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Bilaspur News: कथा में दिया जीवन और भक्ति का संदेश
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डिग्गर गांव में श्री मद भागवत कथा का श्रवण करते हुए श्रद्धालु। संवाद
डिग्गर गांव में सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का समापन
लोगों ने खुशी और नम आंखों से दी श्री भागवत पुराण को विदाई
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। ग्राम पंचायत बैरी रजादियां के डिग्गर गांव में चल रही सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का समापन यज्ञ के साथ हुआ। कथा वाचक आचार्य भगत राम नड्डा ने अंतिम दिन कथा का सार बताते हुए जीवन और भक्ति का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि यह जीवन को सदमार्ग पर ले जाने वाली प्रेरणा है।
आचार्य ने बताया कि कथा का मुख्य उद्देश्य समाज में प्रेम, सद्भावना और नैतिकता का संदेश फैलाना और सभी को एक सूत्र में जोड़ना है। उन्होंने कहा कि जितना मनुष्य इस कलयुग में श्रीमद्भागवत से जुड़ता जाएगा, उतनी ही भगवान श्रीकृष्ण की कृपा उस पर बनी रहेगी। आचार्य ने स्पष्ट किया कि कथा मानव को उसके कर्तव्यों का बोध कराती है और जीवन में धर्म, भक्ति और निष्काम कर्म का मार्ग दिखाती है। कथा के अंतिम दिन सैकड़ों श्रद्धालु उपस्थित रहे। उन्होंने आचार्य इस अवसर पर आयोजक पंडित जीवानंद शैल ने अपने गुरु की महिमा का व्याख्यान किया और श्रद्धालुओं को जीवन में कथा के संदेशों को अपनाने की प्रेरणा दी। समापन समारोह में हवन यज्ञ का आयोजन किया गया, जिसमें सभी श्रद्धालुओं ने भाग लिया। इसके बाद सभी ने श्री भागवत पुराण को खुशी और नम आंखों से विदाई दी। भंडारे में उपस्थित लोगों ने प्रसाद ग्रहण कर आशीर्वाद लिया और उत्सव का आनंद लिया। आयोजकों ने बताया कि यह सात दिवसीय कथा केवल धार्मिक कार्यक्रम नहीं बल्कि समाज में भक्ति, नैतिकता और प्रेम की भावना को मजबूत करने वाला प्रेरक आयोजन रहा। इस तरह के आयोजन हमारे बच्चों को हमारे संस्कारों और धार्मिक ग्रंथों से अवगत कराते हैं।
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लोगों ने खुशी और नम आंखों से दी श्री भागवत पुराण को विदाई
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। ग्राम पंचायत बैरी रजादियां के डिग्गर गांव में चल रही सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का समापन यज्ञ के साथ हुआ। कथा वाचक आचार्य भगत राम नड्डा ने अंतिम दिन कथा का सार बताते हुए जीवन और भक्ति का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि यह जीवन को सदमार्ग पर ले जाने वाली प्रेरणा है।
आचार्य ने बताया कि कथा का मुख्य उद्देश्य समाज में प्रेम, सद्भावना और नैतिकता का संदेश फैलाना और सभी को एक सूत्र में जोड़ना है। उन्होंने कहा कि जितना मनुष्य इस कलयुग में श्रीमद्भागवत से जुड़ता जाएगा, उतनी ही भगवान श्रीकृष्ण की कृपा उस पर बनी रहेगी। आचार्य ने स्पष्ट किया कि कथा मानव को उसके कर्तव्यों का बोध कराती है और जीवन में धर्म, भक्ति और निष्काम कर्म का मार्ग दिखाती है। कथा के अंतिम दिन सैकड़ों श्रद्धालु उपस्थित रहे। उन्होंने आचार्य इस अवसर पर आयोजक पंडित जीवानंद शैल ने अपने गुरु की महिमा का व्याख्यान किया और श्रद्धालुओं को जीवन में कथा के संदेशों को अपनाने की प्रेरणा दी। समापन समारोह में हवन यज्ञ का आयोजन किया गया, जिसमें सभी श्रद्धालुओं ने भाग लिया। इसके बाद सभी ने श्री भागवत पुराण को खुशी और नम आंखों से विदाई दी। भंडारे में उपस्थित लोगों ने प्रसाद ग्रहण कर आशीर्वाद लिया और उत्सव का आनंद लिया। आयोजकों ने बताया कि यह सात दिवसीय कथा केवल धार्मिक कार्यक्रम नहीं बल्कि समाज में भक्ति, नैतिकता और प्रेम की भावना को मजबूत करने वाला प्रेरक आयोजन रहा। इस तरह के आयोजन हमारे बच्चों को हमारे संस्कारों और धार्मिक ग्रंथों से अवगत कराते हैं।
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