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मंजीर के आधा दर्जन गांवों की 600 की आबादी सड़क से कोसों दूर
Updated Mon, 09 Jul 2018 10:44 PM IST
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मंजीर के आधा दर्जन गांवों आज भी सड़क से कोसों दूर
मरीज को पालकी से उठाकर पहुंचाना पड़ता है अस्पताल, विकास कार्य पड़े ठप
ग्रामीणों ने कहा, मांग के बावजूद आज तक नहीं बन पाई सड़क
सरदारो बेगम
सुरंगानी (चंबा)। ग्राम पंचायत मंजीर के अधीन आने वाले आधा दर्जन गांवों की आबादी सड़क सुविधा से कोसो दूर हैं। इन गांवों में अगर कोई बीमार पड़ जाता है, तो उसे मीलों पालकी या पीठ पर उठाकर मुख्य मार्ग तक पहुंचाना पड़ता है। ऐसे में कई बार तो मरीज अस्पताल पहुंचने से पहले ही दम तोड़ देते हैं। ग्रामीणों की मानें तो वह कई बार सरकार और संबंधित विभाग से गांवों को सड़क से जोड़ने की मांग करते आ रहे हैं। बावजूद इसके अभी तक सड़क सुविधा मुहैया नहीं करवाई जा सकी है। सड़क सुविधा के अभाव में ग्रामीण रोजमर्रा की वस्तुओं को पीठ पर उठाकर ले जाने को मजबूर हैं। ग्रामीण अनीस शेख, कमरदीन, सैफ अली, तुफैल मोहम्मद, जेबो देवी, सलीम, नरोतम, होशियार सिंह और मोहम्मद यूसुफ का कहना है कि घोड़ी, नातोड़, सुखरेठी, गुबरेड़, भतोग और मंजीर गांवों की लगभग छह सौ से अधिक आबादी आज भी सड़क सुविधा से नहीं जुड़ पाई है। ग्रामीणों की सड़क सुविधा से जोड़ने की मांग पर कोई सकारात्मक कार्रवाई नहीं हो पा रही है। उन्होंने बताया कि सड़क सुविधा न होने से इलाका विकास की दौड़ में भी पिछड़ता जा रहा है। उन्होंने कहा कि वे कई मर्तबा इन गांवों को सड़क सुविधा से जोड़ने की मांग विभिन्न मंचों के माध्यम से उठा चुके हैं। मगर आज तक सड़क का निर्माण नहीं हो पाया है। उन्होंने सरकार से जल्द गांवों को सड़क सुविधा से जोड़कर राहत प्रदान करने की गुहार लगाई है।
इनसेट
वन विभाग के डीएफओ कमल भारती का कहना है कि जल्द ही दो-चार दिन में पेड़ों की मार्किंग की जाएगी, उसके बाद कारपोरेशन पेड़ों की कटिंग शुरू कर देगी। इसके बाद सड़क निर्माण का कार्य भी आरंभ किया जा सकता है।
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मरीज को पालकी से उठाकर पहुंचाना पड़ता है अस्पताल, विकास कार्य पड़े ठप
ग्रामीणों ने कहा, मांग के बावजूद आज तक नहीं बन पाई सड़क
सरदारो बेगम
सुरंगानी (चंबा)। ग्राम पंचायत मंजीर के अधीन आने वाले आधा दर्जन गांवों की आबादी सड़क सुविधा से कोसो दूर हैं। इन गांवों में अगर कोई बीमार पड़ जाता है, तो उसे मीलों पालकी या पीठ पर उठाकर मुख्य मार्ग तक पहुंचाना पड़ता है। ऐसे में कई बार तो मरीज अस्पताल पहुंचने से पहले ही दम तोड़ देते हैं। ग्रामीणों की मानें तो वह कई बार सरकार और संबंधित विभाग से गांवों को सड़क से जोड़ने की मांग करते आ रहे हैं। बावजूद इसके अभी तक सड़क सुविधा मुहैया नहीं करवाई जा सकी है। सड़क सुविधा के अभाव में ग्रामीण रोजमर्रा की वस्तुओं को पीठ पर उठाकर ले जाने को मजबूर हैं। ग्रामीण अनीस शेख, कमरदीन, सैफ अली, तुफैल मोहम्मद, जेबो देवी, सलीम, नरोतम, होशियार सिंह और मोहम्मद यूसुफ का कहना है कि घोड़ी, नातोड़, सुखरेठी, गुबरेड़, भतोग और मंजीर गांवों की लगभग छह सौ से अधिक आबादी आज भी सड़क सुविधा से नहीं जुड़ पाई है। ग्रामीणों की सड़क सुविधा से जोड़ने की मांग पर कोई सकारात्मक कार्रवाई नहीं हो पा रही है। उन्होंने बताया कि सड़क सुविधा न होने से इलाका विकास की दौड़ में भी पिछड़ता जा रहा है। उन्होंने कहा कि वे कई मर्तबा इन गांवों को सड़क सुविधा से जोड़ने की मांग विभिन्न मंचों के माध्यम से उठा चुके हैं। मगर आज तक सड़क का निर्माण नहीं हो पाया है। उन्होंने सरकार से जल्द गांवों को सड़क सुविधा से जोड़कर राहत प्रदान करने की गुहार लगाई है।
इनसेट
वन विभाग के डीएफओ कमल भारती का कहना है कि जल्द ही दो-चार दिन में पेड़ों की मार्किंग की जाएगी, उसके बाद कारपोरेशन पेड़ों की कटिंग शुरू कर देगी। इसके बाद सड़क निर्माण का कार्य भी आरंभ किया जा सकता है।
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