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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Bilaspur News ›   Voices of Hindi and Pahari resonate in the literary gathering.

Bilaspur News: साहित्य की महफिल में गूंजे हिंदी और पहाड़ी के स्वर

Sat, 12 Sep 2026 12:00 AM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Sat, 12 Sep 2026 12:00 AM IST
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Voices of Hindi and Pahari resonate in the literary gathering.
जिला भाषा संस्कृति विभाग बिलासपुर की ओर से आयोजित कवि सम्मेलन में मौजूद साहित्यकार। स्रोत: भाषा
हार्मनी ऑफ हिमालयज स्कूल में बाल कवि सम्मेलन और बहुभाषी कवि सम्मेलन
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डॉ. अनेक राम सांख्यान और सीता जसवाल को किया सम्मानित

संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। राजभाषा पखवाड़े के तहत शुक्रवार को हार्मनी ऑफ हिमालयज पब्लिक स्कूल में साहित्यिक कार्यक्रम आयोजित किया गया। जिला भाषा एवं संस्कृति विभाग की ओर से आयोजित कार्यक्रम में स्कूली बच्चों ने कविताएं सुनाईं। साहित्यकारों ने हिंदी, पहाड़ी और सामाजिक सरोकारों से जुड़ी रचनाएं प्रस्तुत कीं। कार्यक्रम में साहित्य व समाजसेवा में योगदान के लिए डॉ. अनेक राम सांख्यान और सीता जसवाल को सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम की शुरुआत मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन और वंदना से हुई। पहले सत्र में बाल कवि सम्मेलन हुआ। विद्यार्थियों ने अपनी रचनाएं सुनाईं। जिला भाषा अधिकारी नीलम चंदेल ने प्रतिभागी बच्चों को प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया।
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इसके बाद साहित्यकार से मिलिए कार्यक्रम में रचना शर्मा ने डॉ. अनेक राम सांख्यान के जीवन और साहित्यिक योगदान की जानकारी दी। मंजुल मेहता ने सीता जसवाल की रचनाधर्मिता से परिचित कराया। विभाग की ओर से दोनों साहित्यकारों को हिमाचली टोपी, मफलर, डायरी और पेन भेंटकर सम्मानित किया गया।
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दूसरे सत्र में बहुभाषी कवि सम्मेलन हुआ। रवींद्र कुमार शर्मा ने पपीहे और स्वाति बूंदों पर आधारित रचना सुनाई। संदेश शर्मा ने हिंदी के सम्मान, जबकि जीत राम सुमन ने पर्यावरण और बदलते सामाजिक सरोकारों पर कविता प्रस्तुत की। डॉ. अनेक राम सांख्यान ने राजभाषा और राष्ट्रभाषा को समर्पित गीत सुनाया।
शमशेर सिंह चंदेल, सीता जसवाल, सुषमा खजूरिया, रविंद्र चंदेल कमल, अरुण डोगरा रीतू, सुनील शर्मा, कौशल्या देवी और डॉ. शालिनी शर्मा ने भी हिंदी, संस्कृति, रिश्तों, सामाजिक बदलाव और सोशल मीडिया से जुड़े विषयों पर रचनाएं प्रस्तुत कीं।

जिला भाषा अधिकारी नीलम चंदेल ने कहा कि हिंदी देश की सांस्कृतिक चेतना और लोगों को जोड़ने का माध्यम है। विभिन्न भाषाओं और बोलियों के साहित्य को मंच देने से नई पीढ़ी अपनी भाषा और संस्कृति से जुड़ती है। उन्होंने दैनिक व्यवहार और सरकारी कामकाज में हिंदी के अधिक प्रयोग पर जोर दिया।
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