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Bilaspur News: गोबिंद सागर झील का जलस्तर कम होने पर दिखाई देने लगे मंदिर
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- भाखड़ा बांध बनने के बाद झील में जलमग्न हुए थे बिलासपुर के 119 ऐतिहासिक मंदिर
- अलौकिक नजारे को देखने के लिए मोटर बोट से पहुंच रहे लोग
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। गोबिंद सागर झील में पिछले कई माह से जलमग्न हुए ऐतिहासिक मंदिर अब नजर आना शुरू हो गए हैं। इन मंदिरों के गुंबद दिखाई देने लगे हैं। अलौकिक से दिखने वाले इस नजारे को देखने के लिए स्थानीय लोगों सहित बाहरी राज्यों से लोग मोटर बोट के माध्यम से इन मंदिरों तक पहुंच रहे हैं।
भाखड़ा बांध बनने के बाद झील की जद में आया पुराना बिलासपुर शहर जलमग्न हो गया था। पुराने शहर के सांडू मैदान में 119 मंदिर थे। प्रभावित इलाकों के लिए नया शहर बसाया गया, लेकिन इन मंदिरों को दूसरी जगह शिफ्ट नहीं किया गया। कई मंदिर तो सिल्ट के नीचे दब गए। कुछ मंदिर बचे हैं, जिनमें रंगनाथ, खुनमुखेश्वर, ठाकुरद्वारा, मुरली मनोहर, गोपाल मंदिर, हनुमान मंदिर शामिल हैं। यह मंदिर हर साल छह महीने के लिए जल समाधि ले लेते हैं। गोबिंद सागर झील में जुलाई महीने में पानी चढ़ता है। इसके बाद सभी मंदिर जल समाधि ले लेते हैं। इन दिनों पानी उतरने का क्रम शुरू हो चुका है। इससे मंदिरों के गुंबद पानी की सतह पर दिखने लगे हैं। इन मंदिरों का इतिहास आज भी पुरातत्व विभाग के लिए रहस्य से भरा हुआ है। दक्षिण भारत के मंदिरों की शैली में निर्मित मंदिर कब और किसने बनाए, इसका पता आज तक नहीं चल पाया है। इन मंदिरों को लिफ्ट करने के लिए 1500 करोड़ रुपये की नई योजना बनाई गई है। प्रदेश सरकार के माध्यम से इसके लिए 100 करोड़ और केंद्र सरकार की ओर से 1400 करोड़ की राशि आएगी। पहले चरण में नाले के नौण में तीन मंदिरों को लिफ्ट किया जाएगा। दूसरे चरण में सांडू मैदान को पर्यटन की दृष्टि से विकसित किया जाएगा। वहीं, तीसरे चरण में मंडी भराड़ी के पास बैराज बनाकर मंदिरों के आसपास एक जलाशय बनाया जाएगा। इसमें रिवर फ्रंट और वॉक वेज आदि विकसित किए जाएंगे।
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- अलौकिक नजारे को देखने के लिए मोटर बोट से पहुंच रहे लोग
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। गोबिंद सागर झील में पिछले कई माह से जलमग्न हुए ऐतिहासिक मंदिर अब नजर आना शुरू हो गए हैं। इन मंदिरों के गुंबद दिखाई देने लगे हैं। अलौकिक से दिखने वाले इस नजारे को देखने के लिए स्थानीय लोगों सहित बाहरी राज्यों से लोग मोटर बोट के माध्यम से इन मंदिरों तक पहुंच रहे हैं।
भाखड़ा बांध बनने के बाद झील की जद में आया पुराना बिलासपुर शहर जलमग्न हो गया था। पुराने शहर के सांडू मैदान में 119 मंदिर थे। प्रभावित इलाकों के लिए नया शहर बसाया गया, लेकिन इन मंदिरों को दूसरी जगह शिफ्ट नहीं किया गया। कई मंदिर तो सिल्ट के नीचे दब गए। कुछ मंदिर बचे हैं, जिनमें रंगनाथ, खुनमुखेश्वर, ठाकुरद्वारा, मुरली मनोहर, गोपाल मंदिर, हनुमान मंदिर शामिल हैं। यह मंदिर हर साल छह महीने के लिए जल समाधि ले लेते हैं। गोबिंद सागर झील में जुलाई महीने में पानी चढ़ता है। इसके बाद सभी मंदिर जल समाधि ले लेते हैं। इन दिनों पानी उतरने का क्रम शुरू हो चुका है। इससे मंदिरों के गुंबद पानी की सतह पर दिखने लगे हैं। इन मंदिरों का इतिहास आज भी पुरातत्व विभाग के लिए रहस्य से भरा हुआ है। दक्षिण भारत के मंदिरों की शैली में निर्मित मंदिर कब और किसने बनाए, इसका पता आज तक नहीं चल पाया है। इन मंदिरों को लिफ्ट करने के लिए 1500 करोड़ रुपये की नई योजना बनाई गई है। प्रदेश सरकार के माध्यम से इसके लिए 100 करोड़ और केंद्र सरकार की ओर से 1400 करोड़ की राशि आएगी। पहले चरण में नाले के नौण में तीन मंदिरों को लिफ्ट किया जाएगा। दूसरे चरण में सांडू मैदान को पर्यटन की दृष्टि से विकसित किया जाएगा। वहीं, तीसरे चरण में मंडी भराड़ी के पास बैराज बनाकर मंदिरों के आसपास एक जलाशय बनाया जाएगा। इसमें रिवर फ्रंट और वॉक वेज आदि विकसित किए जाएंगे।
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