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Bilaspur News: टनल निर्माण के बाहर प्रभावितों का धरना 143 दिन से जारी
Wed, 22 Oct 2025 11:44 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
Updated Wed, 22 Oct 2025 11:44 PM IST
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बध्यात टनल के बाहर धरने पर बैठे प्रभावित। संवाद
130 दिन से क्रमिक भूख हड़ताल पर बैठे हैं ग्रामीण
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। बध्यात में रेल लाइन टनल निर्माण से प्रभावित ग्रामीणों का धरना 143 दिन से लगातार जारी है। 130 दिनों से प्रभावित क्रमिक भूख हड़ताल पर बैठे हैं। प्रभावित का कहना है कि टनल निर्माण के दौरान हो रही लगातार ब्लास्टिंग से उनके घरों में गहरी दरारें आ गई हैं, जिससे दीवारें और छतें किसी भी समय गिर सकती हैं।
प्रभावितों का कहना है कि हमें इतने दिन हड़ताल पर बैठे हो गए हैं, लेकिन प्रशासन या सरकार की ओर से कोई सुनवाई नहीं है। दो माह पहले जब उपायुक्त से मिले थे तो बताया गया था कि एनआईटी हमीरपुर से घरों का सर्वेक्षण करवाया जाएगा। लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। प्रभावितों का कहना है कि अब घरों के भीतर रहना बेहद खतरनाक है। विरोध प्रदर्शन और क्रमिक भूख हड़ताल के बावजूद उनकी समस्याओं को सुलझाने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। उनका कहना है कि प्रशासन और सरकार केवल आश्वासन देकर चले गए, लेकिन कोई उचित कदम नहीं उठाया गया है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि प्रशासन जानबूझकर उनकी अनदेखी कर रहा है और प्रभावित परिवारों को असुरक्षा की स्थिति में छोड़ दिया गया है। प्रभावितों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर गंभीरता से कार्रवाई नहीं होती और क्षतिग्रस्त घरों की मरम्मत या मुआवजे की व्यवस्था नहीं की जाती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। बुधवार को रामलाल, अजय कुमार, विजय कुमार, सुखमणि देवी, शीतल देवी और मीना देवी धरने पर बैठे हुए हैं।
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संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। बध्यात में रेल लाइन टनल निर्माण से प्रभावित ग्रामीणों का धरना 143 दिन से लगातार जारी है। 130 दिनों से प्रभावित क्रमिक भूख हड़ताल पर बैठे हैं। प्रभावित का कहना है कि टनल निर्माण के दौरान हो रही लगातार ब्लास्टिंग से उनके घरों में गहरी दरारें आ गई हैं, जिससे दीवारें और छतें किसी भी समय गिर सकती हैं।
प्रभावितों का कहना है कि हमें इतने दिन हड़ताल पर बैठे हो गए हैं, लेकिन प्रशासन या सरकार की ओर से कोई सुनवाई नहीं है। दो माह पहले जब उपायुक्त से मिले थे तो बताया गया था कि एनआईटी हमीरपुर से घरों का सर्वेक्षण करवाया जाएगा। लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। प्रभावितों का कहना है कि अब घरों के भीतर रहना बेहद खतरनाक है। विरोध प्रदर्शन और क्रमिक भूख हड़ताल के बावजूद उनकी समस्याओं को सुलझाने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। उनका कहना है कि प्रशासन और सरकार केवल आश्वासन देकर चले गए, लेकिन कोई उचित कदम नहीं उठाया गया है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि प्रशासन जानबूझकर उनकी अनदेखी कर रहा है और प्रभावित परिवारों को असुरक्षा की स्थिति में छोड़ दिया गया है। प्रभावितों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर गंभीरता से कार्रवाई नहीं होती और क्षतिग्रस्त घरों की मरम्मत या मुआवजे की व्यवस्था नहीं की जाती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। बुधवार को रामलाल, अजय कुमार, विजय कुमार, सुखमणि देवी, शीतल देवी और मीना देवी धरने पर बैठे हुए हैं।
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