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Bilaspur News: बच्चों को सुनाई शहीद सरदार मुल्तान सिंह की वीर गाथा
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मजारी स्कूल में प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर दी श्रद्धाजलि
बिलासपुर। राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला मजारी के पूर्व छात्र बलिदानी सरदार मुल्तान सिंह का शहीदी दिवस मनाया गया। इस अवसर पर अध्यापकों, विद्यार्थियों और एसएमसी सदस्यों ने उनकी प्रतिमा पर पुष्प अर्पित किए। प्रधानाचार्य सुरजीत ठाकुर ने शहीद सरदार मुल्तान सिंह के बलिदान की कहानी बच्चों को सुनाई। उन्होंने कहा कि आज के ही दिन 2004 में हवलदार मुल्तान सिंह एक सैनिक ऑपरेशन के दौरान मणिपुर की राजधानी इंफाल के पश्चिम भाग के छोटा बेकरा इलाके में आतंकवादियों से लोहा लेते हुए बलिदान हो गए थे। उन्होंने घने जंगलों में छिपे आतंकवादियों के एक ग्रुप पर सैन्य कार्रवाई करते हुए अपनी यूनिट की सैन्य टुकड़ी के साथ मिलकर कई आतंकवादियों को ढेर कर दिया था। इसी दौरान तीन गोलियां मुल्तान सिंह को लग गई, फिर भी उन्होंने आदम्य साहस से उनका अंतिम सांस तक मुकाबला किया और देश की सीमा की रक्षा करते हुए अपनी प्राण न्योछावर कर दिए। हम सभी प्रतिदिन सुबह सभा में शपथ लेते हैं कि देश की आन, बान, शान के लिए अपना तन, मन, धन न्योछावर करने के लिए सदा तैयार रहेंगे, इन पंक्तियों पर आधारित शहीद मुल्तान का सारा जीवन था। वह पाठशाला का होनहार छात्र था और विद्यार्थी जीवन से ही अनुशासन व सेवा परायणता के गुण उनके व्यक्तित्व में थे।
अपनी यूनिट में सदैव नेतृत्व कर कठिन कार्यों को पूर्ण कर सबकी प्रसंशा बटोरते थे, सभी साथी उन्हें शेर कहते थे। विद्यालय परिवार की ओर से उनकी पत्नी उषा देवी को स्मृतिचिह्न और माता की चुनरी भेंट की गई। अध्यापिका रेणु शर्मा ने देशभक्ति का गीत गाकर सबकी आंखों को नम कर दिया। इस अवसर पर स्कूल प्रबंधन समिति के प्रधान गुरमेल सिंह, पूर्व अध्यक्ष सोहन सिंह, स्कूल अडाप्शन समिति के सदस्य सरदार गुरचैन सिंह, हरदयाल सिंह, उप प्रधानाचार्य राजेश शर्मा, प्रवक्ता नीलम धीमान, राजेश शर्मा आदि उपस्थित रहे।
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बिलासपुर। राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला मजारी के पूर्व छात्र बलिदानी सरदार मुल्तान सिंह का शहीदी दिवस मनाया गया। इस अवसर पर अध्यापकों, विद्यार्थियों और एसएमसी सदस्यों ने उनकी प्रतिमा पर पुष्प अर्पित किए। प्रधानाचार्य सुरजीत ठाकुर ने शहीद सरदार मुल्तान सिंह के बलिदान की कहानी बच्चों को सुनाई। उन्होंने कहा कि आज के ही दिन 2004 में हवलदार मुल्तान सिंह एक सैनिक ऑपरेशन के दौरान मणिपुर की राजधानी इंफाल के पश्चिम भाग के छोटा बेकरा इलाके में आतंकवादियों से लोहा लेते हुए बलिदान हो गए थे। उन्होंने घने जंगलों में छिपे आतंकवादियों के एक ग्रुप पर सैन्य कार्रवाई करते हुए अपनी यूनिट की सैन्य टुकड़ी के साथ मिलकर कई आतंकवादियों को ढेर कर दिया था। इसी दौरान तीन गोलियां मुल्तान सिंह को लग गई, फिर भी उन्होंने आदम्य साहस से उनका अंतिम सांस तक मुकाबला किया और देश की सीमा की रक्षा करते हुए अपनी प्राण न्योछावर कर दिए। हम सभी प्रतिदिन सुबह सभा में शपथ लेते हैं कि देश की आन, बान, शान के लिए अपना तन, मन, धन न्योछावर करने के लिए सदा तैयार रहेंगे, इन पंक्तियों पर आधारित शहीद मुल्तान का सारा जीवन था। वह पाठशाला का होनहार छात्र था और विद्यार्थी जीवन से ही अनुशासन व सेवा परायणता के गुण उनके व्यक्तित्व में थे।
अपनी यूनिट में सदैव नेतृत्व कर कठिन कार्यों को पूर्ण कर सबकी प्रसंशा बटोरते थे, सभी साथी उन्हें शेर कहते थे। विद्यालय परिवार की ओर से उनकी पत्नी उषा देवी को स्मृतिचिह्न और माता की चुनरी भेंट की गई। अध्यापिका रेणु शर्मा ने देशभक्ति का गीत गाकर सबकी आंखों को नम कर दिया। इस अवसर पर स्कूल प्रबंधन समिति के प्रधान गुरमेल सिंह, पूर्व अध्यक्ष सोहन सिंह, स्कूल अडाप्शन समिति के सदस्य सरदार गुरचैन सिंह, हरदयाल सिंह, उप प्रधानाचार्य राजेश शर्मा, प्रवक्ता नीलम धीमान, राजेश शर्मा आदि उपस्थित रहे।
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