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Bilaspur News: कथा में सुनाया श्रीराम के वनवास का वृतांत

Thu, 18 Jul 2024 11:42 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Thu, 18 Jul 2024 11:42 PM IST
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Story of Shri Ram's exile narrated in the story
-मस्तिष्क में विकृति आ जाती है तो विवेक बुद्धि काम करना बंद कर देते हैं : कथावाचक
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संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। शहर के श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर में चल रही श्रीराम कथा के सातवें दिन प्रवचन करते हुए कथावाचक पंडित भास्करानंद शर्मा ने कहा कि जब किसी के मस्तिष्क में विकृति आ जाती है तो विवेक बुद्धि काम करना बंद कर देते हैं।
उन्होंने कहा कि देव दानव युद्ध में जब राक्षस महाराजा दशरथ पर भारी पड़ रहे थे तो उनके रथ का एक पहिया टूट गया, लेकिन उनके साथ कैकेयी ने रथ के पहिये में अपनी भुजा से सहारा दिया और दशरथ को वहां से बचाने में कामयाब रही। अपनी पत्नी कैकेयी के इस साहस से प्रसन्न होकर राजा दशरथ ने उन्हें दो वचन का आश्वासन दिया। कैकेयी के पास राजा दशरथ के यह दो वचन धरोहर स्वरूप थे। वहीं जब भगवान राम का विवाह माता सीता से होता है और वे वापस अयोध्या लौट आते हैं तो अयोध्या के लिए नए संभावित राजा राम के राज्याभिषेक की तैयारियां चल रही थीं। मंथरा रानी कैकेयी को बहकाती हैं कि यदि यह सब हो जाता है तो उसका पुत्र भरत राम का दास बनकर रह जाएगा। इसी दौरान मंथरा ने कैकेयी को महाराजा दशरथ द्वारा दिए गए दो वचनों का स्मरण करवाया। कैकेयी मंथरा की बातों में आ गई। उसने राजा दशरथ से एक वचन में भरत को अयोध्या का राजपाठ और दूसरे वचन में राम को 14 वर्ष का वनवास मांग लिया। यह सुन राजा दशरथ बेसुध हो जाते हैं।
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कथावाचक ने बताया कि जब यह बात प्रभु राम को पता चलती है तो वे पिता का आदेश स्वीकार कर वन गमन का निर्णय लेते हैं। इस दौरान माता सीता और भैया लक्ष्मण भी उनके साथ वन जाने की जिद करते हैं और तीनों वन की ओर प्रस्थान करते हैं। उन्होंने कहा कि जब अयोध्या की प्रजा को इसके बारे में पता चला तो वे मार्गों में आकर बैठ गए, ताकि उनके राजा को रोका जा सके। यह भगवान राम के लिए बड़ी मुसीबत बन गई फिर उन्होंने निर्णय लिया कि रात को वे यहां से कूच करेंगे। रात के अंतिम पहर में जब सारी प्रजा सो रही थी तो वे चुपके से निकल गए। इस वृतांत को पंडित भास्करानंद ने बहुत ही मनमोहक तरीके से सुना कर श्रद्धालुओं को भावविभोर किया। कथा समापन पर प्रसाद वितरण किया गया।
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