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Bilaspur News: नौणी-भराड़ीघाट फोरलेन का इंतकाल अटका, विस्थापित परेशान

Sun, 16 Nov 2025 11:29 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Sun, 16 Nov 2025 11:29 PM IST
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The Nauni-Bharadighat four-lane project is stalled, leaving displaced people worried.
नौणी-भराड़ीघाट फोरलेन का इंतकाल अटका, विस्थापित परेशान
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मुआवजा मिल चुका, ढांचे हटे, लेकिन भूमि रिकॉर्ड में नहीं हुआ बदलाव
डेढ़ साल बाद भी जमीन का इंतकाल नहीं हुए एनएचएआई के नाम
अधिग्रहण की जद में आए हैं 252 मकान-दुकान और 4600 पेड़

गोपाल शर्मा
जुखाला(बिलासपुर)। शिमला-मटौर नेशनल हाईवे के पैकेज नंबर-2 नौणी-भराड़ीघाट फोरलेन निर्माण को टेंडर हुए करीब डेढ़ साल हो चुका है। सबसे बड़ी और संवेदनशील प्रक्रिया यह है कि अधिग्रहित भूमि का इंतकाल एनएचएआई के नाम दर्ज करना अब तक लंबित है। इसके चलते प्रभावित परिवार गहरी परेशानी झेल रहे हैं। विस्थापितों का कहना है कि भूमि अधिग्रहित होने और मुआवजा मिलने के बावजूद राजस्व रिकॉर्ड में अभी भी जमीन उनके नाम ही दर्ज है। इंतकाल चढ़े बिना जमीन का वास्तविक सीमांकन पता नहीं चल पा रहा।
बता दें कि 17.5 किलोमीटर लंबे इस पैच का कार्य 640 करोड़ रुपये में गाबर कंपनी को आवंटित किया गया था और कंपनी दो वर्ष में निर्माण पूरा करने की शर्त पर काम शुरू कर भी चुकी है। कई स्थानों पर मकान, दुकानें व ढांचों को हटाया जा चुका है तथा जिला प्रशासन पात्र लोगों को मुआवजा भी दे चुका है। मगर अधिग्रहित भूमि का इंतकाल एनएचएआई के नाम दर्ज करना अब तक लंबित है। वहीं एनएचएआई की ओर से लगाए गए बाउंड्री पिलर करीब 50 मीटर बाहर दिखाई दे रहे हैं, जिससे प्रभावितों में भ्रम की स्थिति बनी हुई है। लोगों का कहना है कि शेष बची अपनी जमीन पर भी वे न तो निर्माण कर पा रहे हैं और न ही खरीद-फरोख्त, क्योंकि भूमि के मालिकाना हक को लेकर रिकॉर्ड में स्पष्टता नहीं है। इंतकाल लंबित होने से एनओसी भी जारी नहीं हो रही, जबकि ढांचे हटने के बाद कई विस्थापित परिवार अपने मकान या दुकान दोबारा बनाने की योजना तक नहीं बना पा रहे हैं। नौणी-भराड़ीघाट फोरलेन विस्थापित समिति के प्रधान बाबूराम सिसोदिया, उप प्रधान कमलेश नड्डा, विनोद महाजन, काला राम, कुलवीर भड़ोल, कुलदीप ठाकुर सहित अन्य प्रभावितों ने बताया कि वे पिछले कई महीनों से राजस्व विभाग और प्रशासन से इंतकाल चढ़ाने की मांग कर रहे हैं, लेकिन अब तक कोई समाधान नहीं हो पाया।
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इनसेट
कितनी भूमि और कितनी संपत्ति अधिग्रहित
फोरलेन निर्माण के लिए कुल करीब 37 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण किया गया है। इसमें 18 हेक्टेयर निजी भूमि, 19 हेक्टेयर सरकारी भूमि है। इसके अलावा अध्याधिकार में 4600 पेड़, जिनमें 400 फलदार पेड़ कुल 252 मकान-दुकान शामिल हैं।
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कोट
एसडीएम बोले, जल्द होगी कार्रवाई
एसडीएम सदर डॉ. राजदीप सिंह ने कहा कि मामला उनके ध्यान में है। उन्होंने बताया कि इंतकाल को लेकर आवश्यक प्रक्रिया शीघ्र शुरू की जाएगी, ताकि विस्थापितों की समस्या का समाधान किया जा सके। संवाद
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