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बजट बुक के पहले चार पेज में सरकार का आर्थिकी का रोना : जमवाल
Fri, 21 Mar 2025 11:39 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
Updated Fri, 21 Mar 2025 11:39 PM IST
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सदर के विधायक त्रिलोक जमवाल
प्रदेश सरकार खुद ही पटरी से उतर चुकी है, देश की चिंता छोड़ प्रदेश की सोचें
-कृषि, स्वास्थ्य, लोक निर्माण, ग्रामीण विकास के बजट पर चला दी कैंची
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। सदर के विधायक त्रिलोक जमवाल ने वर्ष 2025-26 के बजट को लेकर प्रदेश सरकार पर तीखा हमला किया है। उन्होंने कहा कि बजट बुक के पहले पेज से ही पूरी किताब आसानी से समझ आ जा रही है। पहले चार पेजों में सरकार ने केवल आर्थिक स्थिति का रोना ही रोया है।
उन्होंने कहा कि पिछले तीन वर्ष से यह सरकार अपने हर बजट को प्रदेश को पटरी पर लाने के प्रयासों पर केंद्रित बता रही है। हकीकत यह है कि प्रदेश सरकार खुद ही पटरी से उतर चुकी है। पहले अपना घर संभालना जरूरी है। देश की आर्थिक स्थिति पर चिंता करने के बजाए इस सरकार को पहले प्रदेश की चिंता करनी चाहिए। विधानसभा में बजट सत्र में चर्चा में भाग लेते हुए त्रिलोक जमवाल ने कहा कि हिमाचल को आत्मनिर्भर राज्य बनाने के दावे करने वाली मौजूदा सरकार की सोच वास्तव में केवल यहीं तक सीमित है कि चालू महीना कैसे निकलेगा। कृषि, स्वास्थ्य, लोक निर्माण तथा ग्रामीण विकास जैसे हर क्षेत्र में पिछले साल की तुलना में इस बार बजट पर कैंची चला दी गई है। इसके लिए केंद्र का फंड इधर से उधर ट्रांसफर किया जा रहा है। ऋण लेने के मामले में इस सरकार ने अब तक के सारे रिकार्ड तोड़ दिए हैं। 1993 में ऋण शून्य था। 2022 तक लोन का आंकड़ा 70 हजार करोड़ रुपये था, लेकिन मौजूदा सरकार केवल दो साल में ही 30 हजार करोड़ का लोन ले चुकी है। यही रफ्तार रही तो अगले तीन वर्ष में 45-50 हजार करोड़ ऋण और लेकर वह इस आंकड़े को डेढ़ लाख करोड़ रुपये तक पहुंचा देगी।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार ने 18 से 60 वर्ष तक की आयु की सभी महिलाओं को प्रतिमाह 1500 रुपये देने की गारंटी दी थी। अब तक केवल 30929 महिलाओं को 2-2 किस्तें ही मिली हैं। अब उन्हें भी पंचायतों में भेजकर उलझा दिया गया है। यही हाल सरकारी नौकरियों के आंकड़ों का है। बजट बुक के आंकड़े पूछे गए सवालों के जवाबों से अलग हैं। इससे साफ जाहिर हो रहा है कि बजट बनाते समय इस बात पर ध्यान ही नहीं दिया गया कि इसमें क्या लिखा जा रहा है। प्रदेश की वित्तीय हालत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि ट्रेजरी चार माह से बंद है। विधायकों की ऐच्छिक निधि का पैसा तक रिलीज नहीं हो रहा है। विधायक क्षेत्रीय विकास निधि योजना के तहत मंजूर कार्य पिछले सात माह से अधर में लटके हैं। सरकार ने पहले की तरह केवल प्रयासों का बजट पेश किया है। धरातल पर कुछ भी नहीं है।
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-कृषि, स्वास्थ्य, लोक निर्माण, ग्रामीण विकास के बजट पर चला दी कैंची
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। सदर के विधायक त्रिलोक जमवाल ने वर्ष 2025-26 के बजट को लेकर प्रदेश सरकार पर तीखा हमला किया है। उन्होंने कहा कि बजट बुक के पहले पेज से ही पूरी किताब आसानी से समझ आ जा रही है। पहले चार पेजों में सरकार ने केवल आर्थिक स्थिति का रोना ही रोया है।
उन्होंने कहा कि पिछले तीन वर्ष से यह सरकार अपने हर बजट को प्रदेश को पटरी पर लाने के प्रयासों पर केंद्रित बता रही है। हकीकत यह है कि प्रदेश सरकार खुद ही पटरी से उतर चुकी है। पहले अपना घर संभालना जरूरी है। देश की आर्थिक स्थिति पर चिंता करने के बजाए इस सरकार को पहले प्रदेश की चिंता करनी चाहिए। विधानसभा में बजट सत्र में चर्चा में भाग लेते हुए त्रिलोक जमवाल ने कहा कि हिमाचल को आत्मनिर्भर राज्य बनाने के दावे करने वाली मौजूदा सरकार की सोच वास्तव में केवल यहीं तक सीमित है कि चालू महीना कैसे निकलेगा। कृषि, स्वास्थ्य, लोक निर्माण तथा ग्रामीण विकास जैसे हर क्षेत्र में पिछले साल की तुलना में इस बार बजट पर कैंची चला दी गई है। इसके लिए केंद्र का फंड इधर से उधर ट्रांसफर किया जा रहा है। ऋण लेने के मामले में इस सरकार ने अब तक के सारे रिकार्ड तोड़ दिए हैं। 1993 में ऋण शून्य था। 2022 तक लोन का आंकड़ा 70 हजार करोड़ रुपये था, लेकिन मौजूदा सरकार केवल दो साल में ही 30 हजार करोड़ का लोन ले चुकी है। यही रफ्तार रही तो अगले तीन वर्ष में 45-50 हजार करोड़ ऋण और लेकर वह इस आंकड़े को डेढ़ लाख करोड़ रुपये तक पहुंचा देगी।
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उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार ने 18 से 60 वर्ष तक की आयु की सभी महिलाओं को प्रतिमाह 1500 रुपये देने की गारंटी दी थी। अब तक केवल 30929 महिलाओं को 2-2 किस्तें ही मिली हैं। अब उन्हें भी पंचायतों में भेजकर उलझा दिया गया है। यही हाल सरकारी नौकरियों के आंकड़ों का है। बजट बुक के आंकड़े पूछे गए सवालों के जवाबों से अलग हैं। इससे साफ जाहिर हो रहा है कि बजट बनाते समय इस बात पर ध्यान ही नहीं दिया गया कि इसमें क्या लिखा जा रहा है। प्रदेश की वित्तीय हालत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि ट्रेजरी चार माह से बंद है। विधायकों की ऐच्छिक निधि का पैसा तक रिलीज नहीं हो रहा है। विधायक क्षेत्रीय विकास निधि योजना के तहत मंजूर कार्य पिछले सात माह से अधर में लटके हैं। सरकार ने पहले की तरह केवल प्रयासों का बजट पेश किया है। धरातल पर कुछ भी नहीं है।
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