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Bilaspur News: बरमाणा में वन भूमि कटान पर ग्रामीणों ने जताई आपत्ति
Tue, 13 May 2025 11:41 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
Updated Tue, 13 May 2025 11:41 PM IST
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भानुपल्ली-बिलासपुर रेल लाइन बरमाणा विस्थापित समिति ने की दोबारा भूमि सीमांकन की मांग
-बोले, सही सीमांकन नहीं होने से निजी भूमि से काटे जा रहे हैं पेड़
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। भानुपल्ली-बिलासपुर-बरमाणा रेल लाइन के निर्माण के तहत ग्राम पंचायत बरमाणा में आने वाली वन भूमि पर पिछले कुछ दिनों से पेड़ों का कटान किया जा रहा है। इस कटान को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी है। यह भूमि चरांद क्षेत्र के तहत आती है और इसके साथ लोगों की निजी भूमि भी लगती है। लोगों ने आपत्ति जताई है कि वन विभाग ने इस भूमि का स्पष्ट सीमांकन नहीं किया और न ही वन भूमि और निजी भूमि के बीच कोई स्थायी चिन्ह या बुर्जी लगाए गए हैं। जिससे इस कटान के दौरान निजी भूमि के पेड़ भी काटे जा रहे हैं।
भानुपल्ली-बरमाणा रेल लाइन विस्थापित समिति ने जिला प्रशासन के अधिकारियों से दोबारा इस क्षेत्र में निशानदेही की मांग की है। समिति के अध्यक्ष बलराम शर्मा ने कहा कि वन विभाग के अनुसार यह भूमि डीपीएफ घोषित नहीं है, इस कारण वहां पर वन भूमि को चिन्हित करने के लिए कोई बुर्जी नहीं है। लेकिन इसके बावजूद पेड़ों का कटान जारी है। कहा कि न तो वन भूमि के साथ लगती निजी जमीन के मालिकों को इस कटान के बारे में सूचित किया गया और न ही ग्राम पंचायत या विस्थापित समिति को इस संबंध में कोई जानकारी दी गई। कहा कि यह भूमि मालिकों के अधिकारों का उल्लंघन हैं। उनका कहना है कि यह भूमि उनकी निजी संपत्ति से जुड़ी हुई है, और अगर बिना सही सीमांकन के पेड़ों का कटान जारी रहा तो उनके अधिकारों का हनन होगा। ग्रामीणों ने भूमि की दोबारा निशानदेही की मांग की है ताकि उनके निजी भूमि के अधिकार सुरक्षित रख सकें। बलराम शर्मा ने कहा कि फिलहाल वन विभाग के अधिकारियों से बात कर कटान बंद करवा दिया है। कहा कि जिला प्रशासन से दोबारा जमीन के सीमांकन के लिए पत्र के माध्यम से निशानदेही की मांग रखी गई है। कहा कि तब तक इस क्षेत्र में पेड़ों का कटान नहीं होगा, जब तक दोबारा निशानदेही नहीं होती है।
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-बोले, सही सीमांकन नहीं होने से निजी भूमि से काटे जा रहे हैं पेड़
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। भानुपल्ली-बिलासपुर-बरमाणा रेल लाइन के निर्माण के तहत ग्राम पंचायत बरमाणा में आने वाली वन भूमि पर पिछले कुछ दिनों से पेड़ों का कटान किया जा रहा है। इस कटान को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी है। यह भूमि चरांद क्षेत्र के तहत आती है और इसके साथ लोगों की निजी भूमि भी लगती है। लोगों ने आपत्ति जताई है कि वन विभाग ने इस भूमि का स्पष्ट सीमांकन नहीं किया और न ही वन भूमि और निजी भूमि के बीच कोई स्थायी चिन्ह या बुर्जी लगाए गए हैं। जिससे इस कटान के दौरान निजी भूमि के पेड़ भी काटे जा रहे हैं।
भानुपल्ली-बरमाणा रेल लाइन विस्थापित समिति ने जिला प्रशासन के अधिकारियों से दोबारा इस क्षेत्र में निशानदेही की मांग की है। समिति के अध्यक्ष बलराम शर्मा ने कहा कि वन विभाग के अनुसार यह भूमि डीपीएफ घोषित नहीं है, इस कारण वहां पर वन भूमि को चिन्हित करने के लिए कोई बुर्जी नहीं है। लेकिन इसके बावजूद पेड़ों का कटान जारी है। कहा कि न तो वन भूमि के साथ लगती निजी जमीन के मालिकों को इस कटान के बारे में सूचित किया गया और न ही ग्राम पंचायत या विस्थापित समिति को इस संबंध में कोई जानकारी दी गई। कहा कि यह भूमि मालिकों के अधिकारों का उल्लंघन हैं। उनका कहना है कि यह भूमि उनकी निजी संपत्ति से जुड़ी हुई है, और अगर बिना सही सीमांकन के पेड़ों का कटान जारी रहा तो उनके अधिकारों का हनन होगा। ग्रामीणों ने भूमि की दोबारा निशानदेही की मांग की है ताकि उनके निजी भूमि के अधिकार सुरक्षित रख सकें। बलराम शर्मा ने कहा कि फिलहाल वन विभाग के अधिकारियों से बात कर कटान बंद करवा दिया है। कहा कि जिला प्रशासन से दोबारा जमीन के सीमांकन के लिए पत्र के माध्यम से निशानदेही की मांग रखी गई है। कहा कि तब तक इस क्षेत्र में पेड़ों का कटान नहीं होगा, जब तक दोबारा निशानदेही नहीं होती है।
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