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Bilaspur News: सात जिलों की बैठक पर संगठन में घमासान, असंवैधानिक करार दिया
Thu, 22 Oct 2026 12:59 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
Updated Thu, 22 Oct 2026 12:59 AM IST
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सीता राम बोले, राज्य अध्यक्ष की लिखित अनुमति के बिना नहीं बुला सकते बैठक
कर्मचारी एकता मंच को मान्यता देने से भी किया इनकार
संवाद न्यूज एजेंसी
घुमारवीं (बिलासपुर)। स्वास्थ्य विभाग युवा चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी संगठन हिमाचल प्रदेश की 25 अक्तूबर को नाहन में प्रस्तावित बैठक को लेकर विवाद गहरा गया है। संगठन के जिला बिलासपुर के उपप्रधान सीता राम ने सात जिलों के प्रतिनिधियों की ओर से बुलाई जा रही बैठक को असंवैधानिक करार दिया है। उन्होंने कहा कि राज्य अध्यक्ष की लिखित अनुमति के बिना राज्य स्तरीय बैठक बुलाने का प्रावधान नहीं है। उन्होंने कर्मचारी एकता मंच को संगठन से मान्यता मिलने से भी इन्कार किया।
सीता राम ने कहा कि जिला कांगड़ा के अध्यक्ष त्रिलोक कपूर को संगठन के नियमों का पालन करने की हिदायत दी गई थी, लेकिन इसके बावजूद नियमों की अनदेखी की जा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि डॉ. वाईएस परमार मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल, नाहन में प्रस्तावित बैठक राज्य कार्यकारिणी की अधिकृत बैठक नहीं है।
उन्होंने राज्य अध्यक्ष राकेश शर्मा का पक्ष रखते हुए कहा कि कर्मचारी एकता मंच का गठन संगठन के बैनर तले नहीं हुआ है और न ही राज्य कार्यकारिणी ने इसे मान्यता दी है। उन्होंने मंच की ओर से राज्य कार्यकारिणी को धमकी भरा पत्र भेजने का आरोप भी लगाया। सीता राम ने कहा कि संगठन के संविधान के अनुसार कोई पदाधिकारी एक साथ दो संगठनों में पद पर नहीं रह सकता।
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उन्होंने बताया कि नाहन में होने वाला कार्यक्रम जिला सिरमौर की कार्यकारिणी का वार्षिक समारोह है, जिसमें केवल जिला सिरमौर के सदस्यों को शामिल होना चाहिए।
वहीं, राज्य कार्यकारिणी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष अनिल कुमार ने कर्मचारियों से अपील की कि वे संगठन से मान्यता प्राप्त नहीं करने वाले किसी मंच से न जुड़ें। उन्होंने कहा कि 25 अक्तूबर को प्रस्तावित बैठक में राज्य कार्यकारिणी का कोई पदाधिकारी शामिल नहीं होगा। अनिल कुमार ने चेतावनी दी कि यदि कोई जिला कार्यकारिणी संगठन के संविधान के विरुद्ध गतिविधियों में शामिल होती है या संगठन की छवि खराब करती है, तो संबंधित पदाधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। उन्होंने कहा कि राज्य कार्यकारिणी प्रस्ताव पारित कर पदाधिकारियों को पद से मुक्त करने और उनकी जिम्मेदारी अन्य सक्रिय सदस्यों को सौंपने का निर्णय ले सकती है। इस संबंध में अंतिम निर्णय लेने का अधिकार राज्य अध्यक्ष के पास है।
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कर्मचारी एकता मंच को मान्यता देने से भी किया इनकार
संवाद न्यूज एजेंसी
घुमारवीं (बिलासपुर)। स्वास्थ्य विभाग युवा चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी संगठन हिमाचल प्रदेश की 25 अक्तूबर को नाहन में प्रस्तावित बैठक को लेकर विवाद गहरा गया है। संगठन के जिला बिलासपुर के उपप्रधान सीता राम ने सात जिलों के प्रतिनिधियों की ओर से बुलाई जा रही बैठक को असंवैधानिक करार दिया है। उन्होंने कहा कि राज्य अध्यक्ष की लिखित अनुमति के बिना राज्य स्तरीय बैठक बुलाने का प्रावधान नहीं है। उन्होंने कर्मचारी एकता मंच को संगठन से मान्यता मिलने से भी इन्कार किया।
सीता राम ने कहा कि जिला कांगड़ा के अध्यक्ष त्रिलोक कपूर को संगठन के नियमों का पालन करने की हिदायत दी गई थी, लेकिन इसके बावजूद नियमों की अनदेखी की जा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि डॉ. वाईएस परमार मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल, नाहन में प्रस्तावित बैठक राज्य कार्यकारिणी की अधिकृत बैठक नहीं है।
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उन्होंने राज्य अध्यक्ष राकेश शर्मा का पक्ष रखते हुए कहा कि कर्मचारी एकता मंच का गठन संगठन के बैनर तले नहीं हुआ है और न ही राज्य कार्यकारिणी ने इसे मान्यता दी है। उन्होंने मंच की ओर से राज्य कार्यकारिणी को धमकी भरा पत्र भेजने का आरोप भी लगाया। सीता राम ने कहा कि संगठन के संविधान के अनुसार कोई पदाधिकारी एक साथ दो संगठनों में पद पर नहीं रह सकता।
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उन्होंने बताया कि नाहन में होने वाला कार्यक्रम जिला सिरमौर की कार्यकारिणी का वार्षिक समारोह है, जिसमें केवल जिला सिरमौर के सदस्यों को शामिल होना चाहिए।
वहीं, राज्य कार्यकारिणी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष अनिल कुमार ने कर्मचारियों से अपील की कि वे संगठन से मान्यता प्राप्त नहीं करने वाले किसी मंच से न जुड़ें। उन्होंने कहा कि 25 अक्तूबर को प्रस्तावित बैठक में राज्य कार्यकारिणी का कोई पदाधिकारी शामिल नहीं होगा। अनिल कुमार ने चेतावनी दी कि यदि कोई जिला कार्यकारिणी संगठन के संविधान के विरुद्ध गतिविधियों में शामिल होती है या संगठन की छवि खराब करती है, तो संबंधित पदाधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। उन्होंने कहा कि राज्य कार्यकारिणी प्रस्ताव पारित कर पदाधिकारियों को पद से मुक्त करने और उनकी जिम्मेदारी अन्य सक्रिय सदस्यों को सौंपने का निर्णय ले सकती है। इस संबंध में अंतिम निर्णय लेने का अधिकार राज्य अध्यक्ष के पास है।