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जिला में मौसम विभाग के अनुमानों पर टिकी किसानों की नजरें
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शाहतलाई में बारिश ना होने से खेतों में मुरझाई गेहूं की फसल।
- फोटो : BILASPUR
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शाहतलाई (बिलासपुर)। हिमाचल प्रदेश में कृषि के लिए अग्रणी जिला बिलासपुर में लंबे समय से बारिश न होने के कारण किसान चितिंत हैं। जिले में करीब डेढ़ माह से बारिश नहीं हुई है, इस कारण फसल मुरझाने लगी है। हालांकि मौसम ने करवट ली है, लेकिन हल्की बूंदाबांदी से किसानों की उम्मीदों पर पानी फिर गया है।
अब किसानों की नजरें मौसम विभाग के अनुमानों पर टिकी हुई हैं, अगर जल्द ही जरूरत के मुताबिक बारिश न हुई तो यह गेहूं की फसल को नुकसान होगा।
जिले में 65 हजार किसान परिवार 25 हजार हेक्टेयर भूमि पर गेहूं की खेती कर अपने परिवार का गुजर बसर करते हैं, जबकि जिले में 31 हजार 878 हेक्टेयर भूमि पर कृषि की जाती है, लेकिन जिले के किसान आज भी इंद्र देवता की मेहरबानी पर ही निर्भर हैं।
जिले में मात्र 10 फीसदी भूमि सिंचाई योग्य है, लेकिन उन योजनाओं में से 50 फीसदी योजनाएं बंद हो गई हैं या बंद होने की कगार पर हैं। किसानों मनेंद्र सिंह, सीता राम, जरनैल सिंह, पवन वनियाल, राम रतन शर्मा, सोमदत्त शर्मा, कुलदीप शर्मा, प्रकाश चंद, सुशील कुमार, मूलराज, केड़ी धीमान का कहना है कि करीब डेढ़ माह से बारिश न होने के कारण गेहूं की फसल उखड़ने लग पड़ी है। इससे किसानों के चेहरों पर चिंता की लकीरें साफ दिखाई देने लगी हैं।
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जिले में सिंचाई सुविधा नाम मात्र होने से उत्पादकता का पूर्ण दोहन नहीं हो पाता है। किसान सिंचाई के लिए बारिश पर ही निर्भर हैं। किसानों का कहना है कि इस समय गेहूं की फसल के लिए बारिश की अति आवश्यकता है, गेहूं के पौधों पर सिला निकलने का समय है। इतना ही नहीं बारिश न होने से गेहूं के पौधे मुरझाने लग पड़े हैं। उधर, झंडूता के विषयवाद विषेशज्ञ डॉ. अशोक शर्मा का कहना है कि मौसम ने करवट ली है। अगर बारिश हो जाती है तो किसानों की गेहूं की फसल के लिए वरदान साबित हो जाएगी। उन्होंने बताया कि कृषि विभाग खाद की सप्लाई कर दी है।
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अब किसानों की नजरें मौसम विभाग के अनुमानों पर टिकी हुई हैं, अगर जल्द ही जरूरत के मुताबिक बारिश न हुई तो यह गेहूं की फसल को नुकसान होगा।
जिले में 65 हजार किसान परिवार 25 हजार हेक्टेयर भूमि पर गेहूं की खेती कर अपने परिवार का गुजर बसर करते हैं, जबकि जिले में 31 हजार 878 हेक्टेयर भूमि पर कृषि की जाती है, लेकिन जिले के किसान आज भी इंद्र देवता की मेहरबानी पर ही निर्भर हैं।
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जिले में मात्र 10 फीसदी भूमि सिंचाई योग्य है, लेकिन उन योजनाओं में से 50 फीसदी योजनाएं बंद हो गई हैं या बंद होने की कगार पर हैं। किसानों मनेंद्र सिंह, सीता राम, जरनैल सिंह, पवन वनियाल, राम रतन शर्मा, सोमदत्त शर्मा, कुलदीप शर्मा, प्रकाश चंद, सुशील कुमार, मूलराज, केड़ी धीमान का कहना है कि करीब डेढ़ माह से बारिश न होने के कारण गेहूं की फसल उखड़ने लग पड़ी है। इससे किसानों के चेहरों पर चिंता की लकीरें साफ दिखाई देने लगी हैं।
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जिले में सिंचाई सुविधा नाम मात्र होने से उत्पादकता का पूर्ण दोहन नहीं हो पाता है। किसान सिंचाई के लिए बारिश पर ही निर्भर हैं। किसानों का कहना है कि इस समय गेहूं की फसल के लिए बारिश की अति आवश्यकता है, गेहूं के पौधों पर सिला निकलने का समय है। इतना ही नहीं बारिश न होने से गेहूं के पौधे मुरझाने लग पड़े हैं। उधर, झंडूता के विषयवाद विषेशज्ञ डॉ. अशोक शर्मा का कहना है कि मौसम ने करवट ली है। अगर बारिश हो जाती है तो किसानों की गेहूं की फसल के लिए वरदान साबित हो जाएगी। उन्होंने बताया कि कृषि विभाग खाद की सप्लाई कर दी है।