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मरीज को दस किमी पालकी पर उठाकर अस्पताल पहुंचाते हैं ग्रामीण
Updated Fri, 15 Dec 2017 10:40 PM IST
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ग्राम पांचयत खुशनगरी में सड़क न होने की वजह से पालकी में मरीज को ले जाते लोग।
- फोटो : अमर उजाला
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सतपाल शर्मा
तीसा(चंबा)। ग्राम पंचायत खुशनगरी के कई गांव आज भी सड़क सुविधा से महरूम है। इस वजह से ग्रामीणों को किसी के बीमार होने पर करीब दस किलोमीटर तक पालकी पर उठाकर अस्पताल पहुंचाना पड़ता है। लंबा पैदल रास्ता होने के कारण लोगों को मरीजों को उठाने में काफी दिक्कतें पेश आती है। ग्रामीणों ने बताया कि कई बार तो मरीज बीच रास्ते में ही दम तोड़ देते हैं। बावजूद इसके आज तक इन गांवों को सड़क सुविधा से जोड़ने के लिए कोई कार्रवाई अमल में नहीं लाई गई है। ग्रामीणों ने बताया कि सबसे अधिक परेशानी किसी के बीमार होने और गर्भवती महिला को प्रसव के लिए अस्पताल पहुंचाने में आती है। सड़क सुविधा न होने के कारण क्षेत्र विकास के मामले में भी अन्य क्षेत्रों से पिछड़ गया है। इसके साथ निर्माण सामग्री और जरूरी सामान को भी लोग कंधे पर उठाकर गांव तक पहुंचाते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि वे कई बार विभागीय अधिकारियों, नेताओं से भंजराडू से सलाहन-बनयोग तक सड़क बनाने की मांग कर चुके हैं। बावजूद इसके अभी तक इन गांवों के लिए सड़क निर्माण को लेकर कोई कदम नहीं उठाए गए हैं।
चार गांव की आबादी झेल रही दंश
सड़क सुविधा न होने से पंचायत के चार गांव सकलोगा-1, सकलोगा-2, बनयोग और सलाहन के करीब पांच सौ परिवार परेशानियां झेलने को मजबूर हैं। ग्रामीणों ने बताया कि करीब पांच साल पहले इन गांवों के लिए सड़क बनाने का प्रयास हुआ था। इसके तहत ढाई किलोमीटर सड़क भंजराड़ से इलवास तक बनी है। मगर इससे आगे सड़क का निर्माण नहीं हो पाया है। ग्रामीणों ने बताया कि करीब चार माह पहले सड़क निर्माण को लेकर कवायद शुरू हुई थी। मगर कुछ ही दिन कार्य चला और फिर बंद हो गया है।
ग्रामीण लोभी राम, विजय कुमार, नंदलाल, दुनी चंद, दिवान चंद, भीम सैन, राजू राम, प्रतापू राम, राजकुमार, दिनेश कुमार, प्रभु राम, दयाल सिंह, हरी राम और चंन्द्री राम ने बताया कि सड़क के अभाव में उन्हें मरीजों और गर्भवती महिलाओं को पालकी में उठाकर मुख्य सड़क तक पहुंचाना पड़ता है। इस वजह से रास्ते में ही कई मरीज दम तोड़ देते हैं। बावजूद इसके सरकार और प्रशासन सड़क निर्माण को लेकर असंवेदनशील बना हुआ है। ग्रामीणों ने सरकार से आग्रह किया है कि जल्द उक्त सड़क का कार्य शुरू किया जाए। अन्यथा ग्रामीणों को मजबूरन उग्र आंदोलन करना पड़ेगा।
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वन विभाग की भूमि के आने से बाधित हो रहा कार्य : हर्ष पुरी
लोक निर्माण विभाग के अधिशाषी अभियंता हर्ष पुरी का कहना है कि इलवास से आगे वन विभाग की भूमि है। फॉरेस्ट क्लीयरेंस को लेकर औपचारिकताएं पूरी की जा रही है। उन्होंने कहा कि वन विभाग की एनओसी मिलने के बाद प्राथमिकता के आधार पर सड़क का कार्य आरंभ करवा दिया जाएगा।
तीसा(चंबा)। ग्राम पंचायत खुशनगरी के कई गांव आज भी सड़क सुविधा से महरूम है। इस वजह से ग्रामीणों को किसी के बीमार होने पर करीब दस किलोमीटर तक पालकी पर उठाकर अस्पताल पहुंचाना पड़ता है। लंबा पैदल रास्ता होने के कारण लोगों को मरीजों को उठाने में काफी दिक्कतें पेश आती है। ग्रामीणों ने बताया कि कई बार तो मरीज बीच रास्ते में ही दम तोड़ देते हैं। बावजूद इसके आज तक इन गांवों को सड़क सुविधा से जोड़ने के लिए कोई कार्रवाई अमल में नहीं लाई गई है। ग्रामीणों ने बताया कि सबसे अधिक परेशानी किसी के बीमार होने और गर्भवती महिला को प्रसव के लिए अस्पताल पहुंचाने में आती है। सड़क सुविधा न होने के कारण क्षेत्र विकास के मामले में भी अन्य क्षेत्रों से पिछड़ गया है। इसके साथ निर्माण सामग्री और जरूरी सामान को भी लोग कंधे पर उठाकर गांव तक पहुंचाते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि वे कई बार विभागीय अधिकारियों, नेताओं से भंजराडू से सलाहन-बनयोग तक सड़क बनाने की मांग कर चुके हैं। बावजूद इसके अभी तक इन गांवों के लिए सड़क निर्माण को लेकर कोई कदम नहीं उठाए गए हैं।
चार गांव की आबादी झेल रही दंश
सड़क सुविधा न होने से पंचायत के चार गांव सकलोगा-1, सकलोगा-2, बनयोग और सलाहन के करीब पांच सौ परिवार परेशानियां झेलने को मजबूर हैं। ग्रामीणों ने बताया कि करीब पांच साल पहले इन गांवों के लिए सड़क बनाने का प्रयास हुआ था। इसके तहत ढाई किलोमीटर सड़क भंजराड़ से इलवास तक बनी है। मगर इससे आगे सड़क का निर्माण नहीं हो पाया है। ग्रामीणों ने बताया कि करीब चार माह पहले सड़क निर्माण को लेकर कवायद शुरू हुई थी। मगर कुछ ही दिन कार्य चला और फिर बंद हो गया है।
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ग्रामीण लोभी राम, विजय कुमार, नंदलाल, दुनी चंद, दिवान चंद, भीम सैन, राजू राम, प्रतापू राम, राजकुमार, दिनेश कुमार, प्रभु राम, दयाल सिंह, हरी राम और चंन्द्री राम ने बताया कि सड़क के अभाव में उन्हें मरीजों और गर्भवती महिलाओं को पालकी में उठाकर मुख्य सड़क तक पहुंचाना पड़ता है। इस वजह से रास्ते में ही कई मरीज दम तोड़ देते हैं। बावजूद इसके सरकार और प्रशासन सड़क निर्माण को लेकर असंवेदनशील बना हुआ है। ग्रामीणों ने सरकार से आग्रह किया है कि जल्द उक्त सड़क का कार्य शुरू किया जाए। अन्यथा ग्रामीणों को मजबूरन उग्र आंदोलन करना पड़ेगा।
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वन विभाग की भूमि के आने से बाधित हो रहा कार्य : हर्ष पुरी
लोक निर्माण विभाग के अधिशाषी अभियंता हर्ष पुरी का कहना है कि इलवास से आगे वन विभाग की भूमि है। फॉरेस्ट क्लीयरेंस को लेकर औपचारिकताएं पूरी की जा रही है। उन्होंने कहा कि वन विभाग की एनओसी मिलने के बाद प्राथमिकता के आधार पर सड़क का कार्य आरंभ करवा दिया जाएगा।