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हर नागरिक को थैलेसीमिया रोग की जानकारी होना आवश्यक : सीएमओ
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- थैलेसीमिया के रोगियों को चुनना चाहिए कम लौह आहार का विकल्प
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. प्रवीण कुमार ने प्रेस नोट जारी कर कहा कि हर नागरिक को थैलेसीमिया रोग की जानकारी होना आवश्यक है I थैलेसीमिया एक अनुवांशिक रक्त विकार है, जिसमें हीमोग्लोबिन का स्तर सामान्य से कम होता है। हीमोग्लोबिन एक विशेष प्रकार का प्रोटीन होता है, जिसकी मदद से ऑक्सीजन रक्त में मिलकर शरीर के सभी हिस्सों तक पहुंच पाती है। उन्होंने कहा कि अल्फा थैलेसीमिया में अक्सर कोई लक्षण विकसित नहीं होता है। हालांकि, बीटा थैलेसीमिया में एनीमिया, भूख न लगना, हृदय, लीवर या स्प्लीन बढ़ना, हड्डियां कमजोर पड़ना में से कोई भी लक्षण महसूस होता है या फिर परिवार में किसी को थैलेसीमिया है तो आपको डॉक्टर से संपर्क कर लेना चाहिए। मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने कहा कि बिलासपुर में थैलेसीमिया के 10 बच्चे हैं, जिन्हें हर माह खून चढ़ाना पड़ता है। भारत में हर साल सात से 10 हजार मामले थैलेसीमिया के दर्ज होते हैं। थैलेसीमिया के रोगियों को पोषक तत्वों की कमी आम बात है। थैलेसीमिया के रोगियों को कम लौह आहार का विकल्प चुनना चाहिए, उनको आयरन युक्त खाद्य पदार्थ जैसे अनाज, रेड मीट, हरी पत्तेदार सब्जियों व विटामिन सी युक्त खाद्य पदार्थों से बचना चाहिए। उन्होंने कहा कि थैलेसीमिया में लाल रक्त कोशिकाएं गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त होने लगती हैं, जिससे एनीमिया हो जाता है। यदि बच्चे के माता या पिता में से किसी एक को थैलेसीमिया है, तो बच्चे को भी यह विकार हो सकता है। हालांकि, यदि दोनों में से किसी को यह रोग नहीं है,तो भी जीन में कुछ उत्परिवर्तन (म्यूटेशन) होने के कारण यह रोग हो सकता है।
उन्होंने कहा कि थैलेसीमिया के दो प्रकार हैं, इन्हें अल्फा थैलेसीमिया और बीटा थैलेसीमिया के रूप में जाना जाता है। अल्फा थैलेसीमिया- अल्फा ग्लोबिन प्रोटीन से संबंधित जीन न होना या उसमें किसी प्रकार की म्यूटेशन होना अल्फा थैलेसीमिया का कारण बनती है। बीटा थैलेसीमिया-बीटा ग्लोबिन प्रोटीन बनाने की क्रिया को नियंत्रित करने वाली जीन में म्यूटेशन होना थैलेसीमिया का कारण बन सकता है। भारत में अधिकतर बीटा थैलेसीमिया के मामले पाए जाते हैं। थैलेसीमिया के लक्षण इसकी गंभीरता और हर व्यक्ति के स्वास्थ्य व शारीरिक तासीर के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं। हालांकि, थैलेसीमिया से विकसित होने वाले आम लक्षणों में बुखार,सिरदर्द,कमजोरी और थकावट, मांसपेशियों में दर्द, पसीना, खांसी सूखी हो, भूख कम लगना और वजन कम होना, पेट दर्द, कब्ज या दस्त, पेट फूलना, हड्डियों में विकृति हो जाना, गहरे रंग का पेशाब आना, शारीरिक विकास अपेक्षाकृत धीमी गति से होना, त्वचा का रंग पीला पड़ना इत्यादि शामिल है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. प्रवीण कुमार ने प्रेस नोट जारी कर कहा कि हर नागरिक को थैलेसीमिया रोग की जानकारी होना आवश्यक है I थैलेसीमिया एक अनुवांशिक रक्त विकार है, जिसमें हीमोग्लोबिन का स्तर सामान्य से कम होता है। हीमोग्लोबिन एक विशेष प्रकार का प्रोटीन होता है, जिसकी मदद से ऑक्सीजन रक्त में मिलकर शरीर के सभी हिस्सों तक पहुंच पाती है। उन्होंने कहा कि अल्फा थैलेसीमिया में अक्सर कोई लक्षण विकसित नहीं होता है। हालांकि, बीटा थैलेसीमिया में एनीमिया, भूख न लगना, हृदय, लीवर या स्प्लीन बढ़ना, हड्डियां कमजोर पड़ना में से कोई भी लक्षण महसूस होता है या फिर परिवार में किसी को थैलेसीमिया है तो आपको डॉक्टर से संपर्क कर लेना चाहिए। मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने कहा कि बिलासपुर में थैलेसीमिया के 10 बच्चे हैं, जिन्हें हर माह खून चढ़ाना पड़ता है। भारत में हर साल सात से 10 हजार मामले थैलेसीमिया के दर्ज होते हैं। थैलेसीमिया के रोगियों को पोषक तत्वों की कमी आम बात है। थैलेसीमिया के रोगियों को कम लौह आहार का विकल्प चुनना चाहिए, उनको आयरन युक्त खाद्य पदार्थ जैसे अनाज, रेड मीट, हरी पत्तेदार सब्जियों व विटामिन सी युक्त खाद्य पदार्थों से बचना चाहिए। उन्होंने कहा कि थैलेसीमिया में लाल रक्त कोशिकाएं गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त होने लगती हैं, जिससे एनीमिया हो जाता है। यदि बच्चे के माता या पिता में से किसी एक को थैलेसीमिया है, तो बच्चे को भी यह विकार हो सकता है। हालांकि, यदि दोनों में से किसी को यह रोग नहीं है,तो भी जीन में कुछ उत्परिवर्तन (म्यूटेशन) होने के कारण यह रोग हो सकता है।
उन्होंने कहा कि थैलेसीमिया के दो प्रकार हैं, इन्हें अल्फा थैलेसीमिया और बीटा थैलेसीमिया के रूप में जाना जाता है। अल्फा थैलेसीमिया- अल्फा ग्लोबिन प्रोटीन से संबंधित जीन न होना या उसमें किसी प्रकार की म्यूटेशन होना अल्फा थैलेसीमिया का कारण बनती है। बीटा थैलेसीमिया-बीटा ग्लोबिन प्रोटीन बनाने की क्रिया को नियंत्रित करने वाली जीन में म्यूटेशन होना थैलेसीमिया का कारण बन सकता है। भारत में अधिकतर बीटा थैलेसीमिया के मामले पाए जाते हैं। थैलेसीमिया के लक्षण इसकी गंभीरता और हर व्यक्ति के स्वास्थ्य व शारीरिक तासीर के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं। हालांकि, थैलेसीमिया से विकसित होने वाले आम लक्षणों में बुखार,सिरदर्द,कमजोरी और थकावट, मांसपेशियों में दर्द, पसीना, खांसी सूखी हो, भूख कम लगना और वजन कम होना, पेट दर्द, कब्ज या दस्त, पेट फूलना, हड्डियों में विकृति हो जाना, गहरे रंग का पेशाब आना, शारीरिक विकास अपेक्षाकृत धीमी गति से होना, त्वचा का रंग पीला पड़ना इत्यादि शामिल है।
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