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Bilaspur News: बिलासपुर-चंदपुर रूट को निजी करने से विद्यार्थियों में रोष

Tue, 24 Feb 2026 11:41 PM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर Updated Tue, 24 Feb 2026 11:41 PM IST
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Students are angry over the privatization of the Bilaspur-Chandpur route.
बिलासपुर-चंदपुर बस।
छात्रों और ग्रामीणों ने सरकार से रूट को यथावत रखने की उठाई मांग
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परिवहन विभाग की ओर से रूट पर मांगे गए हैं आवेदन

संवाद न्यूज एजेंसी

मलोखर (बिलासपुर)। हिमाचल पथ परिवहन निगम (एचआरटीसी) के बिलासपुर डिपो पर बिलासपुर-चंदपुर रूट को निजी हाथों में सौंपने की तैयारी का आरोप लगाते हुए छात्रों और ग्रामीणों ने नाराजगी जताई है।

ग्रामीणों के अनुसार यह रूट गौटा, सिल्हा गांव, सिकरोहा और चंदपुर के सैकड़ों लोगों के लिए लाइफलाइन है। यदि रूट को निजी हाथों में दिया जाएगा तो विशेष रूप से छात्रों को इससे सीधा नुकसान होगा। सुबह 9:45 बजे बिलासपुर पहुंचने और शाम 4:25 बजे वापस चलने वाली यह एकमात्र सरकारी बस कॉलेज और स्कूल की समय-सारिणी के अनुरूप है। करीब 20 कॉलेज छात्र और 10 स्कूली बच्चे एचआरटीसी के स्टूडेंट पास का लाभ लेते हैं। छात्रों का कहना है कि यदि यह सेवा निजी हाथों में दी गई तो स्टूडेंट पास सुविधा समाप्त हो जाएगी। सड़क के समीप रहने वाले विद्यार्थियों को करीब सात किलोमीटर और दूर-दराज के गांवों के छात्रों को 10 किलोमीटर से अधिक पहाड़ी रास्ता पैदल चलना पड़ेगा, जो व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है। स्थानीय लोगों ने परिवहन विभाग से मांग की है कि इस रूट पर एचआरटीसी की सेवा यथावत रखी जाए। यदि निजी बस को अनुमति देनी ही है तो उसे अन्य समय पर चलाया जाए, लेकिन सुबह और शाम की सरकारी बस सेवा (9:45 बजे व 4:25 बजे) से छेड़छाड़ न की जाए। बीएससी प्रथम वर्ष के छात्र रोहित ने चेतावनी दी कि यदि निगम ने प्रक्रिया को तुरंत नहीं रोका तो प्रभावित गांवों के छात्र और ग्रामीण आरएम कार्यालय, बिलासपुर के बाहर अनिश्चितकालीन धरना देने को मजबूर होंगे। स्थानीय लोगों में रीता कंवर (सेवानिवृत्त अध्यापिका), बलवंत शर्मा, भूपचंद (पूर्व प्रधान), अवतार सिंह कंवर, गीता राम नड्डा, लालाराम शर्मा और बाबूराम ने बताया कि यह बस प्रतिदिन 76 किलोमीटर प्रति चक्कर दूरी तय कर लगभग 3500 से 4000 रुपये निगम की आय में जोड़ती है। नम्होल उप तहसील के अंतर्गत आठ पटवार सर्किलों के हजारों लोगों को यह सेवा सुबह-शाम जोड़ती है। ग्रामीणों ने नमहोल से मलोखर होते हुए साई-खारसी और शालुघाट तक दो अतिरिक्त सरकारी बसें चलाने की मांग भी दोहराई है। उनका कहना है कि उप तहसील बनने के बाद से यह मांग कई बार आरटीओ व प्रशासन के समक्ष रखी जा चुकी है, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। उधर आरएम बिलासपुर विवेक लखनपाल ने बताया कि अभी तक रूट को बंद करने की कोई अधिसूचना नहीं आई है। हालांकि घाटे के रूटों को बंद करने की घोषणा सरकार की ओर से की गई है। इसमें जिले के भी रूट शामिल हैं।
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