फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Bilaspur News ›   Writing is an art that keeps us alive for ages, connect the new generation with culture: Deputy Commissioner

लेखन युगों-युगों तक जीवित रखने वाली कला, नई पीढ़ी को संस्कृति से जोड़ें : उपायुक्त

Thu, 17 Jul 2025 11:48 PM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर Updated Thu, 17 Jul 2025 11:48 PM IST
विज्ञापन
Writing is an art that keeps us alive for ages, connect the new generation with culture: Deputy Commissioner
बिलासपुर में शबीर कुरैशी की पुण्यतिथि पर आयोजित कार्यक्रम में मौजूद उपायुक्त व अन्य। संवाद
-शब्बीर कुरैशी की पुण्यतिथि पर दी श्रद्धांजलि, कवि-साहित्यकारों ने किया संस्मरण साझा
विज्ञापन


संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। लेखन, साहित्य, गायन और गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल रहे स्वर्गीय शब्बीर कुरैशी की 19वीं पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। बुजुर्गों से लेकर युवाओं तक की उपस्थिति यह बताने को काफी थी कि कुरैशी एक साधारण शख्सियत नहीं, बल्कि बहुआयामी व्यक्तित्व के धनी थे, जिन्होंने समाज को सृजन, संस्कृति और संस्कारों की राह दिखाई।
इस अवसर पर उपायुक्त बिलासपुर राहुल कुमार ने बतौर मुख्यातिथि कहा कि लेखन एक अंतहीन साधना है, जिससे व्यक्ति युगों तक याद किया जाता है। उन्होंने कहा कि वर्तमान पीढ़ी को संस्कृति और साहित्य से जुड़ाव बढ़ाना चाहिए। उन्होंने यह भी जोड़ा कि सूचना का तंत्र मोबाइल में सक्रिय है, लेकिन धरातल पर ज्ञान का अनुभव तभी होता है, जब हम धरती से जुड़ते हैं। सभा में डीसी ने कुरैशी के चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी और कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ किया। आयोजकों की ओर से आशा कुरैशी, अजहर कुरैशी, रविंद्र भट्टा व अनीश ठाकुर ने मुख्यातिथि को शॉल, टोपी और स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया। विशिष्ट अतिथि डीएलओ नीलम चंदेल को भी शॉल व स्मृति चिन्ह भेंट किया गया। इस दौरान आशा कुरैशी ने मंडी में आई जल त्रासदी से प्रभावित परिवारों के लिए 51 हजार रुपये का चेक मुख्यमंत्री राहत कोष के लिए डीसी को सौंपा।
विज्ञापन

सभा में आयोजित कवि गोष्ठी ने माहौल को भावनात्मक बना दिया। वरिष्ठ साहित्यकार रविंद्र नाथ भट्टा ने पत्र वाचन के जरिए स्वर्गीय कुरैशी के जीवन को शब्दों में संजोया। उनके बचपन के मित्र एसआर आजाद ने उनके साथ बिताए पलों की स्मृतियां साझा कर माहौल को नम कर दिया। नरेंद्र दत्त शर्मा ने ईश्वर अल्लाह तेरो नाम भजन सुनाया। मुनीर खान ने चिट्ठी न कोई संदेश, शिवनाथ सहगल ने वो जब याद आए... गीत पेश किया। अमरनाथ धीमान ने गजल सुनाई, जबकि रतन चंद निर्झर और जीत राम सुमन ने पहाड़ी कविता से सबको बांधे रखा। हुसैन अली ने एक पेड़ शब्बीर के नाम, कर्मवीर कंडेरा ने कविता और गीत, अरुण डोगरा, सुशील पुंडीर, सुरेंद्र शर्मा, प्रकाश आचार्य, डॉ. जय राम शर्मा, अनीश ठाकुर, रविंद्र चंदेल, सुरेश नड्डा व राकेश मिन्हास ने संस्मरण के माध्यम से कुरैशी के व्यक्तित्व को जीवित किया। कुशल मंच संचालन सुशील पुंडीर ने किया। अंत में कहलूरी धाम का आयोजन भी किया गया।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed