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Bilaspur News: सरहद पर गरजे वीर जवान, देश के दुश्मन हो सावधान

Tue, 07 Jul 2026 11:35 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Tue, 07 Jul 2026 11:35 PM IST
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Valiant soldiers roar at the border; enemies of the nation, beware.
कल्याण कला मंच बिलासपुर की कला कलम संगोष्ठी में उपस्थित साहित्यकार व अन्य। स्रोत: जागरूक पाठक।
गैहरा में कल्याण कला मंच बिलासपुर ने किया संगोष्ठी का आयोजन
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रचनाकारों ने कविताओं और गीतों से बांधा समां
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। कल्याण कला मंच बिलासपुर ने बल्ह चुरानी पंचायत के गांव गैहरा में कला कलम संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी की अध्यक्षता मुख्य संरक्षक डॉ. लेख राम शर्मा ने की। कार्यक्रम की शुरुआत में डॉ. जय महलवाल ने वक्त पता नहीं अभी क्या क्या रंग दिखाएगा, अमरपुर के अध्यापक राज कुमार कौंडल ने बीड बननेयां पर घुलाटी बढी जान्दी, निचली भट्टेड के सशक्त हस्ताक्षर, अनिल शर्मा नील ने दो रोटी के जुगाड़ के लिए, राकेश मनहास ने रिश्तों की धूप छांव से आजाद हो गए, शिव नाथ सहगल ने जिंदगी कैसी है पहेली हाए गीत प्रस्तुत किया। अर्चना शर्मा ने रिश्ते अब समय नहीं मांगते, लश्करी राम ने बिलासपुर नाहर सिंह बजिया ए दावीयां कंडे मारकंडा रा तीर्थ, कैप्टन नीरज शर्मा ने कन्या मित्र सन सत्तर, फरवरी मिन्हा तरीक सात थी, रविंद्र कमल ने सरहद पर गरजे वीर जवान, देश के दुशमन हो सावधान, शिवांश गौतम ने हरि सुंदर नंद मुकंद हरि नारायण हरि ऊं, कैप्टन सुरेंद्र शर्मा ने ए मानस ये समां है तेरा, आचार्य और कथा वाचक जगदीश सहोता ने खोदत खोदत चूसे मर गए, मौजां लुटिया सप्पा ने, मानव विज्ञानी डॉ. अनेक राम संख्यान ने साथी न कोई मंजिल, शिवांश संख्यान ने भारत तू है हमको प्यारा, तू है सब देशों से न्यारा, अमरनाथ धीमान ने तलिया उपर पुड़ जे रखया, पुडा पर रखी लोको खारी, सुना कर पहाड़ी बोली को समृद्धि प्रदान की। कार्यक्रम में निशा देवी, राम प्यारी, कांता देवी, सीता देवी, देशराज, सत्या देवी, रमा कुमारी, ने भी अपनी अपनी नवीन रचनाएं प्रस्तुत की। समापन सत्र में ब्रिज लाल लखनपाल ने बहुत जाप जपते जपते आज हम पहुंच गए हैं कहां, स्थानीय वरिष्ठ सदस्य सरस्वती शर्मा उर्फ स्वाति ने बदल रहा है आदमी, बदल रहा है जमाना, मंच के कोषाध्यक्ष श्याम सुंदर सहगल ने चल मेरी जिंदे नवीं दुनियां बसानी गीत सुना कर वाहवाही लूटी। मंच के निदेशक सुरेंद्र मिन्हास कहलूरी ने ऐसे लुडियां मारदे थे घाटां बाटा, नईं हुदी थी तड़ीस हुआ नी कदी खरलाटा रचना प्रस्तुत की। धर्म पाल शर्मा ने कहा कि ऐसे आयोजनों से समाज को सही दिशा मिलती है। वहीं, बेली राम टैगोर ने स्वयं की मंच से जुड़ने की इच्छा व्यक्त की। नीलम चंदेल ने मंच के कार्यों की प्रशंसा करते हुए अनुरोध किया कि मंच अनछुए साहित्यिक विषयों को भी छुए। डॉ. लेखराम शर्मा ने अपनी नवीन रचना यूं बयां की फोने इनी घड़ी रेडियो अखबार सब छुड़ाई ते, रोटी खाने रे वी सारे स्वाद मजे गंवाई ते। इस अवसर पर हड़िंबा वेलफेयर सोसायटी के देश राज शर्मा, अमरनाथ धीमान आदि उपस्थित रहे।
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