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Bilaspur News: मौसम साफ होते ही शुरू हुई गेहूं की कटाई
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-अभी भी जिले में गेहूं की 75 प्रतिशत कटाई बाकी है
-तीन दिन से हो रही बारिश ने बढ़ा दी थी किसानों की चिंता
संवाद न्यूज एजेंसी
शाहतलाई (बिलासपुर)। तीन दिन बाद मौसम साफ होने के बाद जिले में गेहूं की कटाई शुरू हो गई है। पिछले तीन दिन से हो रही बारिश से जिले में करीब 75 प्रतिशत गेहूं की कटाई अधर में लटक गई थी। शनिवार को मौसम साफ होते ही किसान एक बार फिर खेतों में उतरे गए।
किसान मनेंद्र सिंह, सीता राम, जरनैल सिंह, परस राम, बलीराम, रघुवीर सिंह, करनैल सिंह, केहर सिंह, सुशील कुमार आदि ने कहा कि मौसम विभाग ने जैसे ही मौसम खराब रहने की सूचना दी उन्हें फसल के खराब होने की चिंता सताने लगी थी। हुआ भी ऐसा ही तीन दिन तक बारिश होती रही। काटी हुई गेहूं की फसल खेत में ही रह गई। कटी फसल के अब खराब होने की संभावना है। उन्होंने बताया कि इस बार पहले सूखे ने, फिर पीले रतुआ की मार और अब बारिश से किसानों को 70 फीसदी नुकसान हो गया है। बता दें कि जिले के 65 हजार किसान परिवार खेती बाड़ी पर ही निर्भर हैं। 32 हजार हेक्टेयर भूमि पर खेती बाड़ी की जाती है। किसानों ने सरकार से गुहार लगाई है कि सूखे और बाद में बेमौसमी बरसात से गेहूं की फसल को हुए नुकसान की भरपाई के लिए आर्थिक मदद दी जाए।
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-तीन दिन से हो रही बारिश ने बढ़ा दी थी किसानों की चिंता
संवाद न्यूज एजेंसी
शाहतलाई (बिलासपुर)। तीन दिन बाद मौसम साफ होने के बाद जिले में गेहूं की कटाई शुरू हो गई है। पिछले तीन दिन से हो रही बारिश से जिले में करीब 75 प्रतिशत गेहूं की कटाई अधर में लटक गई थी। शनिवार को मौसम साफ होते ही किसान एक बार फिर खेतों में उतरे गए।
किसान मनेंद्र सिंह, सीता राम, जरनैल सिंह, परस राम, बलीराम, रघुवीर सिंह, करनैल सिंह, केहर सिंह, सुशील कुमार आदि ने कहा कि मौसम विभाग ने जैसे ही मौसम खराब रहने की सूचना दी उन्हें फसल के खराब होने की चिंता सताने लगी थी। हुआ भी ऐसा ही तीन दिन तक बारिश होती रही। काटी हुई गेहूं की फसल खेत में ही रह गई। कटी फसल के अब खराब होने की संभावना है। उन्होंने बताया कि इस बार पहले सूखे ने, फिर पीले रतुआ की मार और अब बारिश से किसानों को 70 फीसदी नुकसान हो गया है। बता दें कि जिले के 65 हजार किसान परिवार खेती बाड़ी पर ही निर्भर हैं। 32 हजार हेक्टेयर भूमि पर खेती बाड़ी की जाती है। किसानों ने सरकार से गुहार लगाई है कि सूखे और बाद में बेमौसमी बरसात से गेहूं की फसल को हुए नुकसान की भरपाई के लिए आर्थिक मदद दी जाए।
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