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Bilaspur News: जुर्माना अदा बिना कंपनी की दलीलें नहीं सुनेगा न्यायालय
Thu, 08 Jan 2026 11:28 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
Updated Thu, 08 Jan 2026 11:28 PM IST
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एक्सक्लूसिव
गोबिंद सागर झील में अवैध डंपिंग के मामले में हाईकोर्ट सख्त
आदेशों के बाद भी कंपनी ने नहीं भरा बकाया जुर्माना
अब उच्च न्यायालय ने दिए एफडी के रूप में पूरा जुर्माना भरने के आदेश
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने भानुपल्ली-बैरी रेल लाइन निर्माण के दौरान गोबिंद सागर झील में अवैध रूप से मलबा फेंकने और पर्यावरण नियमों की अनदेखी करने पर कड़ा रुख अपनाया है। मुख्य न्यायाधीश जीएस संधावालिया और न्यायमूर्ति जिया लाल भारद्वाज की खंडपीठ ने स्पष्ट आदेश दिया है कि प्रतिवादी कंपनी 'दिलीप बिल्डकॉन लिमिटेड जब तक निर्धारित जुर्माना जमा नहीं करती, तब तक उसे मामले के गुण-दोष पर नहीं सुना जाएगा।
बिलासपुर में भानुपल्ली-बैरी रेल लाइन पर टनल नंबर 14, 15 और 16 का निर्माण कर रही कंपनी पर पिछले दो वर्ष से गंभीर आरोप लग रहे हैं। कंपनी ने टनल निर्माण से निकले मलबे को वैज्ञानिक तरीके से ठिकाने लगाने के बजाय सीधे गोबिंद सागर झील में डंप किया। एप्रोच मार्गों के साथ भारी मात्रा में गिराए गए इस मलबे के कारण झील के पानी की गुणवत्ता खराब हो रही है और सुरक्षा के कोई उपाय नहीं किए गए हैं। राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने साल 2023 से कंपनी को कई बार कारण बताओ नोटिस जारी किए, लेकिन कंपनी की ओर से संतोषजनक कार्रवाई नहीं की गई। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट के आधार पर कंपनी पर कुल 85,87,500 रुपये का पर्यावरणीय जुर्माना लगाया गया था। बार-बार नोटिस के बाद जब 27 जून 2024 को कंपनी की बिजली काट दी गई, तब कंपनी ने 20 जुलाई 2024 को 29.25 लाख रुपये (कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार 29.50 लाख) जमा किए। कंपनी ने शेष राशि जल्द जमा करने और मलबे को हटाने का वादा किया था, लेकिन बोर्ड के अनुसार 12 मार्च 2025 तक न तो मलबा हटाया गया और न ही पूरा जुर्माना भरा गया। 6 जनवरी 2026 को हुई सुनवाई के दौरान मामले में नए मोड़ आए। कंपनी ने हलफनामा दायर कर कहा कि उसने जुर्माना विरोध और दबाव में जमा किया था। कंपनी ने पर्यावरण क्षतिपूर्ति के आदेशों को चुनौती देते हुए 31 दिसंबर 2025 को एक नई सिविल रिट दायर की है। अदालत ने निर्देश दिया कि कंपनी की इस नई याचिका को भी मुख्य जनहित याचिका के साथ संलग्न किया जाए। अदालत ने अपने पिछले आदेशों का हवाला देते हुए दोहराया कि बिना जुर्माना जमा किए कंपनी का पक्ष नहीं सुना जाएगा। हालांकि, कोर्ट ने कंपनी को एक रास्ता देते हुए कहा कि वह विवादित राशि को न्यायालय में फिक्स्ड डिपॉजिट के रूप में जमा करवा सकती है, जो भविष्य के फैसलों के अधीन रहेगी। इस मामले की अगली सुनवाई अब 31 मार्च 2026 को तय की गई है।
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गोबिंद सागर झील में अवैध डंपिंग के मामले में हाईकोर्ट सख्त
आदेशों के बाद भी कंपनी ने नहीं भरा बकाया जुर्माना
अब उच्च न्यायालय ने दिए एफडी के रूप में पूरा जुर्माना भरने के आदेश
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने भानुपल्ली-बैरी रेल लाइन निर्माण के दौरान गोबिंद सागर झील में अवैध रूप से मलबा फेंकने और पर्यावरण नियमों की अनदेखी करने पर कड़ा रुख अपनाया है। मुख्य न्यायाधीश जीएस संधावालिया और न्यायमूर्ति जिया लाल भारद्वाज की खंडपीठ ने स्पष्ट आदेश दिया है कि प्रतिवादी कंपनी 'दिलीप बिल्डकॉन लिमिटेड जब तक निर्धारित जुर्माना जमा नहीं करती, तब तक उसे मामले के गुण-दोष पर नहीं सुना जाएगा।
बिलासपुर में भानुपल्ली-बैरी रेल लाइन पर टनल नंबर 14, 15 और 16 का निर्माण कर रही कंपनी पर पिछले दो वर्ष से गंभीर आरोप लग रहे हैं। कंपनी ने टनल निर्माण से निकले मलबे को वैज्ञानिक तरीके से ठिकाने लगाने के बजाय सीधे गोबिंद सागर झील में डंप किया। एप्रोच मार्गों के साथ भारी मात्रा में गिराए गए इस मलबे के कारण झील के पानी की गुणवत्ता खराब हो रही है और सुरक्षा के कोई उपाय नहीं किए गए हैं। राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने साल 2023 से कंपनी को कई बार कारण बताओ नोटिस जारी किए, लेकिन कंपनी की ओर से संतोषजनक कार्रवाई नहीं की गई। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट के आधार पर कंपनी पर कुल 85,87,500 रुपये का पर्यावरणीय जुर्माना लगाया गया था। बार-बार नोटिस के बाद जब 27 जून 2024 को कंपनी की बिजली काट दी गई, तब कंपनी ने 20 जुलाई 2024 को 29.25 लाख रुपये (कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार 29.50 लाख) जमा किए। कंपनी ने शेष राशि जल्द जमा करने और मलबे को हटाने का वादा किया था, लेकिन बोर्ड के अनुसार 12 मार्च 2025 तक न तो मलबा हटाया गया और न ही पूरा जुर्माना भरा गया। 6 जनवरी 2026 को हुई सुनवाई के दौरान मामले में नए मोड़ आए। कंपनी ने हलफनामा दायर कर कहा कि उसने जुर्माना विरोध और दबाव में जमा किया था। कंपनी ने पर्यावरण क्षतिपूर्ति के आदेशों को चुनौती देते हुए 31 दिसंबर 2025 को एक नई सिविल रिट दायर की है। अदालत ने निर्देश दिया कि कंपनी की इस नई याचिका को भी मुख्य जनहित याचिका के साथ संलग्न किया जाए। अदालत ने अपने पिछले आदेशों का हवाला देते हुए दोहराया कि बिना जुर्माना जमा किए कंपनी का पक्ष नहीं सुना जाएगा। हालांकि, कोर्ट ने कंपनी को एक रास्ता देते हुए कहा कि वह विवादित राशि को न्यायालय में फिक्स्ड डिपॉजिट के रूप में जमा करवा सकती है, जो भविष्य के फैसलों के अधीन रहेगी। इस मामले की अगली सुनवाई अब 31 मार्च 2026 को तय की गई है।
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