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आरएलए बिलासपुर की कार्यप्रणाली से ट्रक ऑपरेटर परेशान : गंगा सिंह
Sun, 10 May 2026 11:51 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
Updated Sun, 10 May 2026 11:51 PM IST
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रजिस्ट्रेशन और पासिंग में देरी से ट्रक ऑपरेटरों का काम ठप
ऑपरेटर बोले, ऑनलाइन एंट्री न होने से फैक्ट्री में नहीं मिल रहा काम
बैंक किस्त, ड्राइवर वेतन और परिवार चलाना हुआ मुश्किल
ऑपरेटरों का हो रहा आर्थिक और मानसिक शोषण
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। बिलासपुर स्थित आरएलए विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर ट्रक ऑपरेटरों में भारी रोष देखने को मिल रहा है। बीडीटीएस प्रबंधन और विभिन्न ट्रक ऑपरेटरों ने कहा कि आरएलए कार्यालय की धीमी कार्यप्रणाली और लापरवाही के चलते सैकड़ों ऑपरेटर आर्थिक संकट से जूझने को मजबूर हैं। ऑपरेटरों का कहना है कि गाड़ियों की सभी औपचारिकताएं पूरी होने और पासिंग होने के बावजूद समय पर रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट जारी नहीं किए जा रहे, जबकि कई मामलों में ऑनलाइन एंट्री तक लंबित पड़ी हुई है। बीडीटीएस कार्यकारिणी के सदस्य एवं पूर्व चेयरमैन गंगा सिंह ठाकुर, पूर्व प्रधान राकेश ठाकुर, पूर्व महासचिव प्रदीप ठाकुर, सदस्य कश्मीर सिंह, पूर्व वरिष्ठ उपप्रधान कमल किशोर, शेर सिंह ठाकुर, जितेंद्र, सुरेश, सतीश, संजीव, अमर सिंह और अन्य ऑपरेटरों ने संयुक्त रूप से कहा कि विभागीय देरी का सीधा असर उनके रोजगार पर पड़ रहा है। गाड़ियां तैयार खड़ी हैं, लेकिन ऑनलाइन एंट्री न होने के कारण उन्हें फैक्ट्री परिसर में काम नहीं मिल पा रहा। ऑपरेटरों ने बताया कि बीडीटीएस, बागा अल्ट्राटेक और एसीसी से जुड़े कई वाहन मालिक इस समस्या से सबसे अधिक प्रभावित हैं। ट्रकों के खड़े रहने से प्रतिदिन हजारों रुपये का नुकसान उठाना पड़ रहा है। दूसरी ओर बैंकों की मासिक किस्तें लगातार बढ़ती जा रही हैं। ड्राइवरों और हेल्परों का वेतन देना भी मुश्किल हो गया है। गंगा सिंह ठाकुर ने कहा कि विभागीय लापरवाही के कारण ट्रक ऑपरेटरों का आर्थिक और मानसिक शोषण हो रहा है। उन्होंने कहा कि कई ऑपरेटर भारी कर्ज लेकर नए वाहन सड़क पर उतारते हैं, लेकिन समय पर दस्तावेज और ऑनलाइन प्रक्रिया पूरी न होने से उन्हें काम नहीं मिल रहा। ऐसे में परिवार का खर्च चलाना तक कठिन हो गया है। ऑपरेटरों का कहना है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो स्थिति और गंभीर हो सकती है। उन्होंने प्रशासन और संबंधित विभाग से मांग की है कि लंबित रजिस्ट्रेशन और ऑनलाइन एंट्री की प्रक्रिया को प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाए, ताकि प्रभावित ऑपरेटरों को राहत मिल सके और उनका रोजगार दोबारा पटरी पर लौट सके।
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ऑपरेटर बोले, ऑनलाइन एंट्री न होने से फैक्ट्री में नहीं मिल रहा काम
बैंक किस्त, ड्राइवर वेतन और परिवार चलाना हुआ मुश्किल
ऑपरेटरों का हो रहा आर्थिक और मानसिक शोषण
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। बिलासपुर स्थित आरएलए विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर ट्रक ऑपरेटरों में भारी रोष देखने को मिल रहा है। बीडीटीएस प्रबंधन और विभिन्न ट्रक ऑपरेटरों ने कहा कि आरएलए कार्यालय की धीमी कार्यप्रणाली और लापरवाही के चलते सैकड़ों ऑपरेटर आर्थिक संकट से जूझने को मजबूर हैं। ऑपरेटरों का कहना है कि गाड़ियों की सभी औपचारिकताएं पूरी होने और पासिंग होने के बावजूद समय पर रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट जारी नहीं किए जा रहे, जबकि कई मामलों में ऑनलाइन एंट्री तक लंबित पड़ी हुई है। बीडीटीएस कार्यकारिणी के सदस्य एवं पूर्व चेयरमैन गंगा सिंह ठाकुर, पूर्व प्रधान राकेश ठाकुर, पूर्व महासचिव प्रदीप ठाकुर, सदस्य कश्मीर सिंह, पूर्व वरिष्ठ उपप्रधान कमल किशोर, शेर सिंह ठाकुर, जितेंद्र, सुरेश, सतीश, संजीव, अमर सिंह और अन्य ऑपरेटरों ने संयुक्त रूप से कहा कि विभागीय देरी का सीधा असर उनके रोजगार पर पड़ रहा है। गाड़ियां तैयार खड़ी हैं, लेकिन ऑनलाइन एंट्री न होने के कारण उन्हें फैक्ट्री परिसर में काम नहीं मिल पा रहा। ऑपरेटरों ने बताया कि बीडीटीएस, बागा अल्ट्राटेक और एसीसी से जुड़े कई वाहन मालिक इस समस्या से सबसे अधिक प्रभावित हैं। ट्रकों के खड़े रहने से प्रतिदिन हजारों रुपये का नुकसान उठाना पड़ रहा है। दूसरी ओर बैंकों की मासिक किस्तें लगातार बढ़ती जा रही हैं। ड्राइवरों और हेल्परों का वेतन देना भी मुश्किल हो गया है। गंगा सिंह ठाकुर ने कहा कि विभागीय लापरवाही के कारण ट्रक ऑपरेटरों का आर्थिक और मानसिक शोषण हो रहा है। उन्होंने कहा कि कई ऑपरेटर भारी कर्ज लेकर नए वाहन सड़क पर उतारते हैं, लेकिन समय पर दस्तावेज और ऑनलाइन प्रक्रिया पूरी न होने से उन्हें काम नहीं मिल रहा। ऐसे में परिवार का खर्च चलाना तक कठिन हो गया है। ऑपरेटरों का कहना है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो स्थिति और गंभीर हो सकती है। उन्होंने प्रशासन और संबंधित विभाग से मांग की है कि लंबित रजिस्ट्रेशन और ऑनलाइन एंट्री की प्रक्रिया को प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाए, ताकि प्रभावित ऑपरेटरों को राहत मिल सके और उनका रोजगार दोबारा पटरी पर लौट सके।