हालांकि प्रदेश के अन्य जिलों में जहां पर भी अंग्रेजों द्वारा छावनी बनाई गई थी। उन छावनियों को रेल लाइन से जोड़ दिया था। चंबा से पठानकोट की दूरी करीब 120 किमी है। जिसको वाहनों के जरिए तय करने में करीब साढ़े तीन घंटे का समय लगता है। अगर चंबा तक रेल लाइन पहुंच जाती है, तो यही दूरी एक घंटे में तय की जा सकेगी। चंबा जिला में रोज मर्रा की सभी वस्तुएं जैसे सब्जी, दूध, दहीं, पनीर, मिठाई, कपड़े, जूते सहित अन्य उत्पाद पंजाब से ही आते हैं। ऐसे में चंबा के लिए रेल लाईन काफी फायदेमंद साबित होगी। इसलिए चंबा वासी लोकसभा चुनाव में रेल लाइन का मुद्दा जोर शोर से उठाएंगे। ऐसे में राजनितिक पार्टियों को वोट लेने के लिए रेल लाइन पर अपनी प्रतिक्रिया देनी ही होगी।
इनसेट
चंबा जनहित संगठन के संयोजक शादी लाल शर्मा ने बताया कि चंबा को रेल लाइन से जोड़ने के लिए उनका संगठन लंबे समय से प्रयास कर रहा है। इसके लिए उन्होंने कई बार केंद्र व प्रदेश सरकार को पत्र भी भेजे हैं। चंबा जिला के लिए रेल लाइन सुरक्षा व औद्योगिक दृष्टि से काफी फायदेमंद है। इसलिए सरकार को इसमें गंभीरता दिखाना काफी आवश्यक है।
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रेल लाइन बिछने से एक घंटे में तय होगा पठानकोट का सफर
जिला में पंजाब से ही आती हैं रोजमर्रा की जरूरी वस्तुएं
सुरक्षा और औद्योगिक दृष्टि से चंबा के लिए आवश्यक है रेल लाइन
सामाजिक संगठन रेल लाइन बनाने को लेकर केंद्र सरकार को भेज चुके हैं पत्र
अमर उजाला ब्यूरो
चंबा। लोकसभा चुनाव में चंबा को रेल लाइन से जोड़ने का मुद्दा भी गर्माएगा। क्योंकि चंबा वासी लंबे समय से जिला को रेल लाइन से जोड़ने की मांग कर रहे हैं। इसको लेकर चंबा जनहित संगठन कई बार केंद्र व प्रदेश सरकार को पत्र भी लिख चुका है। लेकिन अभी तक इस दिशा में सरकार की ओर से कोई प्रयास नहीं किए गए हैं। केंद्र सरकार ने हाल ही में पठानकोट से लेह तक रेल लाइन को स्वीकृति दी है। यह रेल लाइन अगर वाया चंबा होकर बनाई जाती है तो सरकार को रेल लाइन पर कम पैसे खर्च करने पड़ेंगे, क्योंकि चंबा से लेह की दूरी कम पड़ेगी। इस रेल लाइन को जिला के साथ सेना को भी फायदा मिलेगा।
चंबा जिला के डलहौजी व बकलोह को रेल लाइन से जोड़ने की मांग रियासत काल से हो रही है। इसको लेकर कई बार योजनाएं भी बनी लेकिन इन योजनाओं को कभी सिरे नहीं चढ़ाया गया। अंग्रेजों के समय में बकलोह व डलहौजी में छावनी बनी है। जो आज भी रेल लाइन से अछूती है। हालांकि प्रदेश के अन्य जिलों में जहां पर भी अंग्रेजों द्वारा छावनी बनाई गई थी। उन छावनियों को रेल लाइन से जोड़ दिया था। चंबा से पठानकोट की दूरी करीब 120 किमी है। जिसको वाहनों के जरिए तय करने में करीब साढ़े तीन घंटे का समय लगता है। अगर चंबा तक रेल लाइन पहुंच जाती है, तो यही दूरी एक घंटे में तय की जा सकेगी। चंबा जिला में रोज मर्रा की सभी वस्तुएं जैसे सब्जी, दूध, दहीं, पनीर, मिठाई, कपड़े, जूते सहित अन्य उत्पाद पंजाब से ही आते हैं। ऐसे में चंबा के लिए रेल लाईन काफी फायदेमंद साबित होगी। इसलिए चंबा वासी लोकसभा चुनाव में रेल लाइन का मुद्दा जोर शोर से उठाएंगे। ऐसे में राजनितिक पार्टियों को वोट लेने के लिए रेल लाइन पर अपनी प्रतिक्रिया देनी ही होगी।
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चंबा जनहित संगठन के संयोजक शादी लाल शर्मा ने बताया कि चंबा को रेल लाइन से जोड़ने के लिए उनका संगठन लंबे समय से प्रयास कर रहा है। इसके लिए उन्होंने कई बार केंद्र व प्रदेश सरकार को पत्र भी भेजे हैं। चंबा जिला के लिए रेल लाइन सुरक्षा व औद्योगिक दृष्टि से काफी फायदेमंद है। इसलिए सरकार को इसमें गंभीरता दिखाना काफी आवश्यक है।
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