{"_id":"652196ab1c83cb95850db809","slug":"120-lakh-people-made-abha-cards-in-chamba-chamba-news-c-88-1-ssml1006-9265-2023-10-07","type":"story","status":"publish","title_hn":"Chamba News: चंबा में 1.20 लाख लोगों ने बनाए आभा कार्ड","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Chamba News: चंबा में 1.20 लाख लोगों ने बनाए आभा कार्ड
Sat, 07 Oct 2023 11:04 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
Updated Sat, 07 Oct 2023 11:04 PM IST
विज्ञापन
चंबा। स्वास्थ्य विभाग ने जिले में आभा कार्ड बनाने का अभियान तेज कर दिया है। अभी तक विभाग की टीमें 1.20 लाख लोगों के आभा कार्ड बना चुकी हैं।
कार्ड बनाने के लिए आशा वर्कर रोजाना लोगों के घर जा रही हैं। आभा कार्ड एक ऐसी यूनिक आईडी होगी, जिसमें मरीज की पुरानी से पुरानी बीमारी के इलाज का रिकॉर्ड दर्ज होगा। इसे कोई भी विशेषज्ञ किसी भी स्वास्थ्य संस्थान में देखकर मरीज का इलाज कर पाएगा। मरीज को बार-बार पर्ची बनाने से भी निजात मिलेगी। आभा कार्ड की आईडी बताने पर कंप्यूटर पर उसकी बीमारी का सारा डाटा निकल आएगा। मरीज पहले से कौन सी दवाई खा रहा है। उसके कौन से टेस्ट हो चुके हैं, इसकी भी पूरी जानकारी कार्ड में दर्ज होगी।
जब भी चंबा से किसी मरीज को शिमला, टांडा या पीजीआई रेफर किया जाता था तो उसे वहां दोबारा पर्ची बनानी पड़ती थी, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। मरीज इन स्वास्थ्य संस्थानों में जाकर आभा कार्ड की आईडी विशेषज्ञ को बताएगा। उसके बाद विशेषज्ञ उस आईडी से मरीज की बीमारी का सारा डाटा निकाल लेगा। उसी आधार पर मरीज की बीमारी का इलाज शुरू होगा। भविष्य में आभा कार्ड मरीजों के लिए वरदान साबित होगा। साथ में पर्ची बनाने के लिए धक्का-मुक्की से भी मरीजों को निजात मिलेगी। जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. जालम सिंह ने बताया कि आभा कार्ड बनाने के लिए आशा वर्कर रोजाना लोगों के घरों में जा रही हैं। अब तक एक लाख से अधिक लोगों के कार्ड बन चुके हैं।
--
विज्ञापन
कार्ड बनाने के लिए आशा वर्कर रोजाना लोगों के घर जा रही हैं। आभा कार्ड एक ऐसी यूनिक आईडी होगी, जिसमें मरीज की पुरानी से पुरानी बीमारी के इलाज का रिकॉर्ड दर्ज होगा। इसे कोई भी विशेषज्ञ किसी भी स्वास्थ्य संस्थान में देखकर मरीज का इलाज कर पाएगा। मरीज को बार-बार पर्ची बनाने से भी निजात मिलेगी। आभा कार्ड की आईडी बताने पर कंप्यूटर पर उसकी बीमारी का सारा डाटा निकल आएगा। मरीज पहले से कौन सी दवाई खा रहा है। उसके कौन से टेस्ट हो चुके हैं, इसकी भी पूरी जानकारी कार्ड में दर्ज होगी।
जब भी चंबा से किसी मरीज को शिमला, टांडा या पीजीआई रेफर किया जाता था तो उसे वहां दोबारा पर्ची बनानी पड़ती थी, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। मरीज इन स्वास्थ्य संस्थानों में जाकर आभा कार्ड की आईडी विशेषज्ञ को बताएगा। उसके बाद विशेषज्ञ उस आईडी से मरीज की बीमारी का सारा डाटा निकाल लेगा। उसी आधार पर मरीज की बीमारी का इलाज शुरू होगा। भविष्य में आभा कार्ड मरीजों के लिए वरदान साबित होगा। साथ में पर्ची बनाने के लिए धक्का-मुक्की से भी मरीजों को निजात मिलेगी। जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. जालम सिंह ने बताया कि आभा कार्ड बनाने के लिए आशा वर्कर रोजाना लोगों के घरों में जा रही हैं। अब तक एक लाख से अधिक लोगों के कार्ड बन चुके हैं।
विज्ञापन