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Bilaspur News: गुरु की आज्ञा और भक्ति से मिलता है समाधान
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बाबा विश्वकर्मा मंदिर में आयोजित कथा में मौजूद श्रद्धालु। स्रोत: जागरूक पाठक
रामकथा में नीरज शर्मा ने सुनाया राजा दिलीप और नंदिनी की सेवा का प्रसंग
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। बाबा विश्वकर्मा मंदिर में श्री गणेश उत्सव के तहत चल रही रामकथा में व्यास नीरज शर्मा ने राजा दिलीप और दिव्य गाय नंदिनी की सेवा का प्रसंग सुनाया। उन्होंने कहा कि गुरु की आज्ञा और भगवान के प्रति श्रद्धा से कठिन परिस्थितियों का समाधान संभव है। उन्होंने बताया कि राजा दिलीप और उनकी पत्नी सुदक्षणा संतान सुख से वंचित थे। दोनों महर्षि वशिष्ठ के आश्रम पहुंचे। महर्षि ने उन्हें कामधेनु की पुत्री नंदिनी की सेवा करने का निर्देश दिया। राजा और रानी ने 21 दिनों तक पूरी श्रद्धा से नंदिनी की सेवा की।
कथा के अनुसार एक दिन सिंह ने नंदिनी को घेर लिया। राजा दिलीप ने अपने प्राणों की परवाह न करते हुए नंदिनी को छोड़ने और स्वयं को सिंह का आहार बनाने की बात कही। उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर उन्हें वरदान मिला। नंदिनी के आशीर्वाद से राजा दिलीप को पुत्र रघु की प्राप्ति हुई। आगे चलकर उनके नाम से रघुवंश प्रसिद्ध हुआ।
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संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। बाबा विश्वकर्मा मंदिर में श्री गणेश उत्सव के तहत चल रही रामकथा में व्यास नीरज शर्मा ने राजा दिलीप और दिव्य गाय नंदिनी की सेवा का प्रसंग सुनाया। उन्होंने कहा कि गुरु की आज्ञा और भगवान के प्रति श्रद्धा से कठिन परिस्थितियों का समाधान संभव है। उन्होंने बताया कि राजा दिलीप और उनकी पत्नी सुदक्षणा संतान सुख से वंचित थे। दोनों महर्षि वशिष्ठ के आश्रम पहुंचे। महर्षि ने उन्हें कामधेनु की पुत्री नंदिनी की सेवा करने का निर्देश दिया। राजा और रानी ने 21 दिनों तक पूरी श्रद्धा से नंदिनी की सेवा की।
कथा के अनुसार एक दिन सिंह ने नंदिनी को घेर लिया। राजा दिलीप ने अपने प्राणों की परवाह न करते हुए नंदिनी को छोड़ने और स्वयं को सिंह का आहार बनाने की बात कही। उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर उन्हें वरदान मिला। नंदिनी के आशीर्वाद से राजा दिलीप को पुत्र रघु की प्राप्ति हुई। आगे चलकर उनके नाम से रघुवंश प्रसिद्ध हुआ।
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