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खड्डों का गिरता जल स्तर चिंता का विषय : अमरनाथ धीमान
Sat, 22 Mar 2025 11:12 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
Updated Sat, 22 Mar 2025 11:12 PM IST
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झंडूता क्षेत्र में गिरता सीर खड्ड का जलस्तर । संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
बरठीं(बिलासपुर)। झंडूता क्षेत्र की जीवन रेखा मानी जाने वाली सीर खड्ड का जल स्तर लगातार गिरता जा रहा है, जिससे भविष्य में पेयजल संकट की आशंका बढ़ सकती है। यही हाल शुक्र और सरयाली खड्ड का भी है, जहां पानी का स्तर दिन-ब-दिन कम होता जा रहा है। इन खड्डों के किनारे बनी ज्यादातर पेयजल योजनाएं इसी पानी पर निर्भर हैं, लेकिन जलस्तर में लगातार गिरावट से इन योजनाओं पर खतरा मंडराने लगा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि साल दर साल खड्डों का जल स्तर कम हो रहा है, जिससे भविष्य में पीने के पानी की किल्लत, सिंचाई और अन्य आवश्यक जरूरतें भी प्रभावित हो सकती हैं। अमरनाथ धीमान जो लंबे समय से जल संरक्षण से जुड़े मुद्दों पर काम कर रहे हैं ने कहा कि सरकार को इस समस्या की गंभीरता को समझते हुए तुरंत कदम उठाने चाहिए। जल संकट केवल प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि आम जनता को भी जल संरक्षण को प्राथमिकता देनी चाहिए। गर्मियों में यह संकट और गहरा सकता है, क्योंकि पहाड़ी क्षेत्रों में बारिश कम होने और जल स्रोतों के सूखने से खड्डों में जल प्रवाह भी कम हो जाता है। यदि समय रहते जल संरक्षण को लेकर ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले समय में यह समस्या और विकराल हो सकती है।
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बरठीं(बिलासपुर)। झंडूता क्षेत्र की जीवन रेखा मानी जाने वाली सीर खड्ड का जल स्तर लगातार गिरता जा रहा है, जिससे भविष्य में पेयजल संकट की आशंका बढ़ सकती है। यही हाल शुक्र और सरयाली खड्ड का भी है, जहां पानी का स्तर दिन-ब-दिन कम होता जा रहा है। इन खड्डों के किनारे बनी ज्यादातर पेयजल योजनाएं इसी पानी पर निर्भर हैं, लेकिन जलस्तर में लगातार गिरावट से इन योजनाओं पर खतरा मंडराने लगा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि साल दर साल खड्डों का जल स्तर कम हो रहा है, जिससे भविष्य में पीने के पानी की किल्लत, सिंचाई और अन्य आवश्यक जरूरतें भी प्रभावित हो सकती हैं। अमरनाथ धीमान जो लंबे समय से जल संरक्षण से जुड़े मुद्दों पर काम कर रहे हैं ने कहा कि सरकार को इस समस्या की गंभीरता को समझते हुए तुरंत कदम उठाने चाहिए। जल संकट केवल प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि आम जनता को भी जल संरक्षण को प्राथमिकता देनी चाहिए। गर्मियों में यह संकट और गहरा सकता है, क्योंकि पहाड़ी क्षेत्रों में बारिश कम होने और जल स्रोतों के सूखने से खड्डों में जल प्रवाह भी कम हो जाता है। यदि समय रहते जल संरक्षण को लेकर ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले समय में यह समस्या और विकराल हो सकती है।
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